जानिए, कैसे इन 3 बिन्दुओं पर अलग है यह फैसला

Dhar News - 2.77 एकड़ जमीन तीनों पक्षों में बराबर बांटी गई थी। अब शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक- यह पूरी जमीन...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:40 AM IST
Dhar News - mp news know how this decision is different on these 3 points
2.77 एकड़ जमीन तीनों पक्षों में बराबर बांटी गई थी। अब शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक- यह पूरी जमीन मंदिर की होगी। पूरी विवादित जमीन की रिसीवर केन्द्र सरकार रहेगी। केन्द्र को तीन महीने में ट्रस्ट की रूपरेखा बनानी होगी।

जो बात सुप्रीम कोर्ट ने भी मानी


2. निर्मोही अखाड़ा

2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्मोही अखाड़े को राम चबूतरे और सीता रसोई का हिस्सा दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन से निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया है। हालांकि, मंदिर के ट्रस्ट में उसे प्रतिनिधित्व मिलेगा।

जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नकार दिया


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3. सुन्नी वक्फ बोर्ड

2010 में विवादित भूमि का एक तिहाई बाहरी हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड काे मिला था। अब विवादित भूमि पर से सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड का दावा खारिज कर दिया है। हालांकि, बोर्ड को अयोध्या में नई मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन मिलेगी।

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सवाल- 2.77 एकड़ के विवादित स्थल पर किसका मालिकाना हक है?

जवाब- विवादित स्थल पर मालिकाना हक रामलला विराजमान का है।

सवाल-विवादित स्थल पर किसका कब्जा रहा? तीनों ही मुख्य पक्षकारों ने दावा किया था।

जवाब- विवादित स्थल पर मुस्लिम समुदाय द्वारा लंबे समय से नमाज अदा नहीं की गई। जबकि हिंदू वहां पर लगातार पूजा-अर्चना करते रहे। यह तथ्यों से साबित हुआ है।

सवाल- भगवान राम का जन्मस्थान कहां है?

जवाब- सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में हालांकि इस संदर्भ में कुछ नहीं कहा मगर एक जज ने बेनामी अटेंडेम के तौर पर 116 पेज के अपने आर्टिकल में लिखा है कि बाबर के आने से पहले यह जगह भगवान राम का जन्मस्थान रही है। प्राचीन विदेशी पर्यटकों की किताबों में मंदिर होने की बात कही गई है।

सवाल- जन्मस्थान न्यायिक व्यक्ति है या नहीं?

जवाब- जन्मस्थान न्यायिक व्यक्ति नहीं है। देवता या उसकी मूर्ति न्यायिक व्यक्ति हो सकती है, मगर जन्मस्थान नहीं।

सवाल- एएसआई की रिपोर्ट को हिंदू पक्षकारों ने जहां अपने पक्ष में बताया था, वहीं मुस्लिम पक्षकारों ने इसे महज एक विचार बताया था।

जवाब- रिपोर्ट पूरी तरह से विश्वसनीय है और इस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। एएसआई की रिपोर्ट से पता चलता है कि विवादित स्थल पर खुदाई में मिले अवशेष गैर इस्लामिक हैं। वे अवशेष मंदिर के ही हैं।

सवाल- विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांत और गजेटियर्स का संदर्भ। कितना सही माना?

जवाब- सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि विदेशी पर्यटकों ने अपने यात्रा वृतांत और किताबों में अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का विवरण किया है। मस्जिद का कोई जिक्र नहीं है। इन्हें झुठलाया नहीं जा सकता।

सवाल- खुदाई के अवशेष में मंदिर और मस्जिद के दावों का क्या हुआ?

जवाब- खुदाई में मिले अवशेष मंदिर के हैं और ये गैर इस्लामिक हैं।

सवाल- क्या मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी?

जवाब- रिपोर्ट से पता चलता है कि मस्जिद को खाली जमीन पर नहीं बनाया था। विवादित ढांचे के नीचे अवशेष मंदिर के ही हैं।

सवाल- विवादित स्थल पर मूर्ति थी या नहीं?

जवाब- वर्ष 1856 में विवादित ढांचा में जो रेलिंग लगाई गई थी वो विभाजन के लिए नहीं थी। हिंदू केंद्रीय गुंबद के नीचे वाले स्थान को गर्भगृह के तौर पर पूजते रहे हैं। मूर्ति केंद्रीय गुंबद के नीचे कब स्थापित की गई। इस पर कोर्ट ने कुछ नहीं कहा।

सवाल- हिंदू पक्षकरों ने कहा था कि अगर मस्जिद में लंबे समय तक नमाज न पढ़ी जाए तो वह मस्जिद नहीं रहती। मुस्लिम पक्षकारों ने कहा था कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद रहती है।

जवाब- सुन्नी वक्फ बोर्ड मालिकाना हक व प्रतिकूल कब्जा साबित करने में नाकाम रहा।

विराग गुप्ता

एडवोकेट

आदिश अग्रवाला

सीनियर एडवोकेट

जयंत सूद

सीनियर एडवोकेट

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