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क्वालिटी बिगड़ने की चिंता, गेहूं की फसल कटवा रहे किसान, बारिश हाेने पर दाना हाे जाएगा दागी तो दाम भी मिलेंगे कम
माैसम विशेषज्ञ बाेले- हाे सकती है बूंदा-बांदी
इस बार मार्च में भी बादलों को डेरा है। इसके अलावा बार-बार अलग-अलग विक्षोभ के सक्रिय होने से कभी तेज धूप तो कभी बादल और हवा में नमी बनी हुई है। जब फसलें पककर तैयार हैं और कटाई शुरू हुई है तो मौसम एक बार फिर से करवट बदलने लगा है। मौसम विभाग भी अगले 48 घंटे में तेज हवा के साथ बारिश की संभावना जता रहा है। यदि ऐसा हुआ ताे उपज की क्वालिटी बिगड़ जाएगी और किसानों को नुकसान हाेगा। इसलिए किसान हार्वेस्टर से फसलाें की कटाई करवा रहे हैं। सेवानिवृत्त माैसम विशेषज्ञ डॉ. प्रमाेद दुबे ने बताया अगले 4 से 5 दिन फसलों पर संकट के बादल मंडराएंगे। करीब 10 से 15 किमी की रफ्तार से हवा चलेंगी। मौसम ठंडा है, किसान फसलों की सिंचाई न करें। जो फसलें कटकर खेतों में पड़ी हैं उन्हें जल्दी से निकालने की कोशिश करें। तेज हवा का दौर रहेगा। ऐसे में फलदार पौधों को टूटने तथा गिरने से बचाने के लिए लकड़ी का सहारा दें।
बदलते मौसम से सबसे ज्यादा नुकसान शरबती में : ओलावृष्टि या फिर बारिश से फसलों के उत्पादन पर गहरा असर पड़ता है। बारिश और ओलों से फसल काली पड़ जाती है और दागी हो जाती है। चमक भी प्रभावित होती है। इसलिए उपज के कम दाम मिलते हैं। जब भी ओले गिरते हैं तो बालियां नीचे गिर जाती हैं। इससे उत्पादन पर असर पड़ता है। ओले और बारिश से गेहूं की चमक पर प्रभाव पड़ेगा। सबसे ज्यादा नुकसान शरबती गेहूं को हो सकता है। इसकी कीमत दाने की चमक पर निर्भर करती है।
पर्याप्त पानी होने से उत्पादन अच्छा हुआ
इस बार अच्छी बारिश से जिले में गेहूं का रकबा 2 लाख 59 हजार हेक्टेयर में लगा है। पिछले साल 1 लाख 68 हजार हेक्टेयर था। इस बार 91 हजार हेक्टेयर में गेहूं बढ़ा है। इस साल रबी सीजन में माैसम फसलों के लिए उपयुक्त रहा है। जाे फसलाें के लिए फायदेमंद साबित हुअा। इससे गेहूं का उत्पादन भी बढ़ा है। यदि प्राकृतिक आपदा हुई तो जिले में गेहूं का उत्पादन खराब हाेगा। ताेरनाेद के किसान विष्णु रेवाटिया, भरावदा के कमलेश हाड़ ने बताया 10 साल बाद इस बार फसल अच्छी आई है। पर्याप्त पानी होने के कारण सिंचाई भी समय पर कर सके और फसलों को पाले से नुकसान भी नहीं हुआ। अभी फसल पक चुकी हैं, ऐसे में यदि बारिश होती है तो पूरी फसल चौपट हो जाएगी। रिंगनाेद के किसान गाेपाल पटेल ने बताया इस बार गेहूं का दाना मोटा एवं चमकदार है। हार्वेस्टर मालिक 1 बीघा गेहूं निकालने का 500 रु. प्रति घंटे के हिसाब से ले रहे हैं। गेहूं कटाई का सिलसिला अप्रैल के अंत तक चलेगा।
खेत में खड़ी और कट चुकी, फसलों को नुकसान
कृषि के जानकार बताते हैं कि इस बार फसलों की बोवनी देरी से हुई है। ऐसे में जो फसलें खेत में खड़ी हैं वे तेज हवाओं के साथ बारिश होने से खेतों में गिर जाएंगी। जिससे उत्पादन पर फर्क पड़ेगा। वहीं जो फसलें कटकर खेतों में पड़ी हैं उनकी चमक प्रभावित हो जाएगी। ऐसे में किसानों को उपज के करीब 500 रुपए तक कम दाम मिल पाएंगे। आने वाले दिनों में हवा की दिशा लगातार बदलेगी। ऐसे में बारिश और ओलों से फसलों को भारी नुकसान होगा।
रिंगनाेद. माैसम में बदलाव के चलते किसान हार्वेस्टर से कटवा रहे गेहूं।