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युवाओं के हाथों में पत्थर की जगह काम देने की जरूरत

Dhar News - वादा तो यह था कि नया भारत बनेगा, सबका साथ, सबका विकास होगा। इस खुशनुमा वादे का नशा आज तक हम तारी रहा है। पर देश के सबसे...

Jan 16, 2020, 07:16 AM IST
Dhar News - mp news need to provide work instead of stone in the hands of youth
वादा तो यह था कि नया भारत बनेगा, सबका साथ, सबका विकास होगा। इस खुशनुमा वादे का नशा आज तक हम तारी रहा है। पर देश के सबसे बड़े स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (एसबीआई) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 16 लाख नौकरियां पिछले साल के मुकाबले घट गई हैं। ब्लूमबर्ग के अनुसार बेरोजगारी 45 साल में सबसे अधिक बढ़ी है। सरकारी क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो बताता है कि महज 2018 में 12 हज़ार बेरोजगार युवाओं (हर 40 मिनट पर एक) ने आत्महत्या की। महंगाई पांच साल में सबसे ज्यादा है। युवकांे के हाथों में पत्थर हैं। सरकार कहती है कि ये विपक्षी राजनीतिक पार्टियों द्वारा गुमराह किए गए हैं। जापान दुनिया के सबसे बड़े परमाणु युद्ध के राख के ढेर से पांच साल में बाहर आकर 1950 से 1970 तक जब आर्थिक विकास के मार्ग पर चला, उस समय उसके क्रियाशील युवा वर्ग की मध्यमान (मीडियन) आयु 23.6 से 32.5 वर्ष थी। चीन ने जब 1980 के दशक में विकास की रफ़्तार पकड़ी, उसके युवा की औसत आयु 21.9 वर्ष थी जो बढ़कर 2010 में 35 साल हुई, यानी अधिकतम क्रियाशीलता का काल। इसके बाद चीन के विकास को ब्रेक लगने लगा, क्योंकि बुजुर्ग बढ़ने लगे। भारत में मध्यमान आयु 2010 में 25.1 थी, 2015 तक 30 वर्ष। यह उम्र देश को हमेशा के लिए विकास की नई ऊंचाईयां देती है पर उसके हाथ में पत्थर हैं। वह बेरोजगार धर्म और जाति में बंटा कभी गोवंश का स्वयंभू संरक्षक बन किसी अख़लाक़, पहलू खान, जुनैद या तबरेज को तलाश रहा है या कट्टरपंथियों के चंगुल में फंस कर जिहाद के लिए तैयार किया जा रहा है। एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार केरल के कोच्ची के एक धर्मस्थल/ ट्रेनिंग सेंटर में पिछले साल के मुकाबले इस साल एक धर्मविशेष के ज्यादा युवा जाना चाहते हैं। शिक्षा और उसके बाद युवा वर्ग में स्वाभाविक उद्यमिता बाहर आने को तैयार है। लेकिन जिस सरकार ने उसे उसे मार्ग देना था, वह तो नागरिकता कानून और एनआरसी में व्यस्त है। स्किल इंडिया एक दूरदर्शी योजना थी, जो गांव की कराहती अर्थव्यवस्था से युवाओं को निकाल कर और उन्हें ट्रेनिंग दे कर मेक-इन इंडिया या लघु उद्योगों की ओर उन्मुख करती, लेकिन वैसा वातावरण तब बनता जब देश का मिजाज़ संतुलित होता। अशांत वातावरण में युवा-शक्ति की प्रचंड धारा मार्ग बदलने लगी है।

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