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5 अप्रैल को धरमपुरी में होगा निःशुल्क पंचमुखी रुद्राक्ष धारण कार्यक्रम

एक वर्ष पहले
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शिव पुराण में भगवान शंकर ने कहा है कि रुद्राक्ष को यदि कंठ में धारण करते हैं तो आंतरिक शांति प्राप्त होती है। राजा, महाराजा व ऋषि सभी सन्यास के समय रुद्राक्ष धारण करते थे ताकि मानसिक शांति और एकाग्रता प्राप्त करें। चरक ऋषि ने आयुर्वेद संहिता में कहा है कि जो मनुष्य रुद्राक्ष धारण करता है उसका नाड़ी का रक्त संचार विधिवत बना रहता है।

हर घर में ब्लड प्रेशर की शिकायत है, डिप्रेशन की शिकायत है। भारत में 20 प्रतिशत युवा डिप्रेशन की वजह से आत्महत्या कर रहे है क्योंकि आकांक्षाएं बहुत हो गई है और शांति का प्रय| वो कर नहीं रहे है।

ऐसी स्थिति में भगवान शिव का प्रिय आभूषण रुद्राक्ष कंठ में धारण करें तो हमारा तन-मन भी स्वस्थ होगा और हमें मानसिक शांति भी मिलेगी। इसलिए हम धरमपुरी में 5 अप्रैल को निःशुल्क रुद्राक्ष धारण कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। जिसमें शामिल होने वालों को निःशुल्क रुद्राक्ष धारण करवाए जाएंगे।

यह बात अंतरराष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य पं. प्रशांत व्यास नीमच ने प्रेस क्लब में मीडिया से निःशुल्क रुद्राक्ष धारण आयोजन के उद्देश्य, रूपरेखा व तैयारियों की जानकारी देते हुए कही। श्रीबालाजी सुंदरकांड ग्रुप के तत्वावधान में 5 अप्रैल को धरमपुरी में निःशुल्क रुद्राक्ष धारण कार्यक्रम हाेगा। पं. व्यास ने बताया हम धरमपुरी में निःशुल्क पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करवाएंगे। हमारी इच्छा व प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिले। हमारे द्वारा रुद्राक्ष को विधिविधान से महामृत्युंजय मंत्र से अभिमंत्रित कर लाल रेशम के धागे में डालकर तिलक लगाकर मंत्रोच्चार कर श्रद्धालुओं को गले में पहनाए जाते हैं।

वर्ष 2006 से करवा रहे हैं निःशुल्क रुद्राक्ष धारण

पं. व्यास ने बताया नेपाल के कुछ दानदाताओं द्वारा हमें वर्ष 2006 से सालाना 5 लाख रुद्राक्ष दान किए जाते हैं। तभी से वर्ष 2006 से ही हमारे द्वारा संपूर्ण भारत में निःशुल्क रुद्राक्ष धारण करवाए जाते हैं। प्रारंभ में पं. व्यास का प्रेस क्लब सदस्यों ने स्वागत किया। स्वागत भाषण संजय सोनी ने दिया। संचालन विवेक जगताप ने किया। आभार प्रेस क्लब अध्यक्ष कैलाश दवाने ने माना। पं. व्यास ने स्वरचित आध्यात्मिक साहित्य के रूप में प्रकाशित पुस्तक व त्रैमासिक पत्रिका प्रेस क्लब सदस्यों को भेंट की।

धरमपुरी. प्रेस क्लब सदस्यों के साथ पं. प्रशांत व्यास।
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