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ग्लब्स, हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट के बिना स्ट्रीट लाइट सुधारने भेजा मस्टरकर्मी को, करंट लगने से मौत

Dhar News - हेंड ग्लब्स, हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट दिए बिना स्ट्रीट लाइट सुधार रहे नगर निगम के एक मस्टरकर्मी की करंट लगने से मौत...

Aug 19, 2019, 07:10 AM IST
Dhar News - mp news musterman sent to repair street lights without globs helmets and safety belts die of electrocution
हेंड ग्लब्स, हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट दिए बिना स्ट्रीट लाइट सुधार रहे नगर निगम के एक मस्टरकर्मी की करंट लगने से मौत हो गई। हादसे के बाद परिजन व गुस्साए साथी कर्मियों ने हंगामे के बाद चक्काजाम किया। इसके बाद निगम अफसर पहुंचे और उन्होंने मृतक के एक परिजन को नौकरी देने के साथ मुआवजे का वादा किया है, तब परिजन ने शव का पोस्टमॉर्टम करवाया।

आजाद नगर पुलिस के अनुसार मृतक चौथी पल्टन निवासी 31 वर्षीय दिलीप पिता राधेश्याम सोलंकी है। साथियों ने बताया कि दिलीप शनिवार को आजाद नगर क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट सुधारने के लिए गया था। उसे कोई सुरक्षा साधन भी उपलब्ध नहीं करवाए थे। इसी दौरान उसे करंट लग, जिससे उसके सिर से हाथ तक का हिस्सा झुलस गया। उसे साथी एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। दिलीप के दोस्त दीपक कुसुमाकर का कहना है कि उसे तीन घंटे तक एमवायएच में इलाज नहीं मिला। डॉक्टर्स ने परिजन को एक बलून दिया और कहा कि इसे दबाते रहें, जिससे सांस चलती रहेगी। माता-पिता को लगा कि यहां बेहतर इलाज नहीं मिलेगा तो फिर बेटे को गोकुलदास अस्पताल ले गए। यहां रात 11.30 बजे अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि दिलीप के ठीक होने के आसार नहीं है, इसलिए उसे ले जाओ। जब परिजन ने हंगामा किया तो निगम का एक अफसर आया और दिलीप को बॉम्बे अस्पताल ले गए।

दिलीप सोलंकी

सिर्फ वो ही नकारात्मक खबर, जो अापको जानना जरूरी है।

गुस्साए निगमकर्मी ने किया चक्काजाम

चर्चा के दौरान निगमकर्मी गुस्सा हो गए और कुछ देर बाद वे परिजन के साथ बॉम्बे हॉस्पिटल वाली सड़क पर खड़े होकर चक्काजाम करने लगे। बाद में उन्हें समझाया और हंगामा खत्म कर दिलीप के शव को पीएम के लिए भेजा गया। दिलीप 8 महीने पहले ही ज्वाइन हुआ था। वह तीन बहनों का इकलौता भाई है। परिवार में माता-पिता, प|ी और एक छोटी बेटी है।

अफसर नहीं पहुंचे तो गुस्सा फूटा

रात तक जब दिलीप की सुध लेने के लिए निगम का कोई बड़ा अफसर नहीं पहुंचा तो साथियों का गुस्सा फूटा। उन्होंने हंगामे के बाद चक्काजाम और हड़ताल की धमकी दी। इसके बाद अगली सुबह अपर आयुक्त संदीप सोनी पहुंचे। परिजन व निगमकर्मियों से चर्चा की। फिर बताया कि आयुक्त ने दिलीप की मौत के मामले में निगम की तरफ से नियमानुसार सवा दो लाख रुपए मिलेंगे, वहीं दो लाख रुपए और मंजूर किए गए हैं। साथ ही परिवार के एक व्यक्ति को निगम में नौकरी देने की भी बात कही है। निगमकर्मियों और परिजन की मांग थी कि दस लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। साथ ही आगे से एेसी घटना न हो इसके लिए भी अफसर लिखित में दें। हर निगमकर्मियों को उनके काम के हिसाब से सुरक्षा संसाधन दिए जाएं।

बिजली सुधारने के लिए कोई साधन नहीं देता है निगम

बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचे कई दरोगा और निगमकर्मियों का आरोप है कि निगम हमें कोई संसाधन नहीं देता है। हमें बिना हेंड ग्लब्स, हेलमेट और अन्य संसाधनों के आभाव में ही काम करना पड़ता है। ऐसे में कर्मचारियों की जान पर आ जाती है। ऐसे हादसे पहले भी हो चुके हैं, लेकिन अफसरों ने आज तक इस तरफ ध्यान नहीं दिया है।

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