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अकादमिक कैलेंडर का पालन कराने 20 अप्रैल से शुरू होने वाली चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएं 20 दिन पहले हो रही हैं शुरू

एक वर्ष पहले
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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहित सभी विश्वविद्यालयों को राजभवन के अलावा शासन की ओर से सत्र 2019-20 का अकादमिक कैलेंडर का पालन कराने सख्ती दिखा रहे हैं। एेसे में बीयू ने पोस्ट ग्रेजुएशन-पीजी कोर्स की परीक्षाएं समय से पहले ही शुरू कराने का टाइम टेबल जारी कर दिया। अकादमिक कैलेंडर के अनुसार पीजी चौथे सेमेस्टर परीक्षा 20 अप्रैल से शुरू होनी चाहिए पर बीयू उन्हें 31 मार्च से शुरू करा रहा है। ऐसे में पूरी कक्षाएं भी नहीं लग सकेंगे। जानकारों का कहना है कि शासन अकादमिक कैलेंडर के मामले में समय पर परीक्षा कराने और समय पर रिजल्ट जारी कराने पर ही ध्यान दे रहा है, जबकि उसका फोकस कक्षाओं पर नहीं है। यही कारण है कि बीयू द्वारा ही अंडर ग्रेजुएशन (यूजी) कोर्स के तहत तीसरे वर्ष की वार्षिक परीक्षाएं गुरुवार (12 मार्च) से शुरू कर रहा है, वहीं दिलचस्प बात यह है कि सरकारी कॉलेज के हजारों छात्रों में से एक भी छात्र ऐसा नहीं है जिसे शॉर्ट अटेंडेंस के आधार पर परीक्षा से वंचित किया गया हो।

नुकसान... नियमित कॉलेज जा रहे छात्रों की कक्षाएं 91 दिन भी नहीं लगीं

पढ़ने वाले छात्र होते हैं प्रभावित... बीयू पोस्ट ग्रेजुएशन चौथे सेमेस्टर की परीक्षा समय से पहले कराने से नियमित कॉलेज जाकर पढ़ाई करने वाले छात्र प्रभावित हो रहे हैं। इनकी 91 दिन भी कक्षाएं नहीं लगी हैं। मार्च दूसरे सप्ताह मेंं इनका आंतरिक मूल्यांकन होना है। प्रैक्टिकल 1 अप्रैल से शुरू होने है। 12 अप्रैल से परीक्षा की तैयारी के लिए अवकाश मिलने हैं, लेकिन बीयू ने यह सब स्किप कर सीधे मुख्य परीक्षा कराने का टाइम टेबल जारी कर दिया।75% उपस्थिति जरूरी

बीयू से संबद्ध सरकारी कॉलेज में एक भी छात्र ऐसा नहीं है जिसे कम अनुपस्थिति के कारण परीक्षा से रोका है। यानी सभी छात्रों ने कॉलेजों में 75% उपस्थित रहने की शर्त को पूरा किया है। दरअसल, कॉलेजों में छात्र कक्षाओं में पहुंच रहे हैं या नहीं इसकी जांच के लिए उच्च स्तर पर मॉनिटरिंग की कोई व्यवस्था ही नहीं है।

इधर, अटेंडेंस से कोई समझौता नहीं होता

इंस्टीट्यूट फॉर एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन के डायरेक्टर प्रो. एसएस विजयवर्गीय बताते हैं। उनके इंस्टीट्यूट में अटेंडेंस से कोई समझौता नहीं होता। इसलिए हर सेमेस्टर में कई छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाते। इसलिए वे लगातार कक्षाओं में आते हैं।

शिक्षक ही उपस्थिति प्रमाणित करते हैं

प्रो. पीके जैन, प्राचार्य शा. हमीदिया कॉलेज

प्रो. आरके सिंह, प्राचार्य एमवीएम कॉलेज
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