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चप्पल से हुई थी दुष्कर्मी की पहचान, डीएनए रिपोर्ट व बड़ी बहन की गवाही ने दिलाई सजा

आरोपी को सजा सुनाए जाने से पहले ही लड़की के माता-पिता व रिश्तेदारों के साथ जगन्नाथपुरा मोहल्ले के लोग भी कोर्ट...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:00 AM IST

चप्पल से हुई थी दुष्कर्मी की पहचान, डीएनए रिपोर्ट व बड़ी बहन की गवाही ने दिलाई सजा
आरोपी को सजा सुनाए जाने से पहले ही लड़की के माता-पिता व रिश्तेदारों के साथ जगन्नाथपुरा मोहल्ले के लोग भी कोर्ट पहुंच गए। सभी बहुत ज्यादा गुस्से में थे। न्यायालय के बाहर खड़ी महिलाएं चिल्ला-चिल्लाकर कह रह थी कि यदि आरोपी को फांसी की सजा नहीं दे रहे हो तो हमारे पास बाहर भेज दो। हम उसे सजा देंगे। सरकारी वकील शरद कुमार पुरोहित ने जब उन्हें बताया कि आरोपी को फांसी की सजा हो गई है तो वे अगली तारीख कब और कहां होगी, इसका पूछने लगे। उनके आक्रोश को देखते हुए जैसे-तैसे सरकारी वकील ने उन्हें समझा बुझाकर रवाना किया। हालातों को देखते हुए कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

संयोग : छोटी बच्ची से ज्यादती में गुरुवार को ही आया दूसरा बड़ा फैसला

छोटी बच्ची के साथ ज्यादती के मामले में जिले में न्यायालय का यह दूसरा बड़ा फैसला है। संयोग यह कि यह फैसला भी गुरुवार को ही आया। इससे पहले 15 फरवरी 17 को गुरुवार के ही दिन धार में विशेष कोर्ट (अजा-अजजा अत्याचार निवारण अधिनियम) के जज हरिशरण यादव ने 7 साल की बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले 55 साल के अधेड़ पदिया पिता रणछोड़ काग को मरते दम तक कैद रखने की सजा सुनाई थी। इस प्रकरण में पुलिस ने 15 दिन में कोर्ट में चालान पेश किया था और मात्र 8 कार्य दिवस में सुनवाई पूरी हो गई। 55वें दिन फैसला आ गया।

सुनवाई के दौरान एक जज का हो गया तबादला : इस प्रकरण की सुनवाई पूर्व में एडीजे आरके जैन कर रहे थे। बीच में उनका तबादला हो गया और उनके स्थान पर एडीजे अकबर शेख आए। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर पूरे मामले की सुनवाई की।

कोर्ट के बाहर बच्ची के मोहल्ले के लोगों ने आरोपी के खिलाफ नारेबाजी।

हैवानियत की हद : जिस जगन्नाथपुरा मोहल्ले में घटना हुई वहां मजदूरी करने वाले 20 से 25 परिवार रहते हैं। 15 दिसंबर 17 की शाम काम छुट्टी होने पर बच्ची के पिता राशन और खाने-पीने का सामान लाए थे। बच्ची और उसकी बड़ी बहन कचोरी व सेव परमल खा रही थी। तभी आरोपी करण उसे उठा ले गया। ज्यादती की। सिर पत्थर से कुचल दिया। घरवाले बच्ची को ढूंढ रहे थे तब बहन ने बताया उसने करण को ले जाते देखा था। परिजन करण के पास गए तो वह नशे में धुत्त सो रहा था। बच्ची का पूछने पर बोला-ठोक दिया…, ठोक दिया…। उसकी बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया था। पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि करण एक साल से बच्ची का शारीरिक शोषण भी कर रहा था।

इन धाराओं में हुई सजा

363 में पांच वर्ष का सश्रम कारावास व एक हजार रुपए अर्थदंड।

376 (2) (अाई) आजीवन कारावास व 5 हजार रुपए अर्थदंड।

पॉक्सो एक्ट धारा 5 (एम) सहपठित धारा 6 में आजीवन कारावास व 5 हजार रुपए अर्थदंड।

302 में मृत्युदंड और 5 हजार रुपए अर्थदंड।

201 में 5 वर्ष का सश्रम कारावास व 1 हजार रुपए अर्थदंड।

6 साल में दूसरी बार मनावर कोर्ट ने दी फांसी की सजा, पहले 36वें दिन दिया था फैसला : मनावर कोर्ट ने 6 साल में दूसरी बार छोटी से बच्ची से ज्यादती के मामले में आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। इससे पहले वर्ष 2012 में 36वें दिन फैसला दिया था। घटना मनावर थानाक्षेत्र के करोली गांव की थी। 31 अक्टूबर 2012 को 6 साल की बच्ची के साथ उसके पिता के मौसेरे भाई सुनील भूरिया ने गन्ने के खेत में ले जाकर ज्यादती की और फिर गला दबाकर हत्या कर दी थी। तत्कालीन एडीजे अविनाश कुमार खरे ने 5 दिसंबर 12 को एफआईआर के 36वें दिन आरोपी को फांसी की सजा सुना दी। इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने तो सजा काे यथावत रखा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट से सजा उम्रकैद में बदल गई।

4 साल में 40 ज्यादती की घटना जिसमें बच्ची की उम्र 12 साल या इससे कम : वर्ष 2018 में जनवरी से अब तक 12 साल या इससे कम उम्र की बच्चियों के साथ ज्यादती की 6 घटनाएं हुई। वहीं वर्ष 2017 में ऐसी 14 घटनाएं हुई थी जिनमें से 3 मनावर क्षेत्र की थी। इसी तरह वर्ष 2016 में 11 और 2015 में 9 ऐसी बच्चियों के साथ ज्यादती की घटनाएं हुई जिनकी उम्र 12 साल या इससे कम थी।

आगे क्या : फांसी की सजा की पुष्टि के लिए प्रकरण हाईकोर्ट जाएगा। हाईकोर्ट फांसी को यथावत रखती है तो सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। राष्ट्रपति के यहां दया याचिका लगा सकता है।

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