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कथा... इंद्र का अभिमान तोड़ने उठाया गोवर्धन: मंदाकनी

गंजबासौदा| इंद्र के मान को भंग करने के लिए सात कोस में फैले श्री गोवर्धन गिरिराज पर्वत को सात वर्ष के कन्हैया ने सात...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:35 PM IST

गंजबासौदा| इंद्र के मान को भंग करने के लिए सात कोस में फैले श्री गोवर्धन गिरिराज पर्वत को सात वर्ष के कन्हैया ने सात दिनों तक अपनी कनिष्ठा पर धारण कर इंद्र के मान को भंग किया। त्योंदा के बस स्टैंड मठ मंदिर में चल रही भागवत कथा के छठवें दिन बृज से आई कथावाचक मंदाकनी देवी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि परमात्मा किसी भी जीव के अहंकार को नहीं रखते। यदि भगवान से मिलना है, उन्हें प्राप्त करना है तो अपने अहम को छोड़कर मोह, मद, माया से हटकर भगवान का स्मरण करो तो भगवान अवश्य दर्शन देते हैं। इसके पूर्व कथा प्रसंगों में बकासुर वध, धनुकासुर, ब्रह्ममोह की कथा का वर्णन किया गया। गोकुल से वृंदावन गमन की लीला और वृंदावन के महत्व को समझाया। कई पुराणों की कथा एवं दृष्टांत के माध्यम से श्रोताओं को भगवत रस से रसविभोर कर दिया। गोवर्धननाथ के छप्पन भोग लगाए गए। सभी श्रोताओं ने श्री गिरिराज की 7 परिक्रमा कर गिरिराज धाम की जय जयकार की। श्रीमद्भागवत की आरती के साथ कथा मंगल हुई।

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