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जिस देश की प्रजा चरित्रवान होगी वहां का प्रजातंत्र मजबूत होगा

एक वर्ष पहले
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जब आसुरी व्रती का बोलबाला होता है वहां राम राज्य नहीं राम वनवास हो जाता है। समर्पण के स्थान पर स्वार्थ आने पर मंदिर भी कोप भवन बन जाते है।अनाचार से अत्याचार, अत्याचार से भ्रष्टाचार का जन्म होता है। जिस देश में प्रजा चरित्रवान होगी वहां का प्रजातंत्र उतना ही मजबूत होगा। यह बात श्री अंबिका आश्रम बालीपुर धाम में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन शनिवार काे कथावाचक पं. मदन मोहन व्यासजी ने श्रद्धालुओं से कहीं।

महाराज ने मानस में लखन, गीता में निसाद को समझाते हुए कहा परमार्थ ही परमात्मा है। राम धर्म का विग्रहवान स्वरूप है। पतित अहिल्या को पावन किया, नीच समझे जाने बाले निषाद को गले लगाया जो पतित को पावन नहीं कर सके वह धर्म कैसा। कथा आदेश नहीं, उपदेश नही, संदेश है। यह मानव मात्र के मन की चिकित्सा है। राम भीलों तक अर्थात राष्ट्र के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचते हैं। आज राष्ट्र में साधनों की कमी नहीं बल्कि संवेदनाओं का अभाव है। आओ हम सभी मिलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान करें। श्रीराम कथा के रसपान से हर समस्या का समाधान होता है। व्यक्ति को अपने जीवन में एक बार मानस का पाठ जरूर करना चाहिए। भक्त जब दिग्भ्रमित हो जाता है तो भगवान गुरु के रूप में मार्ग दिखाते हैं। संसार में ऐसे बहुत से लोग हुए जिनका भगवत कृपा प्राप्त होने से जीवन बदल गया। जब युद्धक्षेत्र में अर्जुन संशय में पड़े तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें सही राह दिखाया। केवट प्रसंग, भरत प्रसंग सुनाते हुए कहा भरत ने अपने भाई के लिए अयोध्या का राज ठुकरा कर भगवान राम से मिलने चित्रकूट गए थे।

अतः हम सभी को इस राम कथा को श्रवण करके रामजी व भरत के आदर्श काे अपना कर घर, परिवार, समाज में हर किसी को इससे शिक्षा लेनी चाहिए।

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