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डिवाइडर पर थर्मोप्लास्ट की जगह आइल पेंट से मार्किंग

एयरपोर्ट रोड पर स्काय ब्लू रंग से हो रही है मार्किंग। भास्कर संवाददाता | इंदौर प्रधानमंत्री 14 सितंबर को इंदौर...

Danik Bhaskar

Sep 13, 2018, 02:35 AM IST
एयरपोर्ट रोड पर स्काय ब्लू रंग से हो रही है मार्किंग।

भास्कर संवाददाता | इंदौर

प्रधानमंत्री 14 सितंबर को इंदौर आ रहे हैं। दौरे के दौरान वह बोहरा समाज के धर्मगुरु से मुलाकात करेंगे। नगर निगम उन रास्तों को संवार रहा है, जहां से प्रधानमंत्री का काफिला गुजरेगा। इसके चलते निगम अफसरों ने मनमाने ढंग से सड़क और डिवाइडरों पर मार्किंग शुरू करा दी है। ठेकेदार एयरपोर्ट थाने से रामचंद्र चौराहे तक डिवाइडरों पर साधारण आइल पेंट से मार्किंग कर रहा है, जबकि नियमानुसार गर्म थर्मोप्लास्ट से मार्किंग की जाना चाहिए। इतना ही नहीं, मार्किंग भी स्काय ब्लू रंग की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डिवाइडरों पर पीले या काले रंग से मार्किंग होना चाहिए। हैरत की बात यह है कि इसकी जानकारी निगम यातायात प्रभारी को भी नहीं है।

जानकारों के अनुसार डिवाइडरों और सड़कों पर यदि साधारण आइल पेंट से मार्किंग की गई तो वह ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। उसका रिफलेक्टिव पॉवर भी कम होगा। रात में मार्किंग की चमक नहीं आएगी। सामने से आ रहे ट्रैफिक की रोशनी आंखों पर पड़ने से वाहन चालकों को डिवाइडर स्पष्ट नहीं दिखेगा। ऐसे में दुर्घटना का अंदेशा रहेगा। डीबी स्टार टीम ने जब मुआयना किया तो पाया, डिवाइडर के अाइल पेंट पर धूल चढ़ने लगी है। वह धुंधला पड़ने लगा है।


प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर नगर निगम के अफसरों ने इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों को ताक पर रख दिया है। वह शहर में डिवाइडरों पर गर्म थर्मोप्लास्ट के बजाय साधारण आइल पेंट से मार्किंग करा रहे हैं। यह मार्किंग भी अंतरराष्ट्रीय मानक रंगों के अनुरूप नहीं है। डिवाइडरों पर स्काय ब्लू रंग से मार्किंग की जा रही है, जबकि यह काले या पीले रंग से होना चाहिए।

रोड कांग्रेस के नियम

इंडियन रोड कांग्रेस के अनुसार सड़कों पर डिवाइडरों और अन्य मार्किंग के लिए दिशा निर्देश हैं।

1. डिवाइडरों पर गर्म थर्मोप्लास्ट मटेरियल और ग्लास बीड्स से मार्किंग होना चाहिए। इससे रेट्रोरिफ्लेक्टिव सतह बनती है, जो रात में सामान्य हेडलाइट में स्पष्ट दिखाई देती है। आम स्थानों पर काले-सफेद रंग और डेंजर जोन में काली-पीली रंग की पट्टियों से मार्किंग होना चाहिए।

2. डिवाइडरों से 350 एमएम दूर सड़क पर थर्मोप्लास्ट मटेरियल और ग्लास बीड्स से रेखा खिंची होना चाहिए। इस पर भूरे पीले रंग के रोड स्टड्स लगे होना चाहिए। इससे सड़क के घुमाव और मोड़ का पता चलता है।

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