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केवल टिकट नहीं मिलने से रेल हादसे के शिकार को मुआवजा देने से इनकार नहीं कर सकता रेलवे
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में व्यवस्था देते हुए कहा कि रेल दुर्घटना के शिकार को केवल इस आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि उसके पास वैधानिक रेल टिकट नहीं मिली जिससे यह साबित हो सके कि वह दुर्घटना के दौरान रेल यात्रा कर रहा था। हाईकोर्ट ने उक्त आधार पर रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल भोपाल के फैसले को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने रेलवे दावा अधिकरण भोपाल को पुन: मामला वापस भेजकर मुआवजे की राशि तय करने के निर्देश दिए। जस्टिस राजीव कुमार दुबे की एकलपीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल 3 माह के भीतर मुआवजे पर फैसला ले।
हाईकोर्ट के इस फैसले से वर्ष 2002 में रेल दुर्घटना में अपने बेटे को खोने वाली मां को 18 साल बाद न्याय मिला है। दुर्भाग्यवश जिस पिता ने बेटे की मौत पर रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल में मुआवजा के लिए अर्जी दाखिल की थी, वो भी हाईकोर्ट का फैसला आने के पहले ही चल बसे। मूलत: सतना में रहने वाला राजेश श्रीवास्तव 14 अक्टूबर 2002 को मानिकपुर गया था। दो दिन बाद 16 अक्टूबर को मानिकपुर से सतना वापस आते समय वह चलती ट्रेन से गिर गया और पटरियों के बीच आने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई। शेष|पेज 4 पर
हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में दी व्यवस्था