अस्पतालों में भर्राशाही मची हुई है, फिर डॉक्टरों के ज्यादा पैसा क्यों देना चाहिए

Dhar News - मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के शिक्षकों के साथ अन्य शैक्षणिक अधिकारियों के रिवाइज वेतनमान (सातवें) को कैबिनेट ने...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:21 AM IST
Dhar News - mp news there is confusion in hospitals why should doctors pay more
मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के शिक्षकों के साथ अन्य शैक्षणिक अधिकारियों के रिवाइज वेतनमान (सातवें) को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। हालांकि खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी ने डॉक्टरों को ज्यादा पैसा देने पर ऐतराज जताया। तोमर ने तो यहां तक कहा कि अस्पतालों में स्ट्रेचर खींचने तक के लिए कोई नहीं मिलता। भर्राशाही मची हुई है। इन्हें ज्यादा पैसा क्यों देना चाहिए। पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा समेत कुछ अन्य मंत्रियों ने भी कहा कि डॉक्टर निजी प्रेक्टिस करते हैं। इसके बाद भी इतनी सुविधाएं मिलती हैं कि उन्हें सातवें वेतनमान की जरूरत नहीं। दूसरी ओर प्रभुराम चौधरी ने कहा कि डॉक्टरों को दिल्ली के बराबर सुविधाएं व पैसा दिया जाए तो स्थिति ठीक रहेगी। मंत्रियों के यह कहने के बाद वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि दिल्ली के बराबर ही वेतन दे रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने डॉक्टोंरे का पक्ष लेते हुए कहा कि यदि 7वें वेतनमान को रोका जाता है तो फैकल्टी हायर करने में दिक्कत आएगी।

डॉक्टर निजी प्रेक्टिस करते हैं, उन्हें 7वें वेतनमान की जरूरत नहीं : वर्मा

फैसले के बाद इन्हें मिलेगा सातवें वेतनमान का लाभ

संचालक चिकित्सा शिक्षा, अधिष्ठाता/संचालक प्रोजेक्ट, संयुक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा और संयुक्त संचालक-सह-अधीक्षक/प्राचार्य दंत चिकित्सा कॉलेज और प्राध्यापक चिकित्सा कॉलेज/प्राध्यापक दंत चिकित्सा कॉलेज को 1 लाख 44 हजार 200 उच्च शिक्षा द्वारा जारी यूजीसी वेतनमान के पे-मैट्रिक्स के अनुसार एकेडमिक लेवल 14 के समकक्ष वेतनमान दिया जाएगा। सह प्राध्यापक चिकित्सा कॉलेज/रीडर दंत चिकित्सा कॉलेज को 1 लाख 31 हजार 400 एकेडमिक लेवल 13 ए के समकक्ष, वेतनमान निर्धारित करने की स्वीकृति दी गई। सहायक प्राध्यापक चिकित्सा कॉलेज व लेक्चरर दंत चिकित्सा कॉलेज को 68 हजार 900 एकेडमिक लेवल 11 के समकक्ष और पांच साल बाद 79 हजार 800 एकेडमिक लेवल 12 के समकक्ष दिया जाएगा।

साढ़े नौ लाख कर्मचारियों को इलाज में मिलेगा फायदा : कैबिनेट ने कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं के अंतर्गत मप्र कर्मचारी राज्य बीमा सोसायटी के गठन का निर्णय लिया है। इस स्कीम में वर्तमान में 9 लाख 49 हजार 403 बीमित परिवार हैं। इनमें से प्रत्येक पर हर साल 3000 रुपए की चिकित्सा सेवा मिलती है, जो 285 करोड़ रुपए होती है। इसमें केंद्र सरकार का अंशदान 90% और राज्य का 10% होता है। सोसायटी गठित होती है तो केंद्र सरकार का अंशदान सीधे सोसायटी के खाते में आएगा। इस कुल राशि में से 118 करोड़ रुपए चिकित्सा में और शेष 166 करोड़ रुपए अन्य मद में खर्च किए जा सकते हैं।

सहकारी संस्थाओं में होंगी नियुक्ति

अनौपचारिक चर्चा में मुख्यमंत्री ने सभी प्रभारी मंत्रियों से कहा कि सहकारी संस्थाओं में जल्द से जल्द नियुक्तियां की जानी हैं, इसलिए वे पैनल बनाकर दे दें। यह काम प्राथमिकता पर होना चाहिए।

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