क्रोध से तन का व भाव से विकारों का नाश होता है

Dhar News - आश्रम में प्रतिदिन धार्मिक आयोजन व यज्ञ चल रहे गले में सोने की मोटी चेन परंतु उसे पहनने वाला बेचैन। घर में...

Mar 05, 2020, 08:25 AM IST

आश्रम में प्रतिदिन धार्मिक आयोजन व यज्ञ चल रहे

गले में सोने की मोटी चेन परंतु उसे पहनने वाला बेचैन। घर में सोफा सेट, टीवी सेट, किचन सेट है परंतु उसका उपयाेग करने वाले मनुष्य का मस्तिष्क अपसेट है। भौतिक साधनों से मनुष्य हमेशा अपसेट रहता है परंतु भगवान का भजन करने से सबकुछ सेट हो जाता है। जिस प्रकार हमारे धर्म ग्रंथ गीता कर्म शास्त्र है, भागवत भक्ति शास्त्र है और रामायण प्रयोग शास्त्र है।

इन तीनों शास्त्र के अध्ययन में डूब कर मनुष्य पारलौकिक आनंद की अनुभूति कर सकता है। भारत वर्ष में जन्म लेने वाला कोई व्यक्ति अनाथ नहीं हो सकता क्योंकि भारतवर्ष के भाग्य विधाता भगवान जगन्नाथ हैं। तुम जहां भी हो जैसी भी स्थिति में हो वह सब कुछ तुम्हारे विचारों का परिणाम है। दूसरा कोई भी इसका कारण नहीं बन सकता।

यह बात श्री अंबिका आश्रम बालीपुर धाम में ब्रह्मलीन संत गजानंदजी महाराज की जन्म शताब्दी वर्ष पूर्णाहुति महोत्सव के अंतर्गत चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन बुधवार काे कथावाचक मदन मोहन महाराज ने श्रद्धालुअाें से कही। महाराज ने अागे कहा जो साधक साधना के बल पर बुद्धि से आत्मा पर अतिक्रमण कर लेता है वह साधक ऊपर उठ जाता है। काम से कर्म का नाश होता है, क्रोध से तन का नाश होता है, भाव से विकारों का नाश होता है। जहां प्रेम होता है वहां अहंकार नहीं होता है और जहां अहंकार होता है वहां भगवान नहीं होते हैं। हम पाश्चात्य संस्कृति की ओर भाग रहे हैं जबकि अर्पण, तर्पण, समर्पण ही हमारी भारतीय संस्कृति है।

दुनिया में पीने लायक ऐसा कोई पेय पदार्थ नहीं है जो हमें मन की शांति दिला सके और अगर कोई है तो वह है परमात्मा का नाम। जिसको पीने से परमानंद की प्राप्ति होती है। अंबिका आश्रम में प्रतिदिन धार्मिक आयोजन व यज्ञ संत योगेशजी व सुधाकरजी महाराज के सान्निध्य में चल रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बालीपुर पहुंच कर कथा का अानंद ले रहे।

मनावर. बालीपुर अाश्रम में व्याससीठ से कथा सुनाते कथावाचक मदन मोहन महाराज।

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