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भैंसोदामंडी की संवेदनशीलता के लिहाज से थाना बनाने का प्रयास

भास्कर संवाददाता | गरोठ/भैंसोदामंडी भैंसोदामंडी राजस्थान की सीमा पर बसा होने और रेलवे स्टेशन भी नजदीक होने से...

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2018, 02:50 AM IST
भैंसोदामंडी की संवेदनशीलता के लिहाज से थाना बनाने का प्रयास
भास्कर संवाददाता | गरोठ/भैंसोदामंडी

भैंसोदामंडी राजस्थान की सीमा पर बसा होने और रेलवे स्टेशन भी नजदीक होने से अपराधियों के लिए अनुकूल है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भैंसोदामंडी पुलिस चौकी को थाने में क्रमोन्नत किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। थाना बनाने के लिए दो बातें महत्वपूर्ण होती हैं, पहली अपराधों की रेटिंग अौर दूसरी क्षेत्र की संवेदनशीलता। यहां संवेदनशीलता के आधार पर थाना बनाने का प्रयास है लेकिन ये कब तक आकार ले सकेगा, फिलहाल इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। यह बात मंदसौर एसपी मनोजकुमार सिंह ने कही।

गांधीसागर झील महोत्सव की तैयारियों का जायजा लेने के बाद कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव और एसपी मनोजकुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी राजस्थान सीमा से लगे भैंसोदामंडी पहुंचे थे। यहां जनसंवाद और ग्राम रक्षा समिति के नए सदस्यों को परिचय वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। कलेक्टर ने कहा कि ग्राम पंचायत भैंसोदामंडी को नगर पंचायत बनाने की घोषणा पहले ही हो चुकी है। इसके लिए तैयारी चल रही है। अब अगला चुनाव यहां नगर पंचायत के आधार पर होगा। कलेक्टर व एसपी ने लोगों से चर्चाएं भी की और उनकी समस्याआें को सुना। एसडीएम आरपी वर्मा, एसडीओपी भंवरसिंह सिसौदिया, तहसीलदार नारायण नांदेड़, भानपुरा टीआई गोपालसिंह, भैंसोदामंडी चौकी प्रभारी प्रीति कटारे सहित ग्राम रक्षा समिति सदस्य और ग्रामीणजन उपस्थित थे। इस मौके पर रक्षा समिति के कुछ सदस्यों सहित ग्रामीणों की भावनाओं को भांपते हुए एसपी मनोजकुमार सिंह ने आगे बढ़कर उनके साथ सेल्फी भी ली।

महिलाएं भी बनीं ग्राम रक्षा समिति सदस्य- मप्र में पुलिस बल की कमी के चलते ग्राम रक्षा समिति का गठन करने के साथ नए सदस्य बनाए जा रहे हैं। यह बताते हुए चौकी प्रभारी प्रीति कटारे ने कहा नि:शुल्क सेवा के आधार पर ग्राम रक्षा समिति सदस्य बनाकर सूचना और सहयोग तंत्र खड़ा किया है। चौकी क्षेत्र के 12 ही गांवों में 15-15 सदस्य बनाए गए हैं, खास बात यह है कि इसमें इस बार प्रत्येक गांव से कम से कम 2-4 महिलाओं को भी शामिल किया हैं। रक्षा समिति के सदस्यों की पहचान के लिए टोपी, जाॅकेट, डंडा, सीटी तथा पहचान-पत्र दिया जाता है। यह महिलाएं गांव में जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद करती हैं और इन्हें बकायदा ड्यूटी पर भी बुलाया जाता है। शुक्रवार को रक्षा समिति सदस्यों को पहचान-पत्र और अन्य सामग्री वितरित की गई।

भैंसोदामंडी में समिति सदस्यों को पहचान-पत्र वितरण किया गया।

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