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जलसंकट : पीएचई ने स्वीकृत की 9 नई नल-जल योजनाएं

जिलेभर में अभी से पेयजल संकट गहराने लगा है। पेयजल स्रोत के दम तोड़ने से पीएचई की 28 नल-जल योजना बंद हो गई है। इधर, पीएचई...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 20, 2018, 02:45 AM IST

जिलेभर में अभी से पेयजल संकट गहराने लगा है। पेयजल स्रोत के दम तोड़ने से पीएचई की 28 नल-जल योजना बंद हो गई है। इधर, पीएचई द्वारा ग्रामीणों को तेजी से राहत देने की तैयारी की जा रही है। बंद 10 नलजल योजना को शुरू करने के लिए काम शुरू कर दिया है। वहीं नौ नई आवर्धन नलजल योजना स्वीकृत करा ली है। इसमें तीन फीसदी ग्रामीणों की जनभागीदारी भी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कयामपुर, कचनारा, नाहरगढ़ सहित कई गांवाें में अभी से पेयजल संकट गहराने लगा है। लोगों को दो से तीन किमी दूर से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिले की कुल 390 नलजल योजना में से 28 पेयजल स्रोत के बंद होने व अन्य कारणों से बंद हो गई है। पीएचई अमला संकट को देखते हुए राहत कार्य में जुट गया है। बंद नलजल योजना में से 10 को वापस शुरू करने के लिए नए नलकूप खनन व अन्य कार्य किए जा रहे हैं। वहीं ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए पीएचई ने जनसहयोग से नौ आवर्धन नलजल योजना को भी स्वीकृत करा लिया है। इसमें मंदसौर ब्लॉक के बिलांत्री, खोणाना, पाल्यामारू, फतेहगढ़, सीतामऊ ब्लॉक के पायाखेड़ी व बोरखेड़ी गांव में नलजल योजना स्वीकृत हुई। भानपुरा ब्लॉक के सानड़ा, दूधाखेड़ी, गरोठ ब्लॉक के ग्राम बर्डियाअमरा गांव में योजना स्वीकृत हो गई है। नौ योजना पर 7 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च कर 17 हजार 191 लोगों को पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

10 बंद योजनाओं पर भी काम जारी, ग्रामीणों के सहयोग से तैयार किया प्लान, 7 करोड़ 50 लाख खर्च कर 17 हजार लोगों को उपलब्ध कराएंगे पानी

तीन फीसदी राशि जनसहयोग से आएगी

ग्रामीण इलाकों में इस तरह नलकूप खनन कर नल-जल योजना से जोड़ रहे।

हैंडपंप में लगा रहे मोटर

जिले में वर्तमान में 701 हैंडपंप बंद हो गए हैं। इन्हें वापस शुरू करने के लिए पीएचई द्वारा इनमें सिंगल फेज की मोटर लगाई जा रही है जो गहराई से भी पानी खींच लेगी। विभाग ने अब तक करीब 50 पंपों में मोटर लगा कर उन्हें शुरू कर दिया है।

आवर्धन नलजल योजना में योजना की कुल लागत की तीन फीसदी राशि ग्रामीणों से पंचायत द्वारा एकत्र की जाती है। जैसे किसी ग्राम में एक करोड़ की नलजल योजना तैयार होती है तो तीन लाख रुपए ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए जाते हैं। बाकी राशि सरकार देती है। इसके बाद पीएचई योजना काे शुरू कर संचालन के लिए पंचायत को सौंप देती है। पंचायत योजना का सफल संचालन कर सके, इसके लिए तीन फीसदी राशि को तीन साल में थोड़ा-थोड़ा कर वापस पंचायत को दिया जाता है।

अभी पाइप लाइन डालने का काम किया जा रहा

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट की जानकारी मिलते ही उसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। नौ नई आवर्धन नलजल योजना शुरू कर दी है। इसमें टंकी बनने में समय लगेगा ऐसे में हमने अभी पाइप लाइन डालने का काम कर रहे हैं। इसके बाद सीधे नलकूप से पंप के माध्यम से पानी उपलब्ध करा दिया जाएगा। बाद में टंकी तैयार होने पर उससे कनेक्शन कर दिया जाएगा। जो हैंडपंप बंद हो गए उनमें सिंगल फेज मोटर लगाई जा रही है तो गहराई से पानी निकल लेगी। संदीप दुबे, कार्यपालन यंत्री, पीएचई

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