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एसजीएसआईटीएस : वर्षों से नई नियुक्तियां नहीं, पर प्रवेश में टॉप, मिल सकता है नैक ग्रेडिंग में फायदा
1952 में स्थापित श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) में इस साल पहली बार होने वाले नैक के निरीक्षण की तैयारियां भले ही चल रही हों, लेकिन संस्थान के सामने ए प्लस या डबल प्लस ग्रेड लाना बहुत बड़ी चुनौती होगी। दो दशक से भी ज्यादा समय से नियुक्तियां नहीं होने के कारण क्वालिटी टीचिंग पर असर पड़ रहा है। टीचिंग स्टाफ की कमी भी नजर आ रही है। यही नहीं, संस्थान के पास कोलैबरेशन रिसर्च पर भी कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। प्रोफेसरों की व्यक्तिगत रिसर्च और पेटेंट पर भी कोई बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं मिल पाई है। लंबे समय से नए निर्माण नहीं होने के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर भी वही पुराना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में नैक की तैयारी के दौरान संस्थान को कुछ अहम बिंदुओं पर काम करना बेहद अहम होगा। संस्थान को यूजीसी और एआईसीटीई की तरफ से किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए ग्रांट नहीं मिलना भी एक वजह है कि संस्थान को ए प्लस ग्रेड तक पहुंचना आसान नहीं होगा। संस्थान नैक को जो सेल्फ स्टडी रिपोर्ट बनाकर भेज रहा है, उसी के आधार पर 70 फीसदी अंक तय होंगे। सामान्य तौर पर एसएसआर भेजे जाने के तीन से पांच माह के भीतर टीम निरीक्षण के लिए आती है।
फिलहाल, प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित और पुराने इंस्टिट्यूट में शुमार एसजीएसआईटीएस में चूंकि नैक का निरीक्षण पहली बार हो रहा है, इसलिए कम के कम ए प्लस ग्रेड लाना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी। आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होना भी अच्छी ग्रेडिंग में परेशानी का कारण बनेगा। संस्थान वेतन के लिए काफी हद तक प्रदेश सरकार से मिलने वाले अनुदान पर निर्भर है।
प्लेसमेंट में भी बड़ी उपलब्धि नहीं है, आईआईटी जैसे संस्थानों से काफी पीछे, होस्टलों की भी हालत खराब
संस्थान में 23 पीजी और दस यूजी कोर्स हैं। यहां 4 हजार 550 से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। 1989 में इस संस्थान को यूजीसी ने ऑटोनॉमस का दर्जा दिया था। यहां कैंपस में ही टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ के लिए क्वार्टर हैं। चार बॉयज होस्टल हैं, लेकिन एक की हालत खराब है। नए होस्टल का प्रस्ताव भेजा गया है। तीन गर्ल्स होस्टल भी हैं। संस्थान एडमिशन के मामले में प्रदेश में टॉप पर है। छात्रों की प्रदेश में यह पहली पसंद है, लेकिन प्लेसमेंट के मामले में स्थिति उतनी मजबूत नहीं है, क्योंकि आईआईटी और आईएमएस जैसे इंस्टिट्यूट में जिस तरह 100 फीसदी प्लेसमेंट और औसत पैकेज 15 लाख के पार पहुंच रहा है, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी तक में प्लेसमेंट की स्थिति सुधरी है, लेकिन यहां प्लेसमेंट में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। संस्थान के डायरेक्टर डॉ. आरके सक्सेना कहते हैं कि बेहतरीन उपलब्धियों और अच्छी रिसर्च के साथ ही हमारे पास नैक को बताने के लिए सभी सातों बिंदुओं पर बुहत कुछ है। इसलिए ए प्लस या ए डबल प्लस ग्रेड लाने में परेशानी नहीं होगी।
1. करिकुलम डिजाइन एंड डेवलपमेंट
2. स्टूडेंट सपोर्ट एंड प्रोग्रेशन
3. टीचिंग लर्निंग एंड इवैल्यूएशन
4. रिसर्च कंसलटेंसी एंड एक्सटेंशन
5. इंफ्रास्ट्रक्चर एंड
लर्निंग रिसोर्सेस
6. गवर्नेंस एंड लीडरशिप
7. बेस्ट प्रैक्टिसेस एवं इनोवेशन
इन सात बिंदुओं पर होना है एसजीएसआईटीएस की परीक्षा
ये हैं प्लस पॉइंट
{स्टूडेंट-टीचर रेशो का यूजीसी के मानदंड से 80 फीसदी तक पालन।
{आधे से ज्यादा कोर्स एक्रेडिटेड हैं। 280 नियमित-अनुबंध आधार पर फैकल्टी। 220 से ज्यादा गेस्ट फैकल्टी। कुल 500 से ज्यादा।
{एलुमिनाई के हजारों सदस्य। देश-दुनियाभर से हर साल आते हैं। संस्थान को दे चुके हैं गोल्डन गेट, कॉफी हाउस, हॉल सहित कई सौगात।