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- Dhar News Mp News The Government39s Time Depends On The President He Will Decide When To Accept The Resignation
सरकार का समय अध्यक्ष पर ही निर्भर, वे ही तय करेंगे, इस्तीफे कब स्वीकार करे
अब तक कांग्रेस के 114 में से 22 विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं। यदि इन्हें स्वीकार किया गया, तो विधानसभा में सदस्यों की प्रभावी संख्या 206 पहुंच जाएगी। कांग्रेस की संख्या 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद 92 रह जाएगी। भाजपा के विधायकों की संख्या 107 है। इसके अलावा चार निर्दलीय, दो बसपा व एक सपा विधायक है, जो वर्तमान में कांग्रेस को समर्थन कर रहे हैं। यदि वे कांग्रेस का समर्थन करते भी रहें, तब भी उनके पक्ष की संख्या 99 पर पहुंचेगी। प्रदेश में राज्यसभा के लिए तीन सीटों पर चुनाव होना है। यदि 206 सदस्य बचते हैं, तो प्रत्येक सीट को जीतने के लिए 52 वोटों की जरूरत होगी। उस स्थिति में भाजपा आसानी से दो सीट जीत सकती है। कांग्रेस पक्ष को दूसरी सीट जीतने के लिए पांच वोटों की जरूरत होगी। एेसे में तोड़-फोड़ की संभावनाओं को बल मिल सकता है। माना जा रहा है कि भाजपा विधायकों की किलेबंदी इसलिए की गई है।
प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर भ्रष्टाचार का उद्योग चलाने का आरोप लगाते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए। बुधवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए कहा- ‘ज्योतिरादित्य के नेतृत्व और प्रखरता से हम वाकिफ हैं, मोदी के नेतृत्व में उन्हें मुख्यधारा में काम करने का मौका मिलेगा।’ सिंधिया ने 10 मिनट के बयान में कांग्रेस छोड़ने का कारण तो बताया ही, पीएम नरेंद्र मोदी को सबसे सशक्त नेता भी बताया। उन्होंने 4 बार मोदी का नाम लिया, लेकिन मप्र में भाजपा के प्रमुख नेता शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं लिया। जबकि, शिवराज ने भोपाल में सिंधिया की बुआ भाजपा नेता यशोधराराजे सिंधिया के साथ पत्रकारों से बात करते हुए ज्योतिरादित्य की तारीफ की। ट्वीट भी किया- ‘स्वागत है महाराज, साथ है शिवराज।’ उधर दिल्ली में सिंधिया भाजपाई हुए, इधर भोपाल में भाजपा ने सिंधिया को राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया। सूत्र कह रहे हैं कि सिंधिया मोदी सरकार में मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसी शर्त पर सिंधिया भाजपा में आए हैं।
कांग्रेस मध्यावधि चुनाव चाहेगी, लेकिन होंगे उपचुनाव ही
4. यदि विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 230 में से आधे से ज्यादा इस्तीफे हो जाते हैं, तो यह राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करेगा कि वह सदन को भंग कर मध्यावधि चुनाव की सिफारिश करे या खाली सीटों पर उपचुनाव की। वर्तमान स्थिति में यह लगता है कि भाजपा उपचुनाव के पक्ष में रहेगी और कांग्रेस चाहेगी कि मध्यावधि चुनाव हों। मेरे हिसाब से उस स्थिति में मध्यावधि चुनाव की स्थिति नहीं बनेगी, उपचुनाव ही होंगे।
राज्यपाल की फिलहाल सीधी भूमिका नहीं, बजट में होगा फैसला
3. वर्तमान स्थिति में राज्यपाल का कोई सीधा रोल नहीं फिलहाल सियासी पटल पर नहीं दिखता क्योंकि 16 मार्च से बजट सत्र शुरू हो ही रहा है। उसमें बहुमत का परीक्षण हो जाएगा। बजट, पॉलिसी मैटर, विश्वास या अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होने पर सरकार के बहुमत का फैसला हो जाएगा। राज्यपाल के अभिभाषण पर सरकार को खतरा नहीं होता। उसमें संशोधन स्वीकृत हो सकते हैं, लेकिन वह कन्क्लूजन के बजाय इंडिकेटिव होती है। राज्यपाल को अभी इस मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
पूरे कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित नहीं कर सकता अध्यक्ष
2. विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफा देने वाले सदस्यों को विधानसभा के पूरे कार्यकाल के लिए अयोग्य
घोषित नहीं कर सकता। कर्नाटक में विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफा देने वाले सदस्यों को पूरे कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट तक मामला गया और सदस्यता से अयोग्य ठहराने काे तो सुप्रीम कोर्ट ने सही
माना था, लेकिन उपचुनाव लड़ने की मंजूरी दे दी थी।
विधानसभा अध्यक्ष संतुष्ट हो जाएं तो स्वीकार कर सकते हैं इस्तीफा
1. किसी भी सदस्य (विधायक) ने विधानसभा से इस्तीफा दिया है तो उससे विधानसभा अध्यक्ष का संतुष्ट होना जरूरी होगा। यदि वह संतुष्ट हैं, तो इस्तीफा स्वीकार कर सकते हैं। यदि अध्यक्ष को लगता है कि इस्तीफा दबाव डालकर दिलवाया गया है, तो वह सदस्य से बात कर सकता है या उसे अपने सामने उपस्थित होने के लिए कह सकता है। उसके बाद संतुष्ट होने पर ही अगली कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
चार संभावनाएं, लेकिन सफल वही होगा, जिसके पास संख्या ज्यादा होगी
सिंधिया के अब कमल ही नाथ
{केंद्र सरकार में मंत्री बनाए जा सकते हैं, समर्थकों का भी ध्यान
{भाजपा ने राज्यसभा प्रत्याशी घोषित किया, 13 को पर्चा भरेंगे
{नड्डा बोले- सिंधिया के नेतृत्व क्षमता से वाकिफ हैं
{ज्योतिरादित्य ने कहा- 18 महीने में सारे सपने बिखर गए
भास्कर के लिए विधायी विषयों के एक्सपर्ट सुभाष कश्यप बता रहे है आने वाले दिनों में बनने वाली हर स्थिति और उसका असर