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कृषि महाविद्यालय भवन 4 साल से धूल खा रहा, 1 साल हुआ फंड का प्रस्ताव भेजे

भास्कर संवाददाता | गंजबासौदा कृषि महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए राशि आवंटित करने का प्रस्ताव एक साल पहले...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:55 AM IST

भास्कर संवाददाता | गंजबासौदा

कृषि महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए राशि आवंटित करने का प्रस्ताव एक साल पहले जबलपुर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय द्वारा शासन को भेजा गया था। प्रस्ताव को अब तक शासन ने स्वीकृति नहीं दी है। शासन ने भवन निर्माण के लिए पहले 4 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। जबकि निर्माण पर साढ़े छह करोड़ रुपए खर्च आ रहा था। विद्यालय की तकनीकी शाखा ने अतिरिक्त राशि स्वीकृत करने का प्रस्ताव शासन को दिया था। एक साल बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इससे महाविद्यालय के छात्र परिसर में बने शेड में पढ़ने के लिए मजबूर हैं। उन्हें कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

सीपीडब्ल्यू का एस्टीमेट अधिक

महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की निर्माण शाखा ने जो एस्टीमेट बनाकर दिया था उसके अनुसार शासन ने चार करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। जब सीपीडब्ल्यू (सेंट्रल पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट)को निर्माण कार्य सौंपा गया तो उसने ड्राइंग के अनुसार निर्माण कार्य की लागत छह करोड़ से अधिक दर्शाई। महाविद्यालय भवन निर्माण का मामला अटक गया। विश्वविद्यालय की निर्माण शाखा के अनुसार एस्टिमेट के तहत राशि देने का शासन को प्रस्ताव भेजा है। उसे चार साल में स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

एस्टीमेट के तहत प्रस्ताव भेजने के बाद भी चार साल में स्वीकृति नहीं मिल पाई है

कृषि महाविद्यालय भवन के लिए चार साल बाद भी नही मिला फंड।

कुएं से भर रहे पानी

छात्रों ने बताया कि छात्रावास भवन में पानी सप्लाई नहीं होता। इससे टंकी खाली पड़ी रहती है। छात्रों को नहाने और पीने के लिए कुएं से पानी लेकर आना पड़ता है। परिसर में इन दिनों पानी के ऐसे हालात है तो गर्मी के दौरान परिसर के आसपास बने कुएं भी सूख जाते हैं। ऐसे में जल संकट गहरा सकता है।

अटका है प्रस्ताव

भवन निर्माण की राशि बढ़ाने का प्रस्ताव चार साल से शासन के पास अटका है। इसलिए निर्माण नहीं हो पा रहा है। पीके सिंह, ईई जवाहरलाल नेहरू कृषि महाविद्यालय जबलपुर।

स्टाफ नहीं रहता, जबकि आवास बनने के बाद से बंद पड़े हैं

छात्रों का कहना है परिसर में स्टाफ के लिए आवास बन चुके हैं। कुछ का निर्माण शेष है। जो आवास बन गए हैं वे बंद पड़े हैं। उनमें शिक्षक और स्टाफ नहीं रहता। यदि आवास में कर्मचारी रहने लगे तो छात्रों का हौसला बना रह सकता है। जैसे ही सूर्य ढलता है चारों तरफ सियारों और वन्य जीवों की आवाजें आने लगती हैं।

पहुंच मार्ग बनाया उस पर भी चलना मुश्किल

छात्र राघव शिल्पकार, जितेंद्र जाट, अंकित शर्मा ने बताया कि परिसर में गुरोद मार्ग से छात्रावास तक पहुंच मार्ग का निर्माण किया गया है। मार्ग पर बड़े- बड़े बोल्डर डाले गए हैं। उस पर मुरम डाल दी। उन पर छात्र- छात्राओं का पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। दो पहिया वाहन फिसल कर गिर रहे हैं। इससे छात्र कच्चे रास्ते से निकल रहे हैं। बारिश के दौरान पहुंच मार्ग पर पैदल ही चलना दूभर हो जाता है। छात्रों का कहना है कि वे इसकी शिकायत प्राचार्य से कर चुके हैं। इसके बाद भी समस्या नहीं सुलझ पाई।

असुरक्षित हैं आवास

सत्यम नेमा, राकेश रघुवंशी, अभिलाषा बघेल का कहना है कि विद्यालय परिसर में बने छात्रावास में छात्र रह रहे हैं। परिसर की बाउंड्रीवाल न होने के कारण रात को जंगली जानवर और असामाजिक तत्व घुस आते हैं। सूने और सड़क मार्ग से दूर बने इस छात्रावास में रहना छात्रों के लिए जोखिम भरा बनता जा रहा है। पिछले महीनों में चोरी की वारदात भी हो चुकी है। छात्र बाउंड्रीवाल की मांग को लेकर विद्यालय के प्राचार्य को पत्र भेज चुके हैं। इस मामले में तत्कालीन प्राचार्य धीरेंद्र खरे भी छह महीने पहले जबलपुर पत्र भेज चुके हैं।

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