बेटमा में 10 एकड़ में बेटमा साहिब और चरण पादुका साहिब गुरुद्वारा में देशभर से मत्था टेकने अाते हैं सिख समाजबंधु

Dhar News - प्रणय जैन/दीपक उपाध्याय | महू/बेटमा देशभर में गुरुनानकदेवजी के 550वें प्रकाश पर्व (12 नवंबर) का उल्लास है। गुरुनानक...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:55 AM IST
Dhar News - mp news sikh samajbandhu from 10 all over the country in betma sahib and charan paduka sahib gurudwara on 10 acres in betma
प्रणय जैन/दीपक उपाध्याय | महू/बेटमा

देशभर में गुरुनानकदेवजी के 550वें प्रकाश पर्व (12 नवंबर) का उल्लास है। गुरुनानक देव जी का इंदौर के समीप छोटे से कस्बे बेटमा से भी जुड़ा हुआ इतिहास है। यहां गुरुनानक देव जी सन् 1517 में इंदौर जिले के बेटमा साहिब में आए थे। यहां पर वह करीब 6 माह रुके थे। इस दौरान उन्हें बेटमा की संगत ने पीने के पानी की बावड़ी का पानी खारा होने की समस्या बताई थी। जिस पर उन्होंने अपने तप से बावड़ी का पानी मीठा कर पीने योग्य बनाया था। (इस बात का जिक्र समाज के पुरातन ग्रंथ तवारीख गुरु खालसा में भी है। इस ग्रंथ को सिख समाज द्वारा भी मान्यता प्राप्त है।) इस बावड़ी से आज भी ग्रामीण पीने के लिए पानी लेकर जाते हंै। यहां पर गुरुद्वारा में बावड़ी साहिब व चरण पादुका साहिब पर मत्था टेकने के लिए पूरे देश से समाजबंधु आते हैं।

बेटमा साहिब गुरुद्वारा के प्रवक्ता देवेंद्र सिंह गांधी ने बताया की गुरुनानकजी ने जिस बावड़ी के पानी को मीठा किया था उसे बावड़ी साहिब व जहां पर गुरुनानकदेवजी अपनी चरण-पादुका रख आराम करते थे। उसे चरण पादुका साहिब गुरुद्वारा कहते हैं। गुरुनानक देवजी जब बेटमा आए थे तो वह बावड़ी साहेब के पास ही बैठकर भजन व रब की बंदगी करते थे। इसके अलावा बेटमा में उस वक्त कुछ भीलों का बहुत आतंक था, तो गुरुनानकदेवजी ने उन्हें अहिंसा का उपदेश भी दिया था। इस स्थान को 1964 में श्री गुरु सिंघ सभा इंदौर के अंतर्गत रजिस्टर्ड किया गया। अब यहां पर करीब 25 करोड़ रु. की लागत से विभिन्न प्रकार के विकास कार्य किए जा रहे हैं। यहां चरण पादुका साहिब में ज्ञानी हरमेंद्र सिंह व बावड़ी साहिब में ज्ञानीदीप सिंह पूजन करते हैं।

बेटमा साहिब में 6 माह रुके थे गुरुनानक देवजी, बावड़ी के खारे पानी को कर दिया था मीठा... आज भी यहां से पीने का पानी ले जाते हैं श्रद्धालु

नया बावड़ी साहिब गुरुद्वारा, निर्माणाधीन

बावड़ी साहिब गुरुद्वारा

समाज के पुरातन ग्रंथ तवारीख गुरु खालसा में भी गुरुनानकदेवीजी के बेटमा साहिब आने और बावड़ी के पानी को मीठा करने का जिक्र है (यह ग्रंथ गुरमुखी लीपी में पंजीबद्ध है)


पहले 20 लोग कर पाते थे गुरुवाणी...नया बनते ही 4 हजार लोग कर सकेंगे

गुरुद्वारा परिसर में दरबार साहिब का जीर्णोद्धार का कार्य भी चल रहा है। पहले गुरुवाणी करने के लिए महज 20 लोग ही बैठ पाते थे। अब जो नया दरबार साहिब बन रहा है, वह करीब 15 हजार स्क्वेयर फीट में दो मंजिला परिक्रमा में तैयार किया जा रहा है। इसमें ऊपरी दिशा में पांच विशाल गुंबद बनाए जा रहे हैं। इसके बनने के बाद अब यहां पर एक बार में करीब 4 हजार श्रद्धालु गुरुवाणी कर सकेंगे।

सरोवर साहिब, जहां स्नान करने आते हैं लोग

लंगर हॉल

चरण पादुका साहिब

सितंबर में ज्योति ज्योत पर्व मनता है, पूरे देश से पहुंचते है श्रद्धालु

यहां हर साल सितंबर में गुरुनानक देवजी का ज्योति ज्योत पर्व मनाया जाता है। इसमें मप्र के इंदौर, खंडवा, देवास, उज्जैन, धार आदि शहरों के सााथ देश के अन्य प्रदेशो- दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, उप्र आदि से भी समाजबंधु आते हंै।

मप्र का सबसे बड़ा लंगर हॉल : एक बार में 10 हजार श्रद्धालु ले सकते हैं प्रसादी

इस गुरुद्वारा में पूरे मप्र का सबसे बड़ा लंगर हॉल बना हुआ है। करीब 15 हजार स्क्वेयर फीट एरिया में बने लंगर हॉल में एक बार में 10 हजार श्रद्धालु एक साथ प्रसादी ग्रहण कर सकते हैं। इसके अलावा यहां पर साल के 365 दिन 24 घंटे लंगर चलता है।

3 मंजिला इमारत में ठहरने के लिए 46 कमरे हो रहे तैयार- यहां बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए 3 मंजिला इमारत का निर्माण किया जा रहा है। इसमें ठहरने के लिए 46 कमरे बनाए जा रहे हैं। यह कमरे पूरी तरह से सर्वसुविधायुक्त रहेंगे।

सरोवर साहिब पर स्नान के लिए उमड़ते हंै श्रद्धालु... यहां गुरुद्वारा में सरोवर साहिब भी है। यहां पर अमावस्या, पूर्णिमा व अन्य पर्व पर स्नान का बहुत महत्व है। इस तरह का सरोवर सहिब मप्र में कुछ ही गुरुद्वारा में है, जिसमें बेटमा साहिब भी शामिल है। इस सरोवर साहेब में पंच प्यारों द्वारा अमृत भी पाया गया है।

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