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निजी स्कूलों की तर्ज पर शासकीय प्रावि में पढ़ाई, अंग्रेजी में जवाब देते हैं बच्चे

प्रदेश में बेहतर शिक्षण पर जाेर दिया जा रहा है। नगर से करीब 6 किमी दूर सांजलपुर में नई शिक्षण पद्धति से पढ़ाई का असर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 12, 2018, 02:45 AM IST

निजी स्कूलों की तर्ज पर शासकीय प्रावि में पढ़ाई, अंग्रेजी में जवाब देते हैं बच्चे
प्रदेश में बेहतर शिक्षण पर जाेर दिया जा रहा है। नगर से करीब 6 किमी दूर सांजलपुर में नई शिक्षण पद्धति से पढ़ाई का असर दिखने लगा हैं। शासकीय प्राथमिक स्कूल के बच्चे किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं हैं। स्कूल व कक्षा में साफ-सफाई के साथ शिक्षण सामग्री तो देखने मिलती है। बच्चे परिचय अंग्रेजी में देने के साथ ही अंग्रेजी वर्णमाला और गिनती के साथ अर्थ भी बोलते और समझते हैं।

सांजलपुर में शनिवार को जब शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी और ग्रामीण बच्चों का टेस्ट लेने पहुंचे तो दैनिक भास्कर के प्रतिनिधि भी साथ थे। बच्चों बच्चों ने परिचय अंग्रेजी में देने के साथ ही अंग्रेजी वर्णमाला के शब्दों को बताने के साथ उनकी स्पेलिंग भी सुनाई। साथ ही सामान्य प्रश्नों के उत्तर भी बेहिचक दिए। बच्चों के मनोबल और स्कूल की स्थिति देखकर नहीं लग रहा था कि वे किसी सरकारी स्कूल के बच्चे हैं। वे किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों जैसे जवाब दे रहे थे।

शिक्षण प्रणाली

स्कूल व कक्षा में साफ-सफाई के साथ नवाचार शिक्षण सामग्री से कराया जाता है अध्यापन, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने लिया विद्यार्थियों का टेस्ट

खेल-खेल में पढ़ाते हैं, ग्रुप गीत से समझाते विद्यार्थियों को

सांजलपुर स्थित प्राथमिक शाला में बच्चों को घड़ी के कांटों के माध्यम से समय देखना सिखाती शिक्षिका वधवा।

स्कूल में नवाचार शिक्षण प्रणाली के साथ बच्चों को उनकी रुचि के अनुरूप पढ़ाया जाता है। शिक्षिका सोनाक्षी वधवा ने बताया कि वे बच्चों काे कार्टून, कहानियों के माध्यम से तो पढ़ाती हैं। चेहरे पर विभिन्न पशु-पक्षियों, फल-सब्जियों आदी के मास्क बच्चों को पहनाकर उनके बारे में जानकारी देने के साथ पूछते भी हैं। ग्रुप में बच्चों को गीतों के माध्यम से दिन, महीने, गिनती, पहाड़े, फल-सब्जियों, पशु-पक्षी के बारे में बताते हैं। साथ ही गीत के माध्यम से ही शरीर के अंगों की जानकारी दी जाती है। स्कूलों में विभिन्न प्रकार के पेड़, पौधों, पत्तियों, पशु-पक्षियों, खिलौने, खेल सामग्री सहित बच्चों के सामान्य ज्ञान से जुड़ी जानकारी दी जाती है। बच्चों से अंग्रेजी में भी बात की जाती है, ताकि वे बोल-चाल की भाषा में भी अंग्रेजी का उपयोग कर सकें।

एक वर्ष में बढ़ी संख्या, सभी यूनिफाॅर्म में आते हैं

प्रावि सांजलपुर में पिछले शिक्षा सत्र में बच्चों की संख्या 51 थी। जो इस शिक्षण सत्र में बढ़कर 73 हो चुकी है। बच्चों के लिए स्कूल की यूनिफाॅर्म सिलेटी पेंट और सफेद शर्ट के साथ सिलेटी-सफेद लाइनिंग वाली टाई हैं। सभी बच्चे ड्रेसकोड में आते हैं।

नवाचार से शिक्षण में सुधार

प्राथमिक स्तर से बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए नवाचार शिक्षण प्रणाली पर जो दिया जा रहा हैं। सांजलपुर प्रावि में बच्चों का आई क्यू अच्छा है। अन्य स्कूलों में भी इस पद्धति पर जोर दिया जा रहा है। वहां भी जल्द ही अच्छे परिणाम आएंगे। प्रवीण व्यास, बीआरसी भानपुरा-गरोठ

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