प्लास्टिक नहीं की अपील अच्छी पर विकल्प कहां है?

Dhar News - देश में ही नहीं विश्व मंचों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार देश को 2 अक्टूबर से प्लास्टिक-शून्य करने की...

Bhaskar News Network

Sep 13, 2019, 07:10 AM IST
Dhar News - mp news appeal not plastic but where39s the option
देश में ही नहीं विश्व मंचों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार देश को 2 अक्टूबर से प्लास्टिक-शून्य करने की प्रतिबद्धता जताई और उसे फिर मथुरा के अपने 1 सितंबर के भाषण में दोहराया। वे ऐसे नेता हैं, जिनकी बात देश सुनता ही नहीं है, बल्कि काफी हद तक मानता भी है। लिहाजा समाज की भूमिका वाले परिवर्तन साकार करने में उनकी अपील कारगर होती है। स्वच्छ भारत एक उदाहरण है। प्लास्टिक का इस्तेमाल भारतीय समाज की आदत बन गया है, लेकिन जब यह लाया गया था तब (और शायद आज भी) वह सबसे बेहतरीन विकल्प था। किंतु आज यह अपील विकल्पहीनता में की जा रही है। सरकार के अधिकारी भी अभी यह नहीं बता सके हैं कि सरकारी उपक्रम या उनके परोक्ष निर्देश पर चलते वाली सस्थाएं, कैसे और किस समतुल्य मटेरियल और सुविधा से ‘फाड़ो और फेंको’ दूध के प्लास्टिक पैकेट अगले 22 दिनों में बदलेंगी और पानी की बोतलों का क्या विकल्प तैयार किया गया है। क्या राज्यों में मौजूद सरकारी-कोअॉपरेटिव दुग्ध संस्थाएं वैकल्पिक पैकेजिंग व्यवस्था कर चुकी हैं? केन्द्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान की सदारत में हुई एक बैठक में प्लास्टिक उद्योग के लोगों ने कहा कि कुल उद्योग साढ़े सात लाख करोड़ रुपए का है और करोड़ों लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। बेशक प्लास्टिक पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है, लेकिन क्या पॉली-एथलीन ट्राफथालेट का ‘सस्ता, सुंदर और टिकाऊ’ विकल्प मिल गया है और उसका उत्पादन शुरू हो गया है? एकल-नेतृत्व वाली सरकार के मुखिया द्वारा बार-बार ऐलान करने से राज्य और केंद्र के अधिकारियों पर दबाव है, लिहाज़ा वे डंडा चलाकर और मीडिया में विजुअल्स दिखाकर अपने राजनीतिक आकाओं को खुश कर रहे हैं, जबकि जनता और व्यापारी दहशत में सरकार के एक अच्छे कदम से नाराज हो रहे हैं। केवल वोट मिलने को जनता की स्वीकार्यता का प्रतीक समझना गलत होगा। समय के साथ लोग भोगे यथार्थ के आधार पर मत बनाने लगते हैं। ताज़ा सख्त यातायात कानून के डर की वजह से जनता गाड़ी के कागजात, ड्राइविंग लाइसेंस और प्रदूषण प्रमाण-पत्र के लिए 18 घंटे लाइनों में खड़ी हो रही है और यातायात विभाग में लोगों की इस मजबूरी के कारण घूस की दर दस गुना हो गई है। करीब 137 करोड़ की आबादी और कानून को ठेंगा दिखाने की आदत डेडलाइन बनाने से नहीं, सख्ती-सुविधा के मिश्रण से ही आएगी।

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