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धर्म... भागवत कथा भव बंधन में फंसे प्राणियों को उबारती है: डाॅ. रामकमलदास वेदांती

गंजबासौदा| श्रीमद् भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण का विगृह स्वरूप है। यह कथा रूपी अर्मत भव बंधन में फंसे...

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2018, 06:40 AM IST
धर्म... भागवत कथा भव बंधन में फंसे प्राणियों को उबारती है: डाॅ. रामकमलदास वेदांती
गंजबासौदा| श्रीमद् भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण का विगृह स्वरूप है। यह कथा रूपी अर्मत भव बंधन में फंसे प्राणियों को उभारती है। यह बात बुधवार को राधाकृष्ण पुरम बरेठ रोड पर चल रही नव दिवसीय भागवत कथा के प्रथम दिन जगत गुरु द्वाराचार स्वामी डा. रामकमल वेदांती महाराज ने कही। कथा को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण जब धरा को छोड़कर अपने धाम में जाने लगे तब भक्तों पर कृपा करके अपना तेज श्रीमद् भागवत में विलीन कर दिया। इस लिए यह भगवान का सब्यमय स्वरूप है। परम कल्याण कारक, बाद्मय स्वरूप भगवत महापुराण को विशेष कर कलयुग के जीवों के उद्धार के लिए महर्षि व्यास पुत्र सुखदेव महाराज द्वारा परीक्षित को सुनाई गई। डा. वेदांती ने कहा कि चार वेद, छह शास्त्र एवं 17 पुराण की रचना करने के उपरांत जब वेद व्यास को मन में शांति नहीं मिली और व्याग्र ह्रदय रहे तब नारद जी के उपदेश से उन्होंने भागवत महापुराण की रचना की और परम शांति को प्राप्त हुए। अत: इस महापुराण को जो लोग सुनते हैं जीवन में परम शांति प्राप्त करते हैं यह भगवान की शरणागति के लिए आव्हान करती है जो तीनों कालों में एक रस रहे। उस परमात्मा की शरण गृहण करने से भव बंधन से मुक्त कराती है।

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