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भास्कर संवाददाता | गंजबासौदा

भास्कर संवाददाता | गंजबासौदा 250 साल पहले बुजुर्गों द्वारा बनाई गई परंपरा का पुराने शहर में अब भी बुजुर्ग और युवा...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:25 AM IST
भास्कर संवाददाता | गंजबासौदा

250 साल पहले बुजुर्गों द्वारा बनाई गई परंपरा का पुराने शहर में अब भी बुजुर्ग और युवा निर्वहन कर सामाजिक एकता की बुनियाद को मजबूत कर रहे हैं। हर साल होली की धुरेंडी के अवसर पर इस परंपरा का निर्वहन होता है। पुरानी बस्ती में जिन परिवारों में मृत्यु हो जाती है वहां उनके शोक में शामिल होकर पहली होली खेलने जाते हैं। परिवार के मुखिया सहित सभी सदस्यों को गुलाल का तिलक लगाकर उनके साथ होली की रस्म पूरी करते हैं।

इससे पहले सुबह सदर बाजार सुंदर मंदिर के पास स्थित पंचायत के चबूतरे पर पंचायत की बैठक आयोजित की जाती है। इस साल धुरेंडी पर बस्ती के लोगों ने अखिल भारतवर्षीय धर्म संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शशि सुंदर औदीच्य की उपस्थिति में पंचायत का पंच सर्वसम्मति से निर्दोष महाराज को पंच चुना गया। इनको शोक संप्तत परिवारों में गुलाल लगाने का दायित्व सौंपा गया ।

परंपरा सहेज रहे युवा

इस परंपरा को आगे कायम रखने के लिए युवाओं में खासा उत्साह नजर आ रहा हैं। डा. केके तिवारी बताते हैं कि कि पीढ़ियां गुजर गई लेकिन यह परंपरा आज भी कायम है। हर वर्ष धुरेंडी पर सुबह 9 बजे से पंचायत का आयोजन शुरू हो जाता है। पंचायत में बस्ती के बुजुर्गों के अलावा युवाओं की टोली भी एकत्रित होती है।