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डीएवीवी के 8 विभागों को मिल सकता है एक्सीलेंस का दर्जा

एक वर्ष पहले
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देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के 8 टीचिंग विभागों को सेंटर फॉर एक्सीलेंस का दर्जा मिल सकता है। इसके लिए प्रदेश सरकार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने 14 टीचिंग विभागों के नाम भेजे हैं और 72 करोड़ रुपए की ग्रांट मांगी है। डीएवीवी को ग्रांट के रूप में 35 करोड़ रुपए तक मिलने की संभावना है। अप्रैल में इसकी घोषणा हो सकती है।

खुद उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने पिछले माह यूनिवर्सिटी की एक बैठक में इसके संकेत दिए थे। बताते हैं कि वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट के तहत मिलने वाली इस राशि से यूनिवर्सिटी में सिर्फ रिसर्च से जुड़े काम होंगे। फिलहाल, यूनिवर्सिटी को इसके लिए अभी भोपाल में प्रेजेंटेशन भी देना होगा। उसे बताना होगा कि किस स्तर की रिसर्च होगी और कौन-कौन सी सुविधाएं जुटाई जाएंगी। खास बात यह है इन जिन विभागों में इस राशि से रिसर्च पर काम होगा, उन्हें बेहतरीन रिसर्च के आधार पर बाद में यूजीसी से अच्छी ग्रांट का रास्ता भी साफ हो जाएगा।

तब आठ विभागों के नाम भेजे थे


दरअसल, वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट के तहत शासन ने पिछले साल भी सभी स्टेट यूनिवर्सिटी से इस पर प्रस्ताव मांगे थे। डीएवीवी ने तब 8 विभागों के प्रस्ताव भेजे थे। सालभर तक कई बार भोपाल में प्रेजेंटेशन भी हुए थे, लेकिन 26 नवंबर 2019 को जब घोषणा हुई तो यूनिवर्सिटी को झटका लगा था। महज 2 विभागों को यह दर्जा मिल पाया था। ग्रांट भी 40 करोड़ के बजाय महज दो करोड़ रुपए की दी गई थी। वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के तहत उच्च शिक्षा विभाग गुणवत्ता उन्नयन परियोजना में सेंटर फॉर एक्सीलेंस के लिए प्रदेश की बाकी यूनिवर्सिटी को इसके मुकाबले ग्रांट भी कई गुना ज्यादा मिली थी। यूनिवर्सिटी की नाराजगी के बाद शासन ने दोबारा प्रस्ताव मांगे थे और डीएवीवी ने 14विभागों के नाम के प्रस्ताव भेजे थे।

पहले इन्हें मिला दर्जा- डीएवीवी के दो विभागों कॉमर्स एंड मैनेजमेंट और डेटा साइंस एंड फॉर कॉस्टिंग को यह दर्जा मिला था। इसके अलावा प्लेसमेंट सेल को अलग से जोड़ा गया था। कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के लिए 70 लाख और डेटा साइंस एंड फॉर कॉस्टिंग के लिए महज 1 करोड़ 2 लाख की ग्रांट मिली थी। प्लेसमेंट सेल को जरूर 5 लाख अलग से मिले।

सेल्फ फाइनेंस विभाग शामिल नहीं- क्वालिटी रिसर्च के लिए डीएवीवी ने सेल्फ फाइनेंस को छोड़ बाकी विभागों के नाम भेजे हैं। सेल्फ फाइनेंस विभागों को इस बार गाइड लाइन में शामिल नहीं किया गया था, इसलिए प्रशासन ने आईआईपीएस, आईएमएस जैसे विभागों के प्रस्ताव नहीं भेजे हैं।

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