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दो से ज्यादा बच्चों वालों को सरकारी सुविधाएं नहीं मिले: भाजपा सांसद

एक वर्ष पहले
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5 साल बाद चीन को पछाड़कर 150 करोड़ हो जाएगी आबादी

देश में बढ़ती आबादी और घटते संसाधनों के मद्देनजर प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग शुक्रवार को संसद में उठी। राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के सांसद हरनाथ सिंह यादव ने शून्यकाल के दौरान यह मांग की। उन्होंने दलील दी कि जनसंख्या विस्फोट के कारण संसाधनों पर दबाव बढ़ा है, जिसके कारण न सिर्फ बेरोजगारी बढ़ी है, बल्कि हर स्थान पर भीड़ ही भीड़ दिखती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 में देश की आबादी 10 करोड़ 38 लाख थी जो 2011 में बढ़कर 121 करोड़ के पार पहुंच गई और 2025 तक बढ़कर 150 करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या गुनांक में बढ़ती है जबकि संसाधनों में बहुत कम बढ़ोतरी होती है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना चाहिए जो \\\'हम दो हमारे दो\\\' पर आधारित हो और इसका पालन नहीं करने वालों को हर तरह की सुविधाओं से न सिर्फ वंचित किया जाना चाहिए बल्कि उन्हें किसी भी प्रकार के चुनाव लड़ने से भी रोका जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 तक भारत आबादी के मामले में चीन को पछाड़ देगा। अभी भारत की आबादी 130 करोड़, जबकि चीन की 140 करोड़ है। दोनों के क्षेत्रफल में तो कोई बदलाव नहीं हो सकता पर आबादी के मामले में भारत उसे पछाड़ देगा।

बिहार, महाराष्ट्र समेत 11 राज्यों में लागू हैं अलग-अलग नीतियां

1 असमः एक जनवरी 2021 के बाद दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।

2 ओडिशाः दो से अधिक बच्चे वालों को शहरी स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं।

3 बिहारः दो बच्चों से ज्यादा होने पर नगर पालिका का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है।

4 उत्तराखंडः टू चाइल्ड पॉलिसी सिर्फ नगर पालिका चुनावों तक सीमित रखी गई है।

5 महाराष्ट्रः दो से अधिक बच्चों पर ग्राम पंचायत और नगर पालिका चुनाव लड़ने पर रोक। सरकार में कोई पद भी नहीं मिल सकता। दो से ज्यादा बच्चे वालों को पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के फायदे भी नहीं।

6 आंध्र प्रदेशः 1994 में पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने पर रोक।

7 तेलंगानाः पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव नहीं लड़ सकते।

8 राजस्थानः दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य। दो से अधिक बच्चे वाले तभी चुनाव लड़ सकते हैं, अगर दो में से कोई एक दिव्यांग हो ।

9 गुजरातः दो से अधिक बच्चे वाले पंचायत और नगर पालिका के चुनाव नहीं लड़ सकते।

10 मध्य प्रदेशः 2001 में टू चाइल्ड पॉलिसी के तहत सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लड़ने पर रोक थी, लेकिन 2005 में फैसला बदला। सरकारी नौकरियों और न्यायिक सेवाओं में पॉलिसी लागू।

11 छत्तीसगढ़ः दो बच्चों से ज्यादा होने पर सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लड़ने पर रोक थी, लेकिन 2005 में फैसला बदला। हालांकि सरकारी नौकरियों और न्यायिक सेवाओं में यह लागू है।

रिकॉर्ड: बिना लंच-डिनर ब्रेक के 12 घंटे तक चली लोकसभा की कार्यवाही

बजट सत्र के दौरान गुरुवार को लोकसभा में ऐतिहासिक समय तक कार्यवाही चलती रही। गुरुवार को बिना लंच और डिनर ब्रेक के लगातार 12 घंटे तक कामकाज हुआ। बजट सत्र के दूसरे भाग में इस साल की सबसे लंबी कार्यवाही लोकसभा में रात 11 बजकर 57 मिनट तक चलती रही, जो सामान्य कार्यवाही से करीब 6 घंटे ज्यादा है। लोकसभा ने गुरुवार को देर रात तक काम किया, जिसमें अनुदान मांगों पर बहस के दौरान 12 घंटों से ज्यादा का वक्त बीत गया। इस दौरान लंच और डिनर के लिए ब्रेक तक नहीं लिया गया। संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में आम तौर पर सुबह 11 से शाम 6 बजे तक करीब 7 घंटे काम होता है।

चिंता: सपा की जाितगत जनगणना की मांग, कहा- ओबीसी प्रतिनिधित्व कम

राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद विश्वंभर प्रसाद निषाद ने 2021 की जनगणना जातिवार कराए जाने और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण में क्रीमी लेयर की सीमा खत्म करने की मांग की। उन्होंने शून्यकाल में यह मांग करते हुए कहा कि देश भर में ओबीसी की आबादी 54% से अधिक है। इस वर्ग के लिए 27% आरक्षण होने के बावजूद विभिन्न सेवाओं में उनका प्रतिनिधित्व काफी कम है। उन्होंने न्यायपालिका और विश्वविद्यालयों में भी आरक्षण की मांग की।

भारत में आखिरी बार जातिगत जनगणना 1931 में हुई थी। अभी इसी आंकड़े से काम चल रहा है। इसी के आधार पर बताया गया कि देश में ओबीसी 52% हैं।

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