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कर्नाटक में एससी-एसटी की 51 सीटें, 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा 26 पर आगे थी

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:45 AM IST
कर्नाटक में एससी-एसटी की 51 सीटें, 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा 26 पर आगे थी

भास्कर न्यूज | बेंगलुरू

देश भर में पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी/एसटी एक्ट पर फैसले के बाद काफी विरोध-प्रदर्शन हुए। केंद्र सरकार ने इसे देखते हुए फैसले के विरोध में तुरंत सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की थी। इसकी एक बड़ी वजह कर्नाटक चुनाव भी था। क्योंकि राज्य में दलित और आदिवासी समुदाय के करीब 26% वोटर हैं। वहीं, राज्य से भाजपा के केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि संविधान में बदलाव होना चाहिए। इसका राज्य में काफी विरोध हुआ था।

कर्नाटक में विधानसभा की 224 में 36 सीटें एससी और 15 एसटी के लिए सुरक्षित हैं। राज्य में करीब 100 सीटों पर अच्छी खासी तादाद में दलित और आदिवासी समुदाय के वोटर हैं। राज्य की करीब 60 सीटों पर दलित समुदाय और 40 सीटों पर आदिवासी समुदाय के वोटर असर डालते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा वार सीटों पर बढ़त के लिहाज से भाजपा 36 एससी सीटों में से 18 और कांग्रेस 16 सीटों पर आगे थी। वहीं, एसटी सीटों पर भाजपा 8 और कांग्रेस 7 सीटों पर आगे थी। अब भाजपा ने इन सीटों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। कांग्रेस ने भी पूरी ताकत झोंक रखी है।


कर्नाटक में 19% दलित और 7% आदिवासी समुदाय के वोटर हैं

कर्नाटक का वोट बैंक

एससी और एसटी समुदाय के करीब 26% वोटर

सीएम सिद्दारमैया ने तीन समुदायों को मिलाकर अहिंदा बनाया है



19%

7%



36

एससी सीटें

सुरक्षित सीटें

15

एसटी सीटें


60

एससी सीटें

अब सिद्दारमैया की चुनौती, बोले- मोदी 15 मिनट में कागज देखकर येद्दियुरप्पा की उपलब्धियां गिनाएं

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कर्नाटक की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर किए गए हमले का सीएम सिद्दारमैया ने जवाब दिया है। उन्होंने ट्वीट किया कि मैं पीएम मोदी को चुनौती देता हूं कि वह 15 मिनट पेपर देखकर पूर्व सीएम बीएस येद्दियुरप्पा सरकार की उपलब्धियां गिनाने की। वहीं, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का राज्य में कांग्रेस नेताअों के घर छापे का सिससिला जारी है।

एससी-एसटी सीटों पर असर

40

एसटी सीटें



कर्नाटक में परिवारवाद

भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस नेताओं के 52 सगे मैदान में

संतोष कुमार, नई दिल्ली | कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस ने परिवारवाद की पूरी फौज चुनावी मैदान में उतार रखी है। राज्य में 12 मई को होने वाले वोटिंग के लिए 2,655 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से 2436 पुरुष और 219 महिला हैं। राजनीतिक दलों के परिवारवाद को देखें तो कुल 52 सगे-संबंधी उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। कर्नाटक में जेडीएस को तो पिता-पुत्र की पार्टी के नाम से जाना ही जाता है। पर इस मामले में कांग्रेस और भाजपा भी ज्यादा पीछे नहीं है। दोनों पार्टियों ने चुनाव जीतने के फॉर्मूले पर अपने नेताओं के सगे-संबंधियों को खूब टिकट दिए हैं। जेडीएस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के दोनों बेटे-बहू चुनाव मैदान में हैं। भाजपा और कांग्रेस के सीएम पद के उम्मीदवारों के बेटे भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं।

प्रमुख बड़े नेताओं के ये करीबी मैदान में हैं

एचडी देवगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री): जेडीएस चीफ बेटा एचडी रेवन्ना, एचडी कुमारस्वामी, बहू- भवानी रेवन्ना, अनिथा कुमारस्वामी

सिद्धारमैया: मुख्यमंत्री खुद 2 सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, बेटे- यतींद्र भी मैदान में हैं।

बीएस येद्दियुरप्पा: भाजपा के सीएम उम्मीदवार इनके अलावा बड़े बेटा राघवेंद्र चुनाव मैदान में हैं।

गृह मंत्री रामलिंगा रेड्‌डी बेटी सोमैया रेड्‌डी भी लड़ रहीं

कानून मंत्री टीवी जयेंद्र

बेटा संतोष जयचंद

भाजपा नेता जनार्दन रेड्‌डी इनके दोनों भाई- सोमेश्वर, करुणाकरण रेड्‌डी मैदान में

मल्लिकार्जुन खड़गे बेटा प्रियांक खड़गे कलबुर्गी से

वीरप्पा मोइली बेटा हर्ष मोईली भी लड़ रहे हैं

मार्ग्रेट अल्वा इनकी बेटी निवेदिता अल्वा कांग्रेस के टिकट पर हैं

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कर्नाटक में एससी-एसटी की 51 सीटें, 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा 26 पर आगे थी
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