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सरकारी अस्पताल में 31 फीसदी प्रसव ऑपरेशन से, 4 साल से लगातार बढ़ा ग्राफ

Garoth News - जिला अस्पताल में कुल प्रसव में से 31 फीसदी ऑपरेशन से हो रहे हैं। 4 साल में यह ग्राफ लगातार बढ़ा है, नाॅर्मल डिलीवरी...

Dainik Bhaskar

Feb 17, 2018, 02:15 AM IST
सरकारी अस्पताल में 31 फीसदी प्रसव ऑपरेशन से, 4 साल से लगातार बढ़ा ग्राफ
जिला अस्पताल में कुल प्रसव में से 31 फीसदी ऑपरेशन से हो रहे हैं। 4 साल में यह ग्राफ लगातार बढ़ा है, नाॅर्मल डिलीवरी वाले केस घटे हैं। इन मामलों में महिलाओं की स्थिति के मद्देनजर चिकित्सक ऑपरेशन को जरूरी बताते हैं। इस संबंध में सिविल सर्जन का कहना है कि रैफरल केस ज्यादा आना प्रमुख कारण है।

500 बेड वाले मंदसौर अस्पताल में 1 अप्रैल से 10 फरवरी तक की अवधि में 6430 डिलीवरी केस आए। इनमें से 2030 केस में ऑपरेशन से डिलीवरी हुई जो कि कुल संख्या का 31 फीसदी तक है। अस्पताल में रोज औसत 25 से 30 के बीच डिलीवरी होती है। जिले के अलावा नीमच, रतलाम, प्रतापगढ़, डग चौमहला तक के मरीज यहीं आते हैं जिससे संख्या अधिक है। सिजेरियन के बढ़ते केसेस के पीछे चिकित्सक खान-पान में बदलाव, कुछ बीमारियां जैसे कारण भी बता रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग हर साल शासन को प्रसव के आंकड़े भेजता है जिसमें तुलनात्मक 4 सालों से लगातार ऑपरेशन वाले मामले बढ़े हैं।

41 प्राथमिक और 7 सामुदायिक केंद्र, सिजेरियन केवल मंदसौर में

मंदसौर जिला अस्पताल मेटरनिटी वार्ड में रोज औसतन 25 से 28 डिलेवरी होती हैं।

आंकड़ों पर एक नजर

साल कुल डिलीवरी नाॅर्मल सिजेरियन प्रतिशत

2017-18 6430 4400 2030 31.50

2016-17 7671 5359 2312 30.14

2015-16 7041 5012 2029 28.82

2014-15 7108 5232 1876 26.40

(स्रोत : स्वास्थ्य विभाग, आंकड़े प्रतिवर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के, 2018 के आंकड़े 10 फरवरी तक के)

हमारे यहां आसपास से सर्वाधिक रैफरल केस आते हैं


जिले के पांच ब्लाॅकों मंदसौर, सीतामऊ, गरोठ, भानपुरा और मल्हारगढ़ में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 41 है। 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 2 सरकारी अस्पताल में गरोठ व भानपुरा शामिल हैं व मंदसौर में जिला स्तर का अस्पताल है। बाकी सभी केंद्रों पर नाॅर्मल डिलीवरी वाले केसेस हैंडल हो पाते हैं। मंदसौर अस्पताल में गर्भवती महिला की परिस्थिति मुताबिक दोनाें तरह की डिलीवरी के प्रबंध हैं। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस वर्मा के मुताबिक महिला में किसी तरह की बीमारी, कमजोरी या फिर बच्चे के जन्म के समय आकार में बदलाव, अधिक परेशानी जैसे लक्षण होने पर ही डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। बाकी मामलो में नाॅर्मल डिलीवरी होती है। कई जांचें जरूरी हैं जिनकी रिपाेर्ट के बाद ही उचित सलाह दी जाती है।

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