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बॉलीवुड से बाहर हुए राम (गोपाल) वर्मा का वनवास

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2018, 02:31 AM IST

Dhar News - हर देश में महाकाव्य रचे गए हैं, क्योंकि अवाम को महाकाव्य की आवश्यकता होती है। अदालतों में सत्य वचन बोलने की शपथ...

Dhar - बॉलीवुड से बाहर हुए राम (गोपाल) वर्मा का वनवास
हर देश में महाकाव्य रचे गए हैं, क्योंकि अवाम को महाकाव्य की आवश्यकता होती है। अदालतों में सत्य वचन बोलने की शपथ लेने के लिए एक पवित्र पुस्तक की आवश्यकता होती है। अंग्रेजों ने अदालत की स्थापना की तो शपथ के लिए उन्होंने गीता को चुना जो महाभारत का हिस्सा है। उसका आकार सुविधाजनक होने के कारण ही उसे चुना गया। फिल्म ‘जॉली एलएलबी’ में संवाद है कि देश में 3 करोड़ मुकदमें कतार में हैं, क्योंकि मात्र 21000 अदालतें बनी हैं। जजों की संख्या सीमित है। हजारों युवा हिरासत में हैं जिन पर न कोई एफआईआर दर्ज है, न ही उन्हें अदालत में पेश किया गया है। इन अभागों में अधिकांश लोग एक मजहब विशेष के अनुयायी हैं। हिटलर ने यहूदियों के साथ ऐसा करके अपने विनाश की आधारशिला रख दी थी और हिटलर की पराजय के बाद यहूदियों की मांग पर उन्हें इजरायल की स्थापना के लिए वह भू-भाग दिया गया जहां सैकड़ों वर्षों से रह रहे लोगों को खदेड़कर हाशिये पर भेज दिया गया। इस दुर्घटना ने जन्म दिया आधुनिक आतंकवाद को जिसकी लपटें सभी देश महसूस कर रहे हैं।

अमेरिका के पास अपनी कोई मायथोलॉजी नहीं है, उनके पास महाकाव्य भी नहीं है। मारियो पूजो का उपन्यास ‘गॉडफादर’ ही उनकी ‘महाभारत’ मान लिया जाना चाहिए। दरअसल, पूंजीवादी व्यवस्था ही ‘गॉडफादर’ में वर्णित क्रियाकलाप की तरह संचालित की जाती है। अमेरिका में यूरोप की सिसली नामक जगह से बेहतर अवसर की तलाश में लोग अमेरिका आए थे और काम नहीं मिलने पर उन्होंने अपराध करना प्रारंभ किए। उनमें मौजूद एक चतुर सुजान ने अपराध जगत को संगठित किया और संगठन को नाम दिया ‘परिवार’ का इस ‘परिवार’ के नियम है और नियम पर चलना अनिवार्य माना जाता है। नियम भंग करने पर ‘परिवार’ का ही एक भाई उस दूसरे भाई को मार देता है, जिसने नियम भंग किया है। इसी कार्य प्रणाली को अपनाते हुए राजनीति में भी ‘परिवार’ का उदय हुआ है। वही अनुशासन, वही परिश्रम और वही संकीर्णता का वृहद संचार है यह।

मारियो पूजो के उपन्यास ‘गॉडफादर’ से प्रेरित फिल्म बनाई गई, जिसे दुनिया में खूब सराहा गया। मार्लन ब्रांडो ने केंद्रीय भूमिका निर्वाह के लिए नया जबड़ा (डेन्चर) लगाया और माथे पर एक गांठ शल्यक्रिया द्वारा आरोपित करवाई। उन्होंने संवाद अदायगी में सिसिलियन भाषा का लहजा अपनाकर अंग्रेजी भाषा बोली। फिरोज खान ने ‘गॉडफादर’ फिल्म से प्रेरित ‘धर्मात्मा’ बनाई। इसके वर्षों बाद रामगोपाल वर्मा ने अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘सरकार राज’ बनाई जो सफल भी रही। बाला साहब ठाकरे भी ‘गॉडफादर’ ही माने जाते थे। दाऊद भी गॉडफादर की तरह काम करता था। बाला साहेब ठाकरे और दाऊद की शैलियों में कुछ हद तक समानता है परंतु दोनों ही ‘मेड इन इंडिया’ हैं और इनका ‘फरमा’ सिसली में बनकर अमेरिका होते हुए भारत आया।

राम गोपाल वर्मा ने अनेक फिल्मों का निर्माण किया और नए कलाकारों को अवसर भी दिया। वे फिल्म उद्योग में एक हस्ती की तरह उभरे परंतु उनकी व्यक्तिगत कमजोरियों के कारण उनका पतन भी हुआ। वे मुंबई से निष्कासित कर दिए गए। यह कानूनी निष्कासन नहीं था। कोई भी पूंजी निवेशक उनके सनकीपन के पोषण के लिए तैयार नहीं था। वे हैदराबाद चले गए, जहां उन्होंने फिल्म बनाने के प्रयास किए। आज मुंबई में फिल्मकारों की कमी है और राम (गोपाल) वर्मा का ‘वनवास’ भी पूरा हो चुका है तथा फिल्मी ‘अयोध्या’ उनका इंतजार कर रही है। यह संभव है कि वह अपनी कमजोरियों पर विजय प्राप्त कर चुके हों और अपने मिथ्या अहंकार भाव से मुक्त हो चुके हों। फिल्म के व्याकरण पर उनकी मजबूत पकड़ है और वे प्रयोग भी करते रहे हैं। आज गॉडफादर नुमा लोग हुक्मरान हो गए हैं। राम गोपाल वर्मा राजनीतिक गॉडफादर बना सकते हैं।

जयप्रकाश चौकसे

फिल्म समीक्षक

jpchoukse@dbcorp.in

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