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विपक्ष की हेट स्पीच का सीधा असर दिल्ली में हुआ: सरकार

एक वर्ष पहले
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सिब्बल बोले- दंगों के पीछे कम्युनल वायरस; शाह का जवाब- हिंसा की साजिश के लिए पैसे बांटने के सबूत

दिल्ली हिंसा पर संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में गुरुवार को चर्चा हुई। चर्चा के बीच जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक करना अच्छी बात थी, लेकिन अपने लोगों पर सर्जिकल स्ट्राइक क्यों की जा रही है। हिंसा के पीछे कम्युनल वायरस है। इस वायरस को भड़काऊ भाषणों के जरिए फैलाया गया। भाषण देने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई। सिब्बल ने सदन में मौजूद गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसा। सिब्बल ने कहा कि आप तो लौह पुरुष हैं। सरदार पटेल की जगह पर बैठे हैं। अपने सरदार का कुछ तो ख्याल कीजिए। हिंसा के दौरान प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के स्वागत में व्यस्त थे। मामले पर प्रधानमंत्री 70 घंटे चुप रहे।

विपक्ष के आरोपों पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस सरकार में सबसे ज्यादा दंगे हुए। दिल्ली में भी कांग्रेस ने ही हिंसा भड़काई। 14 दिसंबर को रामलीला मैदान में विपक्ष के नेताओं ने हेट स्पीच दी। इन नेताओं ने कहा कि सीएए पर अब आर-पार की लड़ाई का समय आ गया है। ऐसी हेट स्पीच का सीधा असर दिल्ली में हुआ। लोग सीएए के खिलाफ शाहीन बाग में धरने पर बैठ गए। हिंसा भड़काई जाने लगी। विपक्ष सीएए की एक भी धारा बताएं, जो नागरिकता छीनती है। शाह ने यह भी कहा कि हिंसा की साजिश के लिए दिल्ली में पैसे बांटने के सबूत मिले हैं। यह पैसा बाहर से आया, जिसे एक संगठन को दिया गया। इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

हिंसा से नुकसान की वसूली के लिए पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को अर्जी दी

गृह मंत्री ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने हिंसा में हुए नुकसान की वसूली के लिए दिल्ली हाईकोर्ट से इजाजत मांगी है। इसके लिए पुलिस ने कोर्ट में अर्जी दी है। वसूली का तरीका भी जानना चाहा है।

कदम: दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने गठित की 10 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी


दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने हिंसा की जांच के लिए 10 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। आयोग ने बयान जारी कर कहा कि कमेटी 4 हफ्ते में रिपोर्ट पेश करेगी। कमेटी में कई संगठनों के पेशेवर लोगों को शामिल किया गया है। कमेटी दिल्ली हिंसा के कारण, इसके जिम्मेदार लोगों, पीड़ितों, संपत्ति को हुए नुकसान, पुलिस, प्रशासन की भूमिका आदि की छानबीन कर रिपोर्ट तैयार करेगी।

नोटिस: सोनिया, अनुराग के भाषण पर पुलिस, दिल्ली सरकार से जवाब तलब


दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, सलमान खुर्शीद और भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा के विवादित भाषणों के मामले में दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की बेंच ने कहा कि दोनों 16 मार्च तक जवाब दें। इस याचिका पर सुनवाई इसी तरह की अन्य याचिकाओं के साथ 20 मार्च को होगी। याचिका में कहा गया है कि दोनों दलों के नेताओं ने नफरत भरे भाषण दिए।

कार्रवाई: पीएफआई अध्यक्ष-सचिव समेत 9 गिरफ्तार, एक हिरासत में


दिल्ली हिंसा के मामले में पुलिस ने गुरुवार को 9 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें पीएफआई का अध्यक्ष परवेज और सचिव इलियास शामिल है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या को लेकर 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जबकि आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या के आरोप में सलमान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अब तक 712 एफआईआर दर्ज की गई है। करीब 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

एनडीए ने कहा- इस दंगे ने 1984 का सिख विरोधी दंगा याद दिलाया

{भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि किसी भी विपक्षी नेता ने शांति की अपील नहीं की। हर आंदोलन का प्रतिनिधि होता है। प्रदर्शनकारियों के पास मीडिया से बात करने के लिए प्रतिनिधि थे, लेकिन गृह मंत्री से बात करने के लिए कोई प्रतिनिधि क्यों नहीं था।

{शिरोमणि अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल ने कहा- यह दंगा 1984 की याद दिलाता है। तब कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में भीड़ ने तीन दिनों तक सिखों पर हमला बोला था। करीब 300 निर्दोष लोगों की दिल्ली की सड़कों पर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में निष्पक्ष-पारदर्शी जांच आयोग ही सच्चाई का खुलासा कर सकता है।

विपक्ष बोला- आज की हवा 1947 से ज्यादा खराब, इसे रोकना बहुत जरूरी

{कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा- जो हुआ वह भारतीय लोकतंत्र पर कलंक है। पुलिस की इतनी कंपनियां होते हुए भी बड़ी हिंसा हुई।

{आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा- क्या हम गारंटी दे सकते हैं कि आगे कोई हिंसा नहीं होगी। ये हवा 1947 से ज्यादा खराब है। इसे रोकना बहुत जरूरी है नहीं तो यह और खतरनाक हो जाएगा।

{टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा- बच्चों की आंखों से हिंसा को देखें। तीन बच्चों ने पिता को खो दिया। क्या गृह मंत्री पीड़ित बच्चों को जवाब दे सकेंगे। डेरेक ने यह आरोप भी लगाया कि हिंसा की जांच में निजता का उल्लंघन किया गया।

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