सावधान! ईएसआई अस्पताल के भीतर वीडियोग्राफी और फोटो खींचना कानूनी अपराध घोषित

Dhar News - कर्मचारी राज्य बीमा यानी ईएसआई अस्पताल में अधीक्षक की मनमानी चल रही है। उन्होंने अस्पताल परिसर में फोटो खींचना...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:15 AM IST
Dhar News - mp news careful videography and photographing inside esi hospital declared legal offense
कर्मचारी राज्य बीमा यानी ईएसआई अस्पताल में अधीक्षक की मनमानी चल रही है। उन्होंने अस्पताल परिसर में फोटो खींचना या वीडियो बनाना कानूनी अपराध घोषित कर दिया है। अस्पताल के अंदर हर कमरे के बाहर इस संबंध में नोटिस चस्पा किए गए हैं। इलाज नहीं होने या अन्य कोई अव्यवस्था होने पर जैसे ही कोई मरीज या परिजन फोटो खींचता है या वीडियो बनाता है तो अस्पताल के सुरक्षाकर्मी हाथापाई और गाली-गलौज पर उतर आते हैं। ईएसआई स्कीम के अंतर्गत आने वाले कई मरीजों ने इस संबंध में सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई मारपीट के वीडियो बना लिए हैं।

इस संबंध में भास्कर को वीडियो सहित शिकायत मिली है। ताजा मामला यह है कि अजय डारकुंडे 27 सितंबर की शाम तेज बुखार और घबराहट होने पर ईएसआई अस्पताल में इलाज कराने गए थे। ड्यूटी डॉक्टर ने उन्हें देखे बिना ही पर्चे पर कुछ दवाएं लिखकर दे दीं।

अजय ने कहा कि बुखार तेज है, सिर में दर्द है और घबराहट भी हो रही है। ऐसे में बगैर बीपी चेक किए और बगैर नब्ज देखे दवाएं देना गलत है। इस बात पर डॉक्टर ने डांट पिला दी। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी ने उनकी कॉलर पकड़ ली और बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद अजय ने प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज कराया। इसी तरह पीथमपुर की एक फैक्टरी में काम करने वाले विनोद विश्वकर्मा 29 सितंबर को अपने पिता का इलाज कराने ईएसआई अस्पताल पहुंचे। उनके पिता को नसों में दर्द हो रहा था। डॉक्टर ने दर्द के बारे में पूछा और कुछ दवाएं दे दीं। विनोद ने नसों में दर्द का कारण पूछा तो डॉक्टर ने बताने से इंकार कर दिया।

इसी बात पर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। डॉक्टर ने सुरक्षाकर्मी को बुलाया। सुरक्षाकर्मी ने उनके पिता का हाथ पकड़कर कमरे से बाहर निकाल दिया। विनोद ने इस घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की तो दो सुरक्षाकर्मियों ने मोबाइल छीना और गाली-गलौज शुरू कर दी। इन दोनों मामलों की तरह अस्पताल में उचित इलाज नहीं मिलने पर आए दिन मरीजों और सुरक्षाकर्मियों में हाथापाई हो रही है। मरीजों के परिजन राजेंद्र सोलंकी, अजीत बैस, रवि शर्मा व दिनेश पंडित का कहना है कि कई सरकारी संस्थाओं के वीडियो सामने आते हैं। वहां तो अपराध घोषित नहीं हुआ। यहां ऐसा होना अधीक्षक की मनमानी साबित करता है।

भास्कर संवाददाता | इंदौर

कर्मचारी राज्य बीमा यानी ईएसआई अस्पताल में अधीक्षक की मनमानी चल रही है। उन्होंने अस्पताल परिसर में फोटो खींचना या वीडियो बनाना कानूनी अपराध घोषित कर दिया है। अस्पताल के अंदर हर कमरे के बाहर इस संबंध में नोटिस चस्पा किए गए हैं। इलाज नहीं होने या अन्य कोई अव्यवस्था होने पर जैसे ही कोई मरीज या परिजन फोटो खींचता है या वीडियो बनाता है तो अस्पताल के सुरक्षाकर्मी हाथापाई और गाली-गलौज पर उतर आते हैं। ईएसआई स्कीम के अंतर्गत आने वाले कई मरीजों ने इस संबंध में सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई मारपीट के वीडियो बना लिए हैं।

इस संबंध में भास्कर को वीडियो सहित शिकायत मिली है। ताजा मामला यह है कि अजय डारकुंडे 27 सितंबर की शाम तेज बुखार और घबराहट होने पर ईएसआई अस्पताल में इलाज कराने गए थे। ड्यूटी डॉक्टर ने उन्हें देखे बिना ही पर्चे पर कुछ दवाएं लिखकर दे दीं।

अजय ने कहा कि बुखार तेज है, सिर में दर्द है और घबराहट भी हो रही है। ऐसे में बगैर बीपी चेक किए और बगैर नब्ज देखे दवाएं देना गलत है। इस बात पर डॉक्टर ने डांट पिला दी। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी ने उनकी कॉलर पकड़ ली और बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद अजय ने प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज कराया। इसी तरह पीथमपुर की एक फैक्टरी में काम करने वाले विनोद विश्वकर्मा 29 सितंबर को अपने पिता का इलाज कराने ईएसआई अस्पताल पहुंचे। उनके पिता को नसों में दर्द हो रहा था। डॉक्टर ने दर्द के बारे में पूछा और कुछ दवाएं दे दीं। विनोद ने नसों में दर्द का कारण पूछा तो डॉक्टर ने बताने से इंकार कर दिया।

इसी बात पर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। डॉक्टर ने सुरक्षाकर्मी को बुलाया। सुरक्षाकर्मी ने उनके पिता का हाथ पकड़कर कमरे से बाहर निकाल दिया। विनोद ने इस घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की तो दो सुरक्षाकर्मियों ने मोबाइल छीना और गाली-गलौज शुरू कर दी। इन दोनों मामलों की तरह अस्पताल में उचित इलाज नहीं मिलने पर आए दिन मरीजों और सुरक्षाकर्मियों में हाथापाई हो रही है। मरीजों के परिजन राजेंद्र सोलंकी, अजीत बैस, रवि शर्मा व दिनेश पंडित का कहना है कि कई सरकारी संस्थाओं के वीडियो सामने आते हैं। वहां तो अपराध घोषित नहीं हुआ। यहां ऐसा होना अधीक्षक की मनमानी साबित करता है।

अपराध नहीं है फोटो खींचना और वीडियोग्राफी करना

हाईकोर्ट अधिवक्ता पंकज वाधवानी के मुताबिक किसी गतिविधि को अपराध बताने के लिए निर्धारित प्रक्रिया होती है। इसके लिए दंड विधान बनाया गया है। इस विधान के मुताबिक लोकसभा और राज्यसभा में इसका प्रस्ताव पास करने के बाद राष्ट्रपति की अनुमति ली जाती है। इसके बाद अधिसूचना जारी करना होती है। दंड विधान के तहत फोटो और वीडियोग्राफी अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। केंद्र या राज्य शासन के कर्मचारी यदि फोटो और वीडियोग्राफी को मनमाने तरीके से अपराध बता रहे हैं, तो यह सिविल रूल के खिलाफ है। शासन को इसमें कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।

दबाव बनाने के लिए वीडियो बना लेते हैं


-डॉ. सुचित्रा बोस, अधीक्षक ईएसआई अस्पताल

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