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कंबाइन हार्वेस्टर व स्ट्रा मैनेजमेंट यंत्र से कटाई करने पर नरवाई से मुक्ति और भूसा भी मिलेगा

एक वर्ष पहले
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राज्य सरकार फसलों की कटाई करने के लिए यंत्रों पर दे रही 50 फीसदी तक सब्सिडी

मध्यप्रदेश में रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं की कटाई लगभग शुरू हो गई है। होलिका दहन (9 मार्च) के बाद गेहूं की कटाई जोर पकड़ेगी। मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने किसानों के लिए राहत दी है। प्रदेश सरकार द्वारा इस वर्ष प्रदेश के किसानों को कम्वाइंन हार्वेस्टर खरीदने पर अनुदान दिया जाएगा। किसानों को कृषि यंत्रों पर दिए जाने वाले अनुदान में बढ़ोतरी की गई। अब लघु सीमांत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति महिला किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर कुल कीमत का 50 प्रतिशत तथा अन्य किसानों को 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

यदि किसान फसल अवशेष यंत्र यानी स्ट्रा रीपर, हैप्पी सीडर, रोटावेटर, श्रेडर, मल्चर, रीपर, कंबाइन हार्वेस्टर व स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम जैसे यंत्रों से फसल कटाई करता हैं तो उन्हें इसके एवज में भूसा मिलेगा। जिसे किसान बेच भी सकता है या फिर दुधारू पशुओं को चारे के रूप में देकर दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी भी कर सकता है। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ जाएगी। मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव ने बताया अब कम्बाइन हार्वेस्टर तथा स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) जैसे बड़े कृषि यंत्रों पर भी कृषकों को अनुदान दिया जाएगा। अभी तक प्रदेश का किसान फसल निकालने के लिये अन्य प्रदेश के संसाधनों पर निर्भर रहता था।

नरवाई जलाई तो 15 हजार रु. तक लगेगा जुर्माना, एफआईआर भी

जितेंद्र श्रीवास्तव | रतलाम

रबी फसलों की कटाई के बाद खेत में आग लगाने वाले किसानों से शासन ने जुर्माना वसूलने का फैसला लिया है। वहीं हार्वेस्टर के माध्यम से गेहूं की कटाई करने पर उसमें स्ट्रीपर लगाना अनिवार्य होगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

प्रदेश में गेहूं की 80 प्रतिशत कटाई कम्बाईन हार्वेस्टर से की जाती है। हार्वेस्टर से कटाई करने पर एक फीट ऊंची गेंहू के डंठल खेत में ही रह जाते हैं। इसके बाद इसमें आग लगा दी जाती है। पिछले कई साल से ऐसा हो रहा है और किसानों द्वारा नरवाई जलाई जा रही है। कई बार इसकी लपटों से आसपास के खेतों में आग लग जाती है। वहीं आग की यह लपटे कई बार घरों तक भी पहुंच जाती है। इसे देखते हुए अब नरवाई जलाने पर शासन ने पाबंदी लगा दी है। नरवाई जलाने पर 2 एकड तक 2500 रुपए, 5 एकड तक 5000 रुपए तथा 5 एकड से ज्यादा भूमि वाले किसानों पर 15 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद भी यदि कोई नहीं मानता है तो खेत में आग लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

ये होता है असर

{ भूमि की उर्वरा शक्ति खत्म होती है।

{ भूमि में पल रहे मित्र कीट को नुकसान होता है।

{ कार्बन डाई-आक्साईड की मात्रा ज्यादा बनने से पर्यावरण को भी नुकसान होता है।

अवशेष खेत में जलाने पर कार्रवाई होगी

कृषि विभाग के सहायक संचालक भीका वास्के ने बताया पर्यावरण सुरक्षा के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के पालन में प्रदेश में फसलों विशेषकर गेहूं एवं धान की फसल कटाई उपरांत फसल अवशेष को खेत में जलाए जाने को प्रतिबंधित किया है।

कीमत : 18 से 20 लाख रुपए

सब्सिडी : सामान्य व बड़े किसान- 8 लाख रुपए

एससी-एसटी और लघु सीमांत : 6 लाख 40 हजार

कीमत : 1 लाख 20
हजार से 1 लाख 50 हजार रु.।

सब्सिडी : सामान्य - 45 हजार

एससी-एसटी और लघु सीमांत - 56 हजार रुपए

यह एक साथ कटाई, थ्रेसिंग और क्लीिनंग करती है। यह कटाई 8-10 इंच ऊपर से होती है। इस कारण काफी बड़ा हिस्सा डंठल के रूप में जमीन में अवशेष के रूप में रह जाता है। इसके बाद भूसा-रीपर (भूसा निकालने की मशीन)या रोटावेटर (रोलर से मिक्सिंग) चला दें। यह आमतौर पर पंजाब-हरियाणा से आती है।


यह यंत्र कम्बाइन हार्वेस्टर में अटैच किया जाता है, जो कंबाइन द्वारा कटी गई फसल के अवशेष को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके खेतों में विखेर देता है। इसमें फसल अवशेष को आसानी से मिट्‌टी में मिलाया जा सकता है। फलस्वरूप फसल अवशेष को जलाना नहीं पड़ता और मिट्‌टी की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है। यह सिस्टम बची अवशेष को कुतरकर छोटा कर देता है, जो बाद में खाद बन जाती है।

ये है कंबाइन हार्वेस्टर

ये है सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट
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