दौड़ने से आयु बढ़ती है, कैंसर जैसी कई बीमारियों से बचाव होता है

Dhar News - दौड़ने वालों में दिल की बीमारी से मरने का खतरा 30% और कैंसर से मृत्यु की आशंका 23% कम होती है मेंडी ओकलेंडर नई रिसर्च...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:41 AM IST
Dhar News - mp news running increases age protects against many diseases like cancer
दौड़ने वालों में दिल की बीमारी से मरने का खतरा 30% और कैंसर से मृत्यु की आशंका 23% कम होती है

मेंडी ओकलेंडर

नई रिसर्च से पता लगा है कि कम समय तक दौड़ने से भी कई फायदे होते हैं। इससे शरीर का हर सिस्टम सुधरता है। नहीं दौड़ने वाले की तुलना में दौड़ लगाने वाले लोगों के किसी भी कारण से मरने की 27% कम आशंका रहती है। उनके दिल की बीमारियों से 30% और कैंसर से जान गंवाने का खतरा 23% कम रहता है। 14 अध्ययनों के विश्लेषण से यह जानकारियां सामने आई हैं।

शोधकर्ताओं ने पांच वर्ष से अधिक समय तक अमेरिका, डेनमार्क, ब्रिटेन और चीन के दो लाख 32 हजार लोगों की मौतों का अध्ययन किया है। विश्लेषण में लोगों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया। हर सप्ताह 50 मिनट या उससे कम दौड़ने वाले लोगों को कम दौड़ने वाले समूह में रखा गया। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, आस्ट्रेलिया में हेल्थ और स्पोर्ट इंस्टीट्यूट के एसोसिएट प्रोफेसर जेल्जको पेडिसिक का कहना है, इससे फर्क नहीं पड़ता है कि आप कितना दौड़ते हैं। दौड़ने से हर हाल में फायदा होगा। जेल्जको ब्रिटिश स्पोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित नए विश्लेषण के लेखकों में शामिल हैं।

नई रिसर्च में शामिल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मानव बॉयोलॉजी के प्रोफेसर डेनियल लीबरमैन, का कहना है, मानव की शारीरिक रचना दौड़ने के लिए बनाई गई है। लोगों को अब अपने भोजन की तलाश में शिकार का पीछा नहीं करना पड़ता है। लेकिन, दौड़ने से अस्तित्व बनाए रखने में मदद मिलती है। सेहत बेहतर होती है। लीबरमैन की सलाह है, डॉक्टर के पास जाने से बचने का सबसे अच्छा तरीका है, शारीरिक सक्रियता।

लीबरमैन बताते हैं, रनिंग से दिल के काम करने की क्षमता बढ़ती है। छोटी धमनियां अधिक संख्या में पैदा होती हैं। इससे ब्लडप्रेशर कम होने में मदद मिलती है। हाई ब्लडप्रेशर स्वास्थ्य समस्याओं और मौतों का प्रमुख कारण है। कैंसर से बचाव के लिए रनिंग अच्छा उपाय है क्योंकि इसमें खून की शुगर खर्च होती है। इस शुगर पर निर्भर कैंसर की कोशिकाएं भूखी रह जाती हैं। शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन से कई बीमारियां होती हैं। दौड़ने से सूजन कम होती है। यह दिमाग को बेहतर बनाने वाले प्रोटीन का उत्पादन बढ़ाती है। बुढ़ापे की बीमारी अल्जाइमर से बचाती है।

अध्ययनों का यह भी नतीजा है कि हर सप्ताह 50 मिनट से अधिक दौड़ने का मतलब यह नहीं है कि मृत्यु के खिलाफ अतिरिक्त बचाव संभव है। हमेशा अधिक दौड़ना बहुत अच्छा भी नहीं रहता है। क्योंकि चोट लगने का खतरा बना रहता है। लीबरमैन कहते हैं, कुछ लोग बुढ़ापा दूर भगाने के लिए दौड़ते हैं तो कुछ लोग दिल की बीमारी और अवसाद से बचाव के लिए ऐसा करते हैं। और कुछ लोगों को दौड़ना यों भी अच्छा लगता है।

(टाइम और टाइम लोगो रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)

दौड़ने वालों में दिल की बीमारी से मरने का खतरा 30% और कैंसर से मृत्यु की आशंका 23% कम होती है

मेंडी ओकलेंडर

नई रिसर्च से पता लगा है कि कम समय तक दौड़ने से भी कई फायदे होते हैं। इससे शरीर का हर सिस्टम सुधरता है। नहीं दौड़ने वाले की तुलना में दौड़ लगाने वाले लोगों के किसी भी कारण से मरने की 27% कम आशंका रहती है। उनके दिल की बीमारियों से 30% और कैंसर से जान गंवाने का खतरा 23% कम रहता है। 14 अध्ययनों के विश्लेषण से यह जानकारियां सामने आई हैं।

शोधकर्ताओं ने पांच वर्ष से अधिक समय तक अमेरिका, डेनमार्क, ब्रिटेन और चीन के दो लाख 32 हजार लोगों की मौतों का अध्ययन किया है। विश्लेषण में लोगों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया। हर सप्ताह 50 मिनट या उससे कम दौड़ने वाले लोगों को कम दौड़ने वाले समूह में रखा गया। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, आस्ट्रेलिया में हेल्थ और स्पोर्ट इंस्टीट्यूट के एसोसिएट प्रोफेसर जेल्जको पेडिसिक का कहना है, इससे फर्क नहीं पड़ता है कि आप कितना दौड़ते हैं। दौड़ने से हर हाल में फायदा होगा। जेल्जको ब्रिटिश स्पोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित नए विश्लेषण के लेखकों में शामिल हैं।

नई रिसर्च में शामिल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मानव बॉयोलॉजी के प्रोफेसर डेनियल लीबरमैन, का कहना है, मानव की शारीरिक रचना दौड़ने के लिए बनाई गई है। लोगों को अब अपने भोजन की तलाश में शिकार का पीछा नहीं करना पड़ता है। लेकिन, दौड़ने से अस्तित्व बनाए रखने में मदद मिलती है। सेहत बेहतर होती है। लीबरमैन की सलाह है, डॉक्टर के पास जाने से बचने का सबसे अच्छा तरीका है, शारीरिक सक्रियता।

लीबरमैन बताते हैं, रनिंग से दिल के काम करने की क्षमता बढ़ती है। छोटी धमनियां अधिक संख्या में पैदा होती हैं। इससे ब्लडप्रेशर कम होने में मदद मिलती है। हाई ब्लडप्रेशर स्वास्थ्य समस्याओं और मौतों का प्रमुख कारण है। कैंसर से बचाव के लिए रनिंग अच्छा उपाय है क्योंकि इसमें खून की शुगर खर्च होती है। इस शुगर पर निर्भर कैंसर की कोशिकाएं भूखी रह जाती हैं। शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन से कई बीमारियां होती हैं। दौड़ने से सूजन कम होती है। यह दिमाग को बेहतर बनाने वाले प्रोटीन का उत्पादन बढ़ाती है। बुढ़ापे की बीमारी अल्जाइमर से बचाती है।

अध्ययनों का यह भी नतीजा है कि हर सप्ताह 50 मिनट से अधिक दौड़ने का मतलब यह नहीं है कि मृत्यु के खिलाफ अतिरिक्त बचाव संभव है। हमेशा अधिक दौड़ना बहुत अच्छा भी नहीं रहता है। क्योंकि चोट लगने का खतरा बना रहता है। लीबरमैन कहते हैं, कुछ लोग बुढ़ापा दूर भगाने के लिए दौड़ते हैं तो कुछ लोग दिल की बीमारी और अवसाद से बचाव के लिए ऐसा करते हैं। और कुछ लोगों को दौड़ना यों भी अच्छा लगता है।

(टाइम और टाइम लोगो रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)

दौड़ने वालों में दिल की बीमारी से मरने का खतरा 30% और कैंसर से मृत्यु की आशंका 23% कम होती है

मेंडी ओकलेंडर

नई रिसर्च से पता लगा है कि कम समय तक दौड़ने से भी कई फायदे होते हैं। इससे शरीर का हर सिस्टम सुधरता है। नहीं दौड़ने वाले की तुलना में दौड़ लगाने वाले लोगों के किसी भी कारण से मरने की 27% कम आशंका रहती है। उनके दिल की बीमारियों से 30% और कैंसर से जान गंवाने का खतरा 23% कम रहता है। 14 अध्ययनों के विश्लेषण से यह जानकारियां सामने आई हैं।

शोधकर्ताओं ने पांच वर्ष से अधिक समय तक अमेरिका, डेनमार्क, ब्रिटेन और चीन के दो लाख 32 हजार लोगों की मौतों का अध्ययन किया है। विश्लेषण में लोगों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया। हर सप्ताह 50 मिनट या उससे कम दौड़ने वाले लोगों को कम दौड़ने वाले समूह में रखा गया। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, आस्ट्रेलिया में हेल्थ और स्पोर्ट इंस्टीट्यूट के एसोसिएट प्रोफेसर जेल्जको पेडिसिक का कहना है, इससे फर्क नहीं पड़ता है कि आप कितना दौड़ते हैं। दौड़ने से हर हाल में फायदा होगा। जेल्जको ब्रिटिश स्पोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित नए विश्लेषण के लेखकों में शामिल हैं।

नई रिसर्च में शामिल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मानव बॉयोलॉजी के प्रोफेसर डेनियल लीबरमैन, का कहना है, मानव की शारीरिक रचना दौड़ने के लिए बनाई गई है। लोगों को अब अपने भोजन की तलाश में शिकार का पीछा नहीं करना पड़ता है। लेकिन, दौड़ने से अस्तित्व बनाए रखने में मदद मिलती है। सेहत बेहतर होती है। लीबरमैन की सलाह है, डॉक्टर के पास जाने से बचने का सबसे अच्छा तरीका है, शारीरिक सक्रियता।

लीबरमैन बताते हैं, रनिंग से दिल के काम करने की क्षमता बढ़ती है। छोटी धमनियां अधिक संख्या में पैदा होती हैं। इससे ब्लडप्रेशर कम होने में मदद मिलती है। हाई ब्लडप्रेशर स्वास्थ्य समस्याओं और मौतों का प्रमुख कारण है। कैंसर से बचाव के लिए रनिंग अच्छा उपाय है क्योंकि इसमें खून की शुगर खर्च होती है। इस शुगर पर निर्भर कैंसर की कोशिकाएं भूखी रह जाती हैं। शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन से कई बीमारियां होती हैं। दौड़ने से सूजन कम होती है। यह दिमाग को बेहतर बनाने वाले प्रोटीन का उत्पादन बढ़ाती है। बुढ़ापे की बीमारी अल्जाइमर से बचाती है।

अध्ययनों का यह भी नतीजा है कि हर सप्ताह 50 मिनट से अधिक दौड़ने का मतलब यह नहीं है कि मृत्यु के खिलाफ अतिरिक्त बचाव संभव है। हमेशा अधिक दौड़ना बहुत अच्छा भी नहीं रहता है। क्योंकि चोट लगने का खतरा बना रहता है। लीबरमैन कहते हैं, कुछ लोग बुढ़ापा दूर भगाने के लिए दौड़ते हैं तो कुछ लोग दिल की बीमारी और अवसाद से बचाव के लिए ऐसा करते हैं। और कुछ लोगों को दौड़ना यों भी अच्छा लगता है।

(टाइम और टाइम लोगो रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)

दौड़ने वालों में दिल की बीमारी से मरने का खतरा 30% और कैंसर से मृत्यु की आशंका 23% कम होती है

मेंडी ओकलेंडर

नई रिसर्च से पता लगा है कि कम समय तक दौड़ने से भी कई फायदे होते हैं। इससे शरीर का हर सिस्टम सुधरता है। नहीं दौड़ने वाले की तुलना में दौड़ लगाने वाले लोगों के किसी भी कारण से मरने की 27% कम आशंका रहती है। उनके दिल की बीमारियों से 30% और कैंसर से जान गंवाने का खतरा 23% कम रहता है। 14 अध्ययनों के विश्लेषण से यह जानकारियां सामने आई हैं।

शोधकर्ताओं ने पांच वर्ष से अधिक समय तक अमेरिका, डेनमार्क, ब्रिटेन और चीन के दो लाख 32 हजार लोगों की मौतों का अध्ययन किया है। विश्लेषण में लोगों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया। हर सप्ताह 50 मिनट या उससे कम दौड़ने वाले लोगों को कम दौड़ने वाले समूह में रखा गया। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, आस्ट्रेलिया में हेल्थ और स्पोर्ट इंस्टीट्यूट के एसोसिएट प्रोफेसर जेल्जको पेडिसिक का कहना है, इससे फर्क नहीं पड़ता है कि आप कितना दौड़ते हैं। दौड़ने से हर हाल में फायदा होगा। जेल्जको ब्रिटिश स्पोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित नए विश्लेषण के लेखकों में शामिल हैं।

नई रिसर्च में शामिल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मानव बॉयोलॉजी के प्रोफेसर डेनियल लीबरमैन, का कहना है, मानव की शारीरिक रचना दौड़ने के लिए बनाई गई है। लोगों को अब अपने भोजन की तलाश में शिकार का पीछा नहीं करना पड़ता है। लेकिन, दौड़ने से अस्तित्व बनाए रखने में मदद मिलती है। सेहत बेहतर होती है। लीबरमैन की सलाह है, डॉक्टर के पास जाने से बचने का सबसे अच्छा तरीका है, शारीरिक सक्रियता।

लीबरमैन बताते हैं, रनिंग से दिल के काम करने की क्षमता बढ़ती है। छोटी धमनियां अधिक संख्या में पैदा होती हैं। इससे ब्लडप्रेशर कम होने में मदद मिलती है। हाई ब्लडप्रेशर स्वास्थ्य समस्याओं और मौतों का प्रमुख कारण है। कैंसर से बचाव के लिए रनिंग अच्छा उपाय है क्योंकि इसमें खून की शुगर खर्च होती है। इस शुगर पर निर्भर कैंसर की कोशिकाएं भूखी रह जाती हैं। शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन से कई बीमारियां होती हैं। दौड़ने से सूजन कम होती है। यह दिमाग को बेहतर बनाने वाले प्रोटीन का उत्पादन बढ़ाती है। बुढ़ापे की बीमारी अल्जाइमर से बचाती है।

अध्ययनों का यह भी नतीजा है कि हर सप्ताह 50 मिनट से अधिक दौड़ने का मतलब यह नहीं है कि मृत्यु के खिलाफ अतिरिक्त बचाव संभव है। हमेशा अधिक दौड़ना बहुत अच्छा भी नहीं रहता है। क्योंकि चोट लगने का खतरा बना रहता है। लीबरमैन कहते हैं, कुछ लोग बुढ़ापा दूर भगाने के लिए दौड़ते हैं तो कुछ लोग दिल की बीमारी और अवसाद से बचाव के लिए ऐसा करते हैं। और कुछ लोगों को दौड़ना यों भी अच्छा लगता है।

(टाइम और टाइम लोगो रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)

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