अगले माह से मप्र की मंडियों में गेहूं की आवक फिर से बढ़ने की संभावना

Dhar News - खाद्य‌ निगम के पास गेहूं-चावल का अथाह मात्रा में स्टॉक है। दूसरी ओर खुले बाजार से भाव अधिक होने से बहुत कम मात्रा...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:16 AM IST
Dhar News - mp news wheat arrivals likely to increase again in madhya pradesh mandis from next month
खाद्य‌ निगम के पास गेहूं-चावल का अथाह मात्रा में स्टॉक है। दूसरी ओर खुले बाजार से भाव अधिक होने से बहुत कम मात्रा में बिक रहा है। हाल ही में हुई वर्षा के बाद गेहूं की आगामी फसल रिकॉर्ड स्तर पर उतर सकती है। ऐसी स्थिति में मैदानों में थप्पियां लगाकर गेहूं का स्टॉक रखा जाएगा। सरकार के पास आर्थिक सलाहकार है या नहीं है? अरबों रुपए के गेहूं-चावल के स्टॉक को मानो गोदामों में रखकर सड़ाया जा रहा है। गलत नीतियों की वजह से जो घाटा होगा, उसका भुगतान कौन करेगा। वर्तमान में सिर्फ रख-रखाव पर अरबों रुपए खर्च हो रहे हैं। मप्र के किसानों के पास गेहूं का स्टॉक है। सोयाबीन की कटाई के बाद फिर से मंडियों में बिकने आ सकता है। ऐसी स्थिति में 2195 रुपए के भाव से खाद्य‌ निगम का गेहूं कौन खरीदना पसंद करेगा। इस भारी भरकम गेहूं-चावल के स्टॉक से कब तक गोदामों की शोभा बढ़ाते रहेंगे।

मैदा-रवा में ग्राहकी सामान्य

मप्र का किसान वर्ग सोयाबीन की कटाई कर मंडियों में बेचने हेतु तैयार करने में व्यस्त है। अत: मंडियों में गेहूं की आवक कमजोर पड़ गई है, इससे भावों में आंशिक सुधार आया है। कमजोर आवक के बाद भी भावों में बड़ी तेजी के संयोग कम लग रहे हैं। दीपावली त्योहार की रवा-मैदा में ग्राहकी अभी तक सामान्य से अधिक नहीं निकली है। ऐसा अहसास भी नहीं हो रहा है कि आने वाले दिनों में सामान्य से अधिक मांग निकलेगी। पिछले लंबे समय से हो रही वर्षा की वजह से भी ग्रामीण इलाकों से आना-जाना फिलहाल सुविधाजनक नहीं रह गया था। वैसे भी वर्षा के सीजन में आवक कमजोर पड़ जाती है। खाद्य‌ निगम के गेहूं के भाव 2195 रुपए हो गए हैं। वर्तमान खुले बाजार में भाव इससे काफी नीचे है। दीपावली बाद गेहूं की आवक फिर बढ़ने की आशा रखी जाती है। छोटी-मध्यम मैदा मिलों की आपूर्ति संभवत: किसानी माल से हो सकती है। ऐसी मिलें जिन्हें बड़ी मात्रा में गेहूं चाहिए, वे खाद्य‌ निगम का टेंडर भरकर गेहूं की खरीदी कर सकती है।

मानसून वापसी का इंतजार

इस मानसून ने कुछ राज्यों से अब लौटना शुरू किया है। मप्र में तो अभी भी मेहमान बनकर बैठा हुआ है। आए दिन आम जनता इसकी विदाई की राह देख रहे हैं कि यह कब विदाई लेता है। पिछले एक-डेढ़ माह से लगातार वर्ष से न केवल जलाशय, कुएं, बावड़ी में पानी का संग्रह अच्छी मात्रा में हो गया है, जमीन में पानी का स्तर भी बढ़ गया है। पिछले दिनों तक आम धारणा चने की सर्वाधिक बोवनी की बन रही थी। अब गेहूं की बोवनी अधिक मात्रा में होने की आशा व्यक्त की जाने लगी है। आगामी महीनों में अत्याधिक ठंड पड़ने पर भी गेहूं की फसल को अधिक नुकसान नहीं होगा, जबकि चने की फसल गेहूं की अपेक्षा नाजुक होती है। गेहूं समर्थन मूल्य से न केवल ऊपर बिक रहा है, वरन मप्र सरकार बोनस भी दे रही है। अत: सामान्य किस्म के गेहूं के भाव 2000 रुपए प्राप्त हो रहे हैं। इसमें किसान वर्ग खुश भी है। मप्र में गेहूं उत्पादन बढ़ता ही जा रहा है।

गेहूं की बिक्री कम मात्रा में

खाद्य‌ निगम को यह आंकलन कर लेना चाहिए कि पिछले 2-3 माह में कितना गेहूं बेचा है और अगले 3-4 माह में और कितना बेच लेगी। अब तो गेहूं से आयात भी बंद है। भारी भरकम आयात शुल्क लगा रखा है। विश्व बाजार में क्वालिटी गेहूं की बिक्री होती है, जिसमें प्रोटिन अधिक मात्रा में होता है। भारत में मप्र का लोकवन गेहूं ऐसा है, जो प्राथमिकता के साथ बिक सकता है। पंजाब, हरियाणा एवं उप्र के गेहूं हल्की क्वालिटी के माने जाते हैं। आम धारणा यह भी है कि आगामी दीपावली बाद मौसम साफ होने के साथ गेहूं की आवक बढ़ जाएगी और मंडियों में 2000 से 2100 रुपए के बीच बिकता रहेगा। नवंबर-दिसंबर में मंडियों में आवक बढ़ गई तब खाद्य‌ निगम का गेहूं 10-15 प्रतिशत से अधिक बिकने के आसार कम है। उल्लेखनीय है कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब भी गोदाम भरे पड़े थे।

व्यावसायिक नीति का अभाव

खाद्य‌ निगम के पास व्यावसायिक बिक्री नीति का अभाव है। इससे प्रति वर्ष स्टॉक बोझ बढ़ता जा रहा है। रख-रखाव को बोझ भी आम जनता पर पड़ता है। यह नहीं भूलना चाहिए। खाद्य‌ निगम के पास क्षमता से अधिक गेहूं-चावल का स्टॉक है। पिछले वर्षों में तो विश्व बाजार में निर्यात के संयोग भी बने थे, किंतु न तो खाद्य‌ निगम के प्रबंधक और न सरकार व्यावसायिक निर्णय नहीं लिए। गोदामों में पड़े स्टॉक पर रख-रखाव खर्च, घटती, क्वालिटी हल्की होने पर जो घाटा करोड़ों में होगा, उसका भुगतान कौन करेगा? सरकारी गलत निर्णयों का भुगतान भी क्या आम जनता को करना है। वर्तमान प्रधानमंत्री ने अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में जब महंगाई के संबंध केंद्र सरकार ने एक कमेटी बनाई थी, उसके अध्यक्ष वर्तमान प्रधानमंत्री थे, ने अपनी रिपोर्ट में खाद्य‌ निगम को तीन भागों में बांटने की सिफारिश की थी। सत्ता में आए 6 वर्ष होने जा रहे हैं किंतु खाद्य‌ निगम हालत बद से बदतर होती जा रही है। आम जनता को बाजार से महंगा गेहूं बेचा जा रहा है।

सोयाबीन की फसल तैयार होने से गेहूं की आवक कम

मप्र में मैदा मिलों के डिलीवरी भाव 2125 से 2150 रुपए

आगामी रबी सीजन में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने की आशा

खाद्य‌ निगम का चालू तिमाही में गेहूं का बिक्री भाव 2195 रुपए

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