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मंडियों में कालीमिर्च 250 रुपए बिकेगी

एक वर्ष पहले
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मुंबई| कालीमिर्च उत्पादकों का ध्यान भारतीय माल बेचने के बजाय ब्राजील और वियतनाम की फसल पर लगा हुआ है। भाव कम होने से माल रोक-रोककर बेच रहे हैं। पिछले 1-2 माह पूर्व कुछ सटोरियों ने भारत में कालीमिर्च के भाव निम्न स्तर पर आ जाने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ उपभोक्ता सेंटरों पर 250 रुपए किलो बिक जावेगी। कुछ स्टॉकिस्ट जो किराना क्षेत्र में कारोबार नहीं करते हैं, 200 रुपए किलो में स्टॉक करने की धारणा बनाकर बैठे हैं। ऐसी स्थिति में स्टॉक करना भी चाहते हैं। उनकी यह मनोकामना पूरी होती है या नहीं यह कहना तो कठिन है, किंतु कोरोना वायरस का प्रभाव तो कालीमिर्च के भावों पर अब पड़ेगा। देखना यह है कि कितनी मात्रा में आने वाले दिनों में मंदी आती है। वैसे पिछले दिनों भाव जरूर कुछ घटे हैं।

उत्पादन 60 से 62 लाख टन

भारत में कालीमिर्च का केरीओव्हर स्टॉक 10856 टन का बताया जा रहा है जबकि चालू सीजन में उत्पादन 60 से 62 लाख टन का बताया जाता है। इसमें 3 लाख टन सफेद कालीमिर्च का उत्पादन होगा। उत्पादक सेंटरों पर नए माल की आवक का दबाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। वियतनाम कालीमिर्च के भाव घटकर 2000 डॉलर एवं ब्राजील में 1800 से 1900 डॉलर प्रति टन रह गए हैं। बताया जाता है पिछले दिसंबर एवं इस वर्ष की जनवरी अर्थात दो माह में 600 टन का आयात हो चुका है। आयातित कालीमिर्च की बिक्री महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान की मंडियों में हो रही है। चर्चा यह भी है कि वियतनाम के माल के आयात पर सख्ती किए जाने के बाद भी श्रीलंका के मार्फत भारतीय बाजारों में विदेशी माल को आने से नहीं रोका जा सकता है। भारत में यह माल वियतनाम, ब्राजील, श्रीलंका, एकाडोर, इंडोनेशिया, जर्मनी से आयात हुआ है। इस कालीमिर्च का उपयोग तेल निकालने में किया जावेगा। वियतनाम का माल मोटा होने से कर्नाटक के माल की बिक्री पर प्रभाव पड़ने लगा है।

अनिश्चितता का वातावरण

हल्दी का उत्पादन अधिक होना, निर्यात एवं घरेलू खपत में गिरावट की वजह से भविष्य उज्ज्वल नजर नहीं आ रहा है। फिलहाल तो दोनों क्षेत्रों में अनिश्चितता बनी हुई है। व्याप्त अनिश्चितता समाप्त होने के बाद ही कारोबार ठीक से चल सकेगा। उसी के साथ भावों में स्थिरता की आशा की जा सकती है। चालू सीजन में अनुकूल मौसम, जोरदार वर्षा एवं सिंचाई सुविधा की वजह से हल्दी का उत्पादन 5.85 टन होने का अनुमान है जबकि गत वर्ष 5.52 लाख टन हुआ था। इस वर्ष अनुकूल मौसम से उत्पादकता 10 से 15 प्रतिशत अधिक बैठ रही है। इसके अलावा क्वालिटी भी अन्य वर्षों की अपेक्षा बेहतर उतर रही है। फिलहाल हल्दी में मांग कम है। कोरोना वायरस के बाद कितनी मात्रा में निर्यात हो सकेगा, अभी यह अंदाज भी नहीं लगाया जा सका है। यह तो निश्चित है कि इस बार निर्यात में गिरावट आएगी। वायदों में अच्छी मात्रा में गिरावट आ चुकी है। आगे और भी आ सकती है क्योंकि व्यापार को गति मिलने के बजाय उसमें आए दिन गिरावट के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कोरोना वायरस से कुछ देशों में कारोबार बंद हो रहा है। ऐसी स्थिति में अगले एक माह तो निर्यात करीब-करीब बंद रहेगा। निर्यातकों के लिए यह एक बड़ा झटका होगा। जिसकी आपूर्ति आने वाले महीनों में संभव नहीं है। इसके अलावा घरेलू खपत में भी गिरावट के संकेत मिल रहे हैं।

वर्तमान वित्तीय वर्ष अप्रैल-अक्टूबर के दौरान हल्दी का निर्यात 77,500 टन हुआ जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 78,300 टन का हुआ था। अत: निर्यात में 1 प्रतिशत की गिरावट रही। अब ऐसी आशंका व्यक्त की जाने लगी है कि अमेरिका और पश्चिम एशिया जैसे देशों में कोरोना वायरस की वजह से निर्यात घट सकता है।

टिपटूर में खोपरा गोला का टेंडर 101.62 रुपए में गया

इंदौर| टिपटूर में खोपरा गोला का टेंडर101.62 रुपए में गया जबकि पिछला टेंडर 103.12रुपए में गया था। कुल आवक 5436 बोरी की रही। पिछले टेंडर से 1.50 रुपए किलो घटकर गया। शुक्रवार को अरसीकेरा का टेंडर 100.50 रुपए में गया था। मंगलवार को होली त्योहार की वजह से बाजार बंद था। पिछले शुक्रवार को 102.50 रुपए में टेंडर गया था।

टैरिफ दरों में परिवर्तन

नई दिल्ली| केंद्र सरकार ने आयातित खाद्य तेलों की टैरिफ दर में परिवर्तन किया है। सीपीओ पर 718 से घटाकर 670 डॉलर ओलिन 750 से घटाकर 701 डॉलर सोया डीगम 790 से घटाकर 733 डॉलर प्रति टन किया है। सीपीओ पर 1470.15 रुपए ओलिन पर 1800.93 एवं डीगम पर 1629.42 रुपए प्रति टन की आयात लागत कम हो जावेगी। यह दर 13 मार्च से लागू हो गई है। इससे पूर्व 28 फरवरी को सीपीओ पर 1558 ओलिन पर 1906 एवं सोया डीगम पर 140 रुपए प्रति टन की कमी की गई थी।

गुड़ का उत्पादन प्रभावित

हापुड़| उप्र के कई जिलों में पिछले दिनों बेमौसम वर्षा से गुड़ उत्पादन प्रभावित हुआ है। इस सीजन मे बेमौसम वर्षा से गुड़ उत्पादक बड़ी मात्रा में परेशान रहे हैं पर्याप्त मात्रा में गुड़ उत्पादन नहीं कर सके हैं। अगले सप्ताह से उत्पादन पुन: जोर पकड़ सकता है। इस बार गुड़ का स्टॉक भी ठीक से नहीं हो पाया है।
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