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पहले खुद नशे में डूबे रहता था अब लोगों को इस बीमारी से बचाने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी / पहले खुद नशे में डूबे रहता था अब लोगों को इस बीमारी से बचाने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी

Dhar News - राजीव तिवारी, एक ऐसा शख्स जिसने अपनी जिंदगी के पंद्रह साल नशे की गिरफ्त में निकाले। शराब से लेकर स्मैक तक सब तरह का...

Aug 20, 2018, 02:35 AM IST
पहले खुद नशे में डूबे रहता था अब लोगों को इस बीमारी से बचाने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी
राजीव तिवारी, एक ऐसा शख्स जिसने अपनी जिंदगी के पंद्रह साल नशे की गिरफ्त में निकाले। शराब से लेकर स्मैक तक सब तरह का नशा किया। नशे के लिए प|ी और दादी के जेवर तक चोरी से बेच दिए। लेकिन अब जिंदगी इसके ठीक उलट है। पिछले छह साल से कोई नशा नहीं किया, खुद का नशामुक्ति केंद्र चलाते हैं। अब नशामुक्ति राजीव का जुनून बन गया है। राजीव ने दो महीने पहले सरकारी नौकरी छोड़ दी, ताकि अपना पूरा ध्यान केवल नशामुक्ति पर लगा सकें। प|ी एक छोटा सा बुटिक चला रहीं हैं, जिससे जिंदगी की गाड़ी चल रही है।

राजीव की कहानी उन्हीं के शब्दों में : मैं आज भी रोज सुबह यह संकल्प लेता हूं कि आज नशा नहीं करूंगा : राजीव तिवारी

मैं जब 11 वीं कक्षा में पढ़ रहा था 1993 में तब मैंने पहली बार शराब पी थी। इसके बाद मैं धीरे-धीरे इसकी गिरफ्त में आ गया। मेरे बाकी दोस्त एक सीमा में ही पीते थे, लेकिन मैं अनलिमिटेड पीने लगा। ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली में रह कर चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई कर रहा था। 2005 में पिताजी की मृत्यु के कारण वापस भोपाल आना पड़ा। सरकारी नौकरी लग गई, जल्द ही शादी कर ली। लेकिन गलत सोहबत का असर यह हुआ कि ब्राउन शूगर और स्मैक की लत लग गई। खाली मकान और पाइप में बैठ कर मैं पावडर लेने लगा। यही मेरी जिंदगी थी। जवाहर चौक का सरकारी मकान छोड़ कर नेहरू नगर के निजी मकान में आ गए। फिर यह निजी मकान भी बिक गया। घर में चोरी करने लगा। लोगों से झूठ बोल कर पैसे उधार लेने लगा। छोटे भाई ने भी साथ छोड़ दिया। प|ी भी कई बार छोड़ कर चली गई, लेकिन मैं उसे मना कर ले आता था। किसी परिचित के माध्यम से नशामुक्ति केंद्र की जानकारी लेकर झूठ बोल कर प|ी मुझे बंगलुरू ले गई। वहां मुझे रोजाना संकल्प दिलाया जाता था- मैं आज नशा नहीं करूंगा। ऐसा लगातार चार महीने तक चला। आखिरकार मेरी लत छूट गई। मुझे वहां पता चला कि डब्ल्यूएचओ ने नशे को बीमारी माना है और इसका पूरा इलाज करना पड़ता है। संकल्प शक्ति को मजबूत करने के लिए ध्यान और योग करना होता है। अब मेरी जिंदगी पटरी पर आ रही है, दो साल पहले मैंने अपना नशामुक्ति केंद्र शुरू किया है।

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पहले खुद नशे में डूबे रहता था अब लोगों को इस बीमारी से बचाने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी

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