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पॉलिटेक्निक संस्थाओं के गैर तकनीकी शिक्षकों को एआईसीटीई के नियमों के विरुद्ध दिया वेतनमान

Dhar News - एक ओर सरकार बजट को लेकर परेशानी में है, दूसरी ओर तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा पॉलिटेक्निक संस्थाओं के गैर तकनीकी...

Jan 16, 2020, 07:16 AM IST
Dhar News - mp news non technical teachers of polytechnic institutions given pay scale against the rules of aicte
एक ओर सरकार बजट को लेकर परेशानी में है, दूसरी ओर तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा पॉलिटेक्निक संस्थाओं के गैर तकनीकी शिक्षकों को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के नियमों के विरुद्ध वेतनमान दिया जा रहा है। इससे सरकार को सालाना करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकारियों ने मिलीभगत कर गैर तकनीकी शिक्षकों को प्रवर श्रेणी वेतनमान (सिलेक्शन ग्रेड) और उसके बाद 10 हजार एकेडमिक ग्रेड पे (एजीपी) मनमाने ढंग से दे दिया है एवं एआईसीटीई द्वारा जारी किए गए स्पष्टीकरण का उल्लंघन किया गया। इसका लाभ प्रदेश के 65 पाॅलिटेक्निक में कार्यरत करीब 200 गैर तकनीकी शिक्षकों दिया गया है। इससे करीब 100 करोड़ का नुकसान हो चुका है। आगे भी सरकार काे घाटा होता रहेगा। भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित एआईसीटीई की अधिसूचना- 4 जनवरी 2016 के अनुसार वेतनमान निर्धारित किए जाने चाहिए थे, लेकिन प्रदेश के तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा गैर तकनीकी शिक्षकों के मामले में इस अधिसूचना का पालन नहीं किया गया।

तकनीकी शिक्षा विभाग का कारनामा
प्रदेशभर के 65 पॉलिटेक्निक में कार्यरत लगभग 200 गैर तकनीकी शिक्षकों पर अफसर मेहरबान

यहां हुई गड़बड़ी...जिस ग्रेड का लाभ पीएचडी होने के 6 वर्ष बाद मिलना था, वह उन्हें पहले ही दे दिया गया

10 हजार एजीपी मनमाने तरीके से बांटने की गड़बड़ी

ऐसे हुआ नुकसान...पे-बैंड 3 और पे-बैंड 4 में हेराफेरी



100 करोड़ रुपए का अब तक हो चुका है सरकार को नुकसान

मनमानी...जब एआईसीटीई द्वारा स्पष्टीकरण जारी कर दिया गया था कि सिलेक्शन ग्रेड के लिए एमफिल/पीएचडी अनिवार्य योग्यता है तो इसके बाद भी गैर तकनीकी शिक्षकों की सिलेक्शन ग्रेड दिए जाने की तारीख में बदलाव नहीं किया गया। जबकि, उनकी एमफिल/पीएचडी की आर्हता प्राप्त करने की तारीख से स्पष्टीकरण के अनुसार सिलेक्शन ग्रेड की तिथि में परिवर्तन करना चाहिए था और इसके बाद ही एआईसीटीई के मापदंडों के अनुसार तीन वर्ष बाद पे-बैंड फोर में 9 हजार का एजीपी दिया जाना था एवं इसके बाद ही 10 हजार एजीपी की अर्हता बनती थी, लेकिन उन्हें मनमाने तरीके से पीएचडी की तारीख से 10 हजार का एजीपी देने की बंदरवाट कर दी गई यानी जिस ग्रेड का लाभ पीएचडी होने के 6 वर्ष बाद मिलना था, वह उन्हें पहले ही दे दिया गया।

50 हजार प्रति महीना 3 वर्ष तक हुआ नुकसान

6 लाख का नुकसान हर साल प्रति शिक्षक हुआ

प्राचार्य बनाने की भी थी तैयारी...

पिछली सरकार में एआईसीटीई के दिशा-निर्देशों के खिलाफ नवंबर 2017 में तत्कालीन अधिकारियों ने पॉलिटेक्निक के गैर तकनीकी शिक्षकों को प्राचार्य बनाने की तैयारी कर ली थी। शासन ने इसके लिए आवेदन भी मांग लिए गए थे, लेकिन इस संबंध में तकनीकी शिक्षकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

यदि गड़बड़ी हुई है तो जांच कराएंगे


10 हजार का एजीपी 2017 में बैकडेट से दिया

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