स्कंदपुराण से लेकर राधाकृष्णन की किताब तक का जिक्र

Dhar News - अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में धर्मशास्त्राें और अनेक विद्वानों की पुस्तकों का भी जिक्र किया...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:40 AM IST
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अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में धर्मशास्त्राें और अनेक विद्वानों की पुस्तकों का भी जिक्र किया है। कोर्ट ने कहा कि उसको वह विवाद सुलझाने का काम दिया गया है, जिसकी शुरुआत उतनी ही पुरानी है जितना पुराना भारत का विचार है। कोर्ट ने माना कि फोरेंसिक तथ्यों ने इस मामले की उलझी परतों को सुलझाने में मदद की। इसके अलावा वाल्मिकी रामायण, स्कंदपुराण के श्लोकों व रामचरित मानस के दोहों व चौपाइयों का भी अपने फैसले में कई बार जिक्र किया है।

फैसले में कोर्ट ने धर्मग्रंथों के श्लोकों, विद्वानों की पुस्तकों और अपने पुराने फैसलों को भी बनाया आधार

जीने का तरीका है हिन्दुत्व

हिंदुत्व की व्याख्या के लिए ‘शास्त्री यज्ञप्रशादजी व अन्य तथा मूलदास भूधरदास व अन्य’ के मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया है। और कहा अन्य धर्मों की तरह हिंदू धर्म का कोई एक देवदूत नहीं है। इसको आप व्यापक तौर पर जीवन का तरीका कह सकते हैं और कुछ नहीं।’ हिन्दुत्व पर डॉ. राधाकृष्णन के विचारों और उनकी पुस्तक ‘द हिन्दू व्यू ऑफ लाइफ’ और ‘मोनियर विलिम्स की पुस्तक रिलीजियस थॉट एंड लाइफ इन इंडिया’ का भी जिक्र किया है।

सबसे पवित्र 7 नगरों में अयोध्या

अयोध्या के महत्व पर कोर्ट ने वृहदधर्मोत्तरा पुराण का जिक्र करते हुए कहा है कि-

अयोध्या मथुरा माया काशी का ची ह्मवन्तिका,

पुरी द्वारावती चैव सप्तैता माेक्ष दायिका।

-अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका (उज्जैन) और दारावती (द्वारिका) सात सबसे पवित्र नगर हैं।

दिव्य लक्षणों के साथ जन्मे राम

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में रामजी के दिव्य लक्षणों के साथ जन्म लेने का भी जिक्र किया है। कोर्ट ने वाल्मीकी रामायण के बालकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि-

प्रोद्यमाने जगन्नाथं सर्वलोकमस्कृतम, कौसल्याजनयद् रामं दिव्यलक्ष्णसंयुतम।

- कौसल्या ने ऐसे पुत्र काे जन्म दिया है, जो पूरी दुनिया का स्वामी है। उसे सभी लोग प्रेम करते हैं और उसमें दिव्य लक्षण हैं।

स्कंदपुराण में है जन्मस्थान का जिक्र

स्कंदपुराण के वैष्णव खंड के प्रसंगों का जिक्र करते हुए राम जन्मस्थान की जगह को बताया है-

तस्मात् स्थानत ऐशाने राम जन्म प्रवर्तते,

जन्मस्थानमिदं प्रोक्तं मोक्षादिफलसाधनम।

विघ्नेश्वरात पूर्व भागे वासिष्ठादुत्तरे तथा,

लौमशात् पश्चिमे भागे जन्मस्थानं तत: स्मृतम।

-उस स्थान के उत्तर-पूर्व में राम का जन्मस्थान है। यह पवित्र स्थान मोक्ष का माध्यम है। कहा जाता है कि यह जन्मस्थान विघ्नेश्वरा के पूर्व, वशिष्ट के उत्तर और लौमासा के पश्चिम में है। स्थानीय लोगों के मुताबिक लौमासा ही ऋण मोचन घाट है।

अयोध्या गए थे गुरुनानक देवजी

सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की पीठ ने अपने फैसले में गुरुनानक देवजी की अयोध्या यात्रा का भी जिक्र किया है। उसने कहा है कि ‘1564 विक्रमी (1507 ई.) में भाद्रपद की पूर्णिमा को ईश्वर का साक्षात्कार होने के बाद गुरुनानक देवजी ने तीर्थयात्रा पर निकलने का फैसला किया। तब वह दिल्ली, हरिद्वार व सुल्तानपुुर आदि हाेते हुए अयोध्या गए। उन्हें इस यात्रा में 3-4 साल लगे। वह 1567-68 विक्रमी (1510-11) में राम जन्मभूमि मंदिर देखने गए। तब तक बाबर ने भारत पर हमला नहीं किया था।’

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