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सूदखोरों से त्रस्त बेटे को न्याय दिलाने के लिए पिता ने किया पुलिस का स्टिंग

Dhar News - सूदखोरों के चंगुल में फंसे लोग किस प्रकार प्रताड़ित हो रहे हैं और पुलिस किस तरह से उन्हें परेशान करती है, उसका...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:40 AM IST
सूदखोरों से त्रस्त बेटे को न्याय दिलाने के लिए पिता ने किया पुलिस का स्टिंग
सूदखोरों के चंगुल में फंसे लोग किस प्रकार प्रताड़ित हो रहे हैं और पुलिस किस तरह से उन्हें परेशान करती है, उसका चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिला पंचायत से सेवानिवृत्त अकाउंट ऑफिसर के बेटे ने सूदखोरों से परेशान होकर जहर खा लिया, लेकिन पुलिस ने बेटे के बयान लिए बगैर ही केस बंद कर दिया। पुलिस के रवैये को देख पिता ने खुफिया कैमरे से थाने में जाकर जांचकर्ता पुलिस अधिकारी का स्टिंग ऑपरेशन किया। इसमें एएसआई ने पिता के सामने ही बेटे से गालीगलौज से बात की और कबूला कि हमने केस बंद कर दिया है, अब खोलेंगे तो हम पर ही कार्रवाई हो जाएगी। मामला पुलिस की जनसुनवाई में पहुंचा, लेकिन कार्रवाई के बजाय केस को दबाने की कोशिश की जा रही है।

चिट्‌ठी में लिखे चार लोगाें के नाम, अब मांग रहे दो गुना पैसा

मामला अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र की सिल्वर ऑक्स कॉलोनी का है। यहां रहने वाले सुभाषचंद्र दुबे जिला पंचायत के अकाउंट ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त हैं। 3 जनवरी को उनके बेटे सचिन ने घर पर ही जहर खा लिया था। वे बेटे को लेकर निजी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल से एमएलसी थाने पहुंची तो एएसआई राजेंद्र कुमार ने पिता से संपर्क किया। बेटे ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी सुभाषचंद्र को कोई जानकारी नहीं थी और वे घबराए हुए भी थे, तो उन्होंने एएसआई से कह दिया कि बेटे ने गलती से कुछ खा लिया। बाद में सुभाषचंद्र को बेटे की लिखी चिट्‌ठी मिली, जिसमें उसने चार लोग आनंद अग्रवाल, किशोर शर्मा, केसी जैन और राजेंद्र दलाल से लाखों रुपए कर्ज लेने की बात लिखी। इसमें उसने लिखा कि सारा पैसा ब्याज सहित चुकाने के बाद भी लगातार परेशान कर रहे हैं और दो गुना रुपयों की मांग कर रहे हैं। अस्पताल में उपचार के बाद सचिन बच गया, पर पुलिस ने मामला दबा दिया।

दोबारा केस खुलवाकर मुझे फंसवाओगे क्या ?

बयान नहीं लिए : एएसआई ने कहा- इलाज करवाओ, बाद में देखेंगे

सुभाषचंद्र ने एएसआई राजेंद्र को सुसाइड नोट की जानकारी दी तो एएसआई ने कहा अभी तो इलाज कराओ, मैं घर आकर बाद में बयान ले लूंगा। एएसआई न घर आए और न सचिन के बयान हुए। इस पर सुभाषचंद्र को लगा कि मामले में कुछ गड़बड़ है। वे बेटे के साथ कपड़ों में खुफिया कैमरा लगाकर अन्नपूर्णा थाने पहुंचे। यहां एएसआई ने कबूला कि उन्होंने पहली बार हुई बात के आधार पर ही केस बंद कर दिया। उन्होंने सचिन से अभद्र तरीके से बात की और धमकाया कि अगर उसने किसी से कुछ कहा तो उल्टा केस लगाकर हवालात में बंद कर देंगे।

दोबारा सुनवाई नहीं : टीआई से भी नहीं मिलने दिया स्टाफ ने

सुभाषचंद्र ने बताया 23 जनवरी को वे डीआईजी ऑफिस जनसुनवाई में पहुंचे और आवेदन दिया। डीआईजी नहीं मिले तो एसपी ने जांच का आश्वासन दिया। कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे मार्च में फिर जनसुनवाई में पहुंचे, पर स्टाफ ने उन्हें यह कहकर भीतर नहीं जाने दिया कि एक बार शिकायत करने वाले दोबारा नहीं जा सकते। जाना है तो थाने से जांच की फाइल लेकर आओ। सुभाषचंद्र थाने भी पहुंचे, लेकिन स्टाफ ने एक भी बार उन्हें टीआई से मिलने नहीं दिया।

नोटिस नहीं दिए : एसडीएम को फाइल भेजने में भी लापरवाही

अन्नपूर्णा पुलिस ने मामले में धारा 107, 116 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का केस बनाया। इसमें एक महीने बाद भी आरोपियों की फाइल एसडीएम ऑफिस नहीं भेजी। इस पर पिता ने फिर सूचना के अधिकार में आवेदन लगाया तो फाइल पहुंची, लेकिन आरोपियों को नोटिस ही नहीं भेजे गए।

डीआईजी ने कहा : ऐसा किया है तो गलत है, हम कार्रवाई करेंगे

एएसआई राजेंद्र कुमार ने मामले में कहा कि जो फरियादी ने बयान दिए, उसी आधार पर कार्रवाई की। मेरे पास उनका दस्तखत किया हुआ दस्तावेज है। इधर, डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने कहा कि मामला गंभीर है, यह मेरे संज्ञान में नहीं था। सूदखोरों पर कार्रवाई के लिए थाना स्टाफ को तत्काल एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं। मैं सोमवार को पूरा प्रकरण दिखवाता हूं। थाने के एएसआई ने जैसा बर्ताव किया, वह भी गलत है। उस पर कार्रवाई होगी।

एएसआई राजेंद्र

24 मिनट की रिकॉर्डिंग के प्रमुख अंश

सुभाषचंद्र : सर, आपने बयान का कहा था, लेकिन आप आए ही नहीं, मुझे बाद में पता चला कि बेटे को सूदखोर परेशान कर रहे हैं।

एएसआई : तुमने जो कहा था, उसके आधार पर मैंने केस बंद कर दिया। अब दोबारा केस खोलकर क्या मैं फंस जाऊं?

सुभाषचंद्र : नहीं। हम नहीं चाहते कि आप फंसें, लेकिन बेटे को न्याय तो मिलना चाहिए।

एएसआई : इसके लिए बयान से कुछ नहीं होगा। एक कागज पर पूरा ब्योरा लिखकर दो, हम दूसरी कार्रवाई कर देंगे।

सचिन : मैंने सारे पैसे चुका दिए हैं, ब्याज भी दे दिया है, लेकिन वे मेरे चेक नहीं दे रहे हैं।

एएसआई : (गाली देते हुए) मुंह खोला तो उल्टा केस लगाकर अंदर बंद कर दूंगा। ऐसा काम करते ही क्यों हो?

सुभाषचंद्र : सर इसके बयान तो ले लीजिए।

एएसआई : मैं जो बता रहा हूं वह करो, आवेदन दो। हम सूदखोरों को ऐसा धमकाएंगे कि वे फिर कॉल नहीं लगाएंगे।

बेटे सचिन के साथ सुभाषचंद्र दुबे

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