माता मंदिर परिसर में भी रंगदारी... मन्नत का प्रसाद खुले में बना‌ने के 200 और टेंट के नीचे 500 रुपए वसूल रहे

Dhar News - ट्रस्ट की सफाई- हम नहीं लेते, सीएमओ बोले- वसूली करने वालों पर करेंगे कार्रवाई भास्कर संवाददाता | धार देश के...

Dec 04, 2019, 08:21 AM IST
Dhar News - mp news in the mata temple complex too extortion 200 of making prasadam in the open and 500 rupees under the tent were charged
ट्रस्ट की सफाई- हम नहीं लेते, सीएमओ बोले- वसूली करने वालों पर करेंगे कार्रवाई

भास्कर संवाददाता | धार

देश के ख्याति प्राप्त धार के गढ़कालिका मंदिर पर बगैर रुपए चुकाए माता का प्रसाद नहीं बना सकते। मंदिर संचालन के लिए गठित ट्रस्ट सरकारी जमीन पर प्रसाद बनाने के एवज में लोगों से मोटी रकम वसूल रहा है। मंदिर पर पूजन करने आए धर्मावलंबियों से चर्चा में यह बात सामने आई। लोगों की बातों की पुष्टि मंदिर के सामने ट्रस्ट की धर्मशाला पर कार्यरत एक कर्मचारी की बातों से हाे गई। हमने ट्रस्ट की धर्मशाला के एक कर्मचारी से घूमाकर बात की। उससे कहा कि 10 लोगों के लिए भोजन बनाना है तो कर्मचारी ने कोई शुल्क नहीं लगने की बात कही। हमारे द्वारा की गई बातों से कर्मचारी आक्रोशित हो गया। आखिर में उसने कहा कि 100 लोगों का खाना खुले में बनाओगे तो 200 रु. और टेंट में बनाओगे तो 500 रु. लगेंगे।

जिस जगह टैंकर खड़ा वहां भाेजन बनाने के लिए मांगे रुपए : कालापाट के मूलया पोते की मान उतारने आए थे। वे एक गोल पेड़ी पर भोजन के लिए जगह राेके रखे थे। उन्होंने बताया कि भवन के आगे वाली जमीन पर भोजन बनाने के एवज में रुपयों की मांग की गई। हमने पेड़ी पर भोजन बना लिया।

महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा पहुंचते हैं श्रद्धालु

गढ़कालिका माता यहां टेकरी पर विराजित हैं। मान्यता है कि माता से मांगी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने के बाद मन्नतधारी को माता को बलि देना होती है। मंदिर पर सबसे ज्यादा श्रद्धालु महाराष्ट्र से आते हैं। जानकारी अनुसार यहां रोजाना 200 श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर संचालन के लिए ट्रस्ट गठित है। मंदिर के समीप ट्रस्ट ने धर्मशाला बना रखी है। इसके आसपास की जगह नगर पालिका की है। ट्रस्ट के माध्यम से अपनी जगह के अलावा नगर पालिका की जगह पर भोजन बनाने के एवज में मोटी रकम की वसूली की जा रही है। ऐसे में रुपए बचाने के लिए धर्मावलंबियों को जमीन छोड़कर पेड़ी पर भोजन बनाना पड़ रहा।

स्थानीय होने का फायदा, बगैर शुल्क के कर लिया कार्यक्रम : धार के ही अनिल अपने बेटे की मान उतारने आए थे। उन्होंने भीे यहां भोजन का कार्यक्रम रखा, लेकिन स्थानीय होने का फायदा उन्हें मिल गया। सुनील को कार्यक्रम करने का एक रुपया भी नहीं चुकाना पड़ा। सुनील ने बताया धर्मशाला को छोड़ शेष खाली जमीन पर कहीं भी खाना बना लो। काेई शुल्क नहीं लगेगा।

परिसर में टेंट वाले ने टेंट लगा रखा है ताकि अन्य लोग नहीं लगा सकें।

श्रद्धालु बनकर गए रिपोर्टर ने बाहर से आए श्रद्धालुओं से बात की तो सामने आई हकीकत

सरदापुर के गोपाल अपने बेटे की मान उतारने आए थे। उनसे पूछा गया कि वे यहां पेड़ी पर भोजन क्यों बना रहे ताे उन्होंने कहा कि धर्मशाला के समीप दूसरी खाली जगह पर भोजन बनाने के लिए रुपयों की मांग की गई। इसलिए हमें भोजन पेड़ी पर बनाना पड़ा। यहीं नहीं हम अपना टैंकर खड़ा करने गए तो भी हमसे 200 रुपए की मांग की। तो मजबूरन हमें अपना टैंकर आगे लगाना पड़ा।

खाना कहां बनाएं कहां पर नहीं इसी परेशानी में श्रद्धालु।

शुल्क लेने के निर्देश नहीं


जांच कर कार्रवाई करेंगे


मेरा ग्राहक दूसरे के पास गया तो उसका भी केक कट जाएगा

माता को बकरे की बलि देने के बाद श्रद्धालु यही प्रसाद के रूप में बनाकर ग्रहण करते हैं। इसके लिए यहां कसाइयों ने भी अपनी पेंठ भी जमा रखी है। पेड़ी के एक तरफ भोजन बन रहा था। दूसरी तरफ बकरों की बलि देने का काम चल रहा था। यहां अगर कोई व्यक्ति एक बार किसी कसाई के पास चला गया तो फिर वह उसे छोड़कर दूसरे कसाई के पास नहीं जा सकता। भास्कर टीम के सामने ही एक व्यक्ति बलि देने के लिए गया तो कसाई उसे खुलेआम धमकाता नजर आया। कसाई ने कह दिया कि मेरा ग्राहक दूसरे के पास गया तो उसका भी केक कट जाएगा।

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