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अनूपजी का आना...भजनों की गंगा में श्रोताओं का डूब जाना, स्वर, नाद और ताल की त्रिवेणी का संगम ही था

Dhar News - अनूपजी का आना और भजनों की गंगा में श्रोताओं का डूब जाना, स्वर, नाद और ताल की त्रिवेणी का संगम ही था। धार के लिए यह एक...

Nov 22, 2019, 06:57 AM IST
Dhar News - mp news anupji39s arrival the drowning of the audience in the ganges of hymns was the confluence of the triveni of voice sound and rhythm
अनूपजी का आना और भजनों की गंगा में श्रोताओं का डूब जाना, स्वर, नाद और ताल की त्रिवेणी का संगम ही था। धार के लिए यह एक अनूठी पहल थी। राष्ट्रीय महत्व स्थापित कर चुका पद्मश्री फड़के संगीत समारोह जो गत सात वर्षों से निरंतर स्वरगंगा के रूप में प्रवाहित होता चला आया है। इसमें धार क्षेत्र ही नहीं दूर-दूर तक के संगीत रसिक आकर स्वरगंगा में स्वरांजलि के रूप में गाेता लगाते रहे हैं। जिस स्वर को देश का सुधी श्रोता इतने वर्षों से आत्मसात किए हुए थे, आज साक्षात अपने सामने उसी आवाज को सुनकर आत्ममुग्ध हो गए।

यह प्रसंग था 21 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भजन सम्राट अनूप जलोटा को पद्मश्री फड़के संगीत सम्मान प्रदान करने का। जिस घड़ी के इंतजार में श्रोता दिल थाम कर बैठे थे। वह घड़ी आखिरकार रात 8.25 मिनट पर आई। जब हारमोनियम के स्वरों को अनूपजी की उंगलियों ने छुआ और उनके गले से जैसे ही ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन गुंजित हुआ। खचाखच भरे सभाग्रह में सुनकारों का उत्साह चरम पर आ गया। तालियों की गड़गड़ाहट ने इस भजन को मानो हर एक सुनकार के जेहन में उतार दिया। श्राेताओं का उत्साह देखकर अनूपजी ने भी उपस्थित लोगों को कहा कि पहली लाइन वे गाएंगे और उसे वे दोहराएंगे। भजनों की यह गंगा का वेग देखकर अनूपजी उत्साह से परिपूर्ण हो गए और उन्होंने श्याम पीया मोरी रंग दे चुनिरया और अच्युतम केशवम कृष्णदा मोदरम गाया तो लोग झूमने से खुद को नहीं रोक सके। गजल कल चौदवीं का चांद था, होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो, इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले की प्रस्तुति देकर धार के लोगों का दिल जीत लिया।

भास्कर के लिए संगीतज्ञ पं. देशराज वशिष्ठ ने की रिपोर्टिंग

अनूप जलोटा के भजन के साथ पूरे समय गूंज रही थी श्रोताओं की तालियां : एक ओर अनूपजी भजन गा रहे थे तो श्रोता तालियों के साथ उनका साथ दे रहे थे। अनूपजी भी अपने हाथ से इशारा कर लोगों को गाने भजन की पंक्तियां दोहराने के लिए कह रहे थे। कार्यक्रम का संचालन अरूणा बोडा ने किया। आभार कवि संदीप शर्मा ने माना। तबले पर संगत रविशंकर भट्‌ट ने की। फोटो | रॉकी मक्कड़

यहां का वातावरण देखकर गाने का मन हो गया : अनूपजी ने भी मंच से धार और यहां के कलाकारों की प्रशंसा की। भजन गाते समय वे प्रद्मश्री फड़के जी काे लेकर भावुक हो गए। उन्होंने फड़के जी की मूर्तिकला का भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मुझे मुंबई में आयोजकों की ओर से बताया था कि आपको सम्मान लेने के आना है, लेकिन यहां आकर वातावरण देखकर गाने का मन हो गया।

9.5 बजे हुआ संगीत सरिता का समापन : रात ठीक 9.5 बजे जलाेटाजी ने अपने गायन को विराम दिया। इसके बाद वे जैसे ही मंच से नीचे उतरे तो क्या युवा, क्या बुजुर्ग सब उनके साथ सेल्फी लेने के लिए उमड़ पड़े। यहां तक की उन्हें चंद कदम दूर अपनी कार में पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। आयोजक डॉ. दीपेंद्र शर्मा व संचालन समिति को इस आयोजन पर लोग बधाई देते नजर आए।

नवोदित कलाकारों ने भी दी प्रस्तुति : नवोदित कलाकारों में धार के उभरते कलाकार यश शर्मा का गायन हुआ। उन्होंने भी जलोटा से आशीर्वाद लिया। पूरी सभा स्वरमय हो गई। ऐसा अद्वितीय और अनूठा क्षण धार की धरा पर 30 साल बाद एक फिर आया, जब अनूप जी दोबारा धार आए।

स्मिता मोकाशी ने भी दी प्रस्तुति : इंदौर की शास्त्रीय गायिका स्मिता मोकाशी ने अनूपजी के पहले राग मारु विहाग में तीन ताल मध्य लय और एक ताल मध्यलय की प्रस्तुति दी। अंत में उन्होंने जितेंद्र अभिषेकी जी का भजन सुनाया। हारमोनियम पर दीपक खलतकर ने संगत की।

जलोटा बोले- बिग बॉस में मौका मिला तो कैटरीना कैफ को लेकर जाऊंगा

पाकिस्तान जब तक भारत के खिलाफ आतंकवाद बंद नहीं करेगा। तब तक मैं किसी भी पाकिस्तानी कलाकार के साथ कोई कार्यक्रम नहीं करूंगा। मेरे इस संकल्प से मैंने पाकिस्तान को भी अवगत करा दिया है। यह बात धार में संगीत कार्यक्रम में शिरकत करने आए भजन गायक अनूप जलोटा ने गुरुवार को कही।

उन्होंने कहा गत माह ही मैंने पाकिस्तान के कलाकार के साथ लंदन में होने वाला कार्यक्रम निरस्त कर दिया। मैं अपनी बात पर आगे भी अडिग रहूंगा। जलोटा ने कहा भजनों और गजलों की गायकी में आज भी कोई परिवर्तन नहीं आया है। सबसे बड़ा परिवर्तन फिल्मी गानों में आया है। क्योंकि फिल्म संगीत से शास्त्रीय संगीत मिट गया है। आज दबंग है तो उसमें मुन्नी को बदनाम होना है, क्योंकि उसमें मन तडपत हरी दर्शन को आज.. नहीं है। बिग बॉस बहुत अच्छा कार्यक्रम था। आगे भी मौका मिला तो जाऊंगा। इस बार कैटरीना कैफ को लेकर जाऊंगा।

40 साल के बाद भी लोग ऐसी लागी लगन... को रुचि से सुनते हैं- मेरा ऐसा मानना है शास्त्रीय संगीत हमेशा जीवित रहता है। 40 साल पहले मेरे द्वारा गाया ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन, लोग आज भी उसे रुचि से सुनते हैं।

7वां पद्मश्री फड़के संगीत सम्मान

ख्यात भजन गायक अनूप जलोटा सम्मानित

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