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जिले में इस साल 55 इंच से अधिक बारिश, लेकिन ढाकनवाड़ी तालाब में एक बूंद पानी भी नहीं ठहरा

Dhar News - जिले की सरदारपुर विधानसभा के अंतिम छोर पर बसी ग्राम पंचायत गुमानपुरा के फलिये छोटी ढाकनवाड़ी और बड़ी ढाकनवाड़ी में...

Jan 23, 2020, 07:21 AM IST
Dhar News - mp news more than 55 inches of rain in the district this year but not a single drop of water has remained in the dhakanwadi pond
जिले की सरदारपुर विधानसभा के अंतिम छोर पर बसी ग्राम पंचायत गुमानपुरा के फलिये छोटी ढाकनवाड़ी और बड़ी ढाकनवाड़ी में किसानों की संख्या अधिक नहीं है। इसके बावजूद जल संरक्षण एवं सिंचाई के नाम पर यहां 25 और 28 लाख रुपए खर्च कर तालाबों का निर्माण करवाया गया। आश्चर्यजनक तो यह है कि जिले में इस वर्ष करीब 55 इंच से अधिक बारिश हुई है। जिले का ऐसा कोई तालाब नहीं है जो नहीं भरा हो। इसके बावजूद इस पंचायत में बने इन तालाबों में एक बूंद पानी नहीं है। जहां तालाब है वह स्थान सूखा मैदान दिखता है। जैसे कोई खेल का मैदान हो। शासन के पैसों के दुरुपयोग का यह एक ऐसा उदाहरण है जो सोचने को विवश करता है।

आरटीआई कार्यकर्ता सुनील सावंत ने जब इस संबंध में विभाग से जानकारी मांगी तो इसका खुलासा हुआ। आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार छोटी ढाकनवाड़ी में 25 लाख और बड़ी ढाकनवाड़ी में 28 लाख रुपए की लागत से वर्ष 2017-18 में यहां तालाब बनाए गए थे। बारिश के सीजन में यहां के किसानों को उम्मीद थी कि दोनों ही गांवों में बनाए गए तालाबाें में पर्याप्त पानी भरेगा तो उनकी इस बार फसलें भी अच्छी होंगी, लेकिन जब बारिश हुई तो सारा पानी बहकर निकल गया।

अधिकांश काम जेसीबी से कराया, मजदूरों से मात्र पिचिंग के पत्थर उठवाए

ढाकनवाड़ी फलिये में बनाए गए तालाब में वर्तमान में एक बूंद भी पानी नहीं है।

जिला पंचायत के अधिकारियों को फलिये में लाया जाएगा


मैं तो मनावर में हूं


यदि जिले में पर्याप्त बारिश हुई है तो तालाब तो भरना ही चाहिए था


एसडीओ को जांच के निर्देश दे रहा हूं


तालाब बनाने के लिए अधिकांश काम जेसीबी से कराया गया था। बीच में कुछ समय के लिए आसपास के गांवों के लोगों से मजदूरी भी कराई गई। यहां मजदूरी करने वाले ढाकनवाड़ी के अंबा, वेस्ता, प्रताप, टेटू, जामसिंग का कहना है कि मात्र पिचिंग के पत्थर उठवाए और उसको जमवाए गए थे। मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया गया था। छोटी ढाकनवाड़ी में 35 से 40 और बड़ी ढाकनवाड़ी में 20 से 25 मजदूरों ने काम किया था।

सूखा मैदान बन गए हैं तालाब

आरटीआई कार्यकर्ता सुनील सावंत ने कहा उन्होंने जब जानकारी मांगी थी तब ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारियों ने कहा था कि आप तालाब जाकर देखें वहां आपको पानी दिख जाएगा। सावंत ने बताया जब वहां देखा तो तालाब में एक बूंद भी पानी नहीं था। इस बात से हमने विधायक प्रताप ग्रेवाल को भी अवगत कराया है। सबसे मुख्य बात यह है कि महज तीन साल पहले तैयार किए गए तालाब इस हालत में है कि इन्हें देखकर कोई इन्हें तालाब नहीं कहेगा। इस मामले में विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी अब पल्ला झाड़ रहे हैं।

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