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सिविल अस्पताल : मरहम-पट्टी व बोतल चढ़ाने के अलावा कुछ नहीं हाेता, पलंग न आकस्मिक सुविधा

मंदसौर जिला अस्पताल के बाद सबसे बड़ा गरोठ का सिविल अस्पताल है। बावजूद सुविधा के नाम पर कुछ नहीं। यह हकीकत बुधवार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 23, 2018, 02:50 AM IST

मंदसौर जिला अस्पताल के बाद सबसे बड़ा गरोठ का सिविल अस्पताल है। बावजूद सुविधा के नाम पर कुछ नहीं। यह हकीकत बुधवार को हुए बस हादसे के बाद सामने आ गई। घायल यात्रियों को एक से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नहीं मिले। घायल जमीन पर बैठे थे, उनके लिए पलंग तक की व्यवस्था नहीं थी। हालांकि हादसे में यात्री ज्यादा गंभीर घायल नहीं थे, यदि कोई गंभीर हो जाए तो क्या स्थिति बनेगी। इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इलाज के नाम पर केवल मरहम-पट्टी और दर्द की दवा दी गई, वह भी कम्पाउंडरों ने की।

चिकित्सा सुविधाओं को लेकर गरोठ सिविल अस्पताल की हालत सुधारने की बात हर बार होती है लेकिन होता कुछ नहीं है। दिसंबर 2017 में एक के बाद एक सभी डाॅक्टर छुट्टी पर चले जाने से तीन दिनों तक मरीज परेशान होते रहे। एक डाॅक्टर भानपुरा से बुलाना, इसके बाद भी जब हालात नहीं सुधरे तो एसडीएम आरपी वर्मा और विधायक चंदरसिंह सिसौदिया को हस्तक्षेप करना। तब कहीं छुट्टी गए डाॅक्टर लौटे और मरीजों को राहत मिली। विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी तो आज तक पूर्ण नहीं हो पाई अौर अन्य सुविधाएं नहीं सुधरीं। इतना बड़े आैर महत्वपूर्ण अस्पताल में एकमात्र चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. एस.एस. विजयवर्गीय एमडी है। जबकि अस्पताल में चार अन्य डाॅक्टर भी है जो ड्यूटी चार्ट के अनुरूप समय देने के साथ ही ओवरटाइम भी करते हैं। व्यवस्थाओं की बात करें तो अस्पताल में मरहम-पट्टी और बोतल चढ़ाने के अलावा कोई इलाज नहीं हाेता। बुधवार को पुलिस और डायल-100 घायलाें को अस्पातल लेकर तो आ गई लेकिन गंभीर घायलों को ओपीडी और एक्स-रे रूम तक ले जाने के लिए स्ट्रैचर तक नजर नहीं आए। प्रबंधन का दावा है कि दो नए स्ट्रेचर हैं जिनका उपयोग किया लेकिन लोगों ने उन्हें एक तरफ रख दिया था इसलिए बाद में मिले नहीं।

स्ट्रेचर भी टूटी है, मरीज के परिजन को होना पड़ता है परेशान

जिला अस्पताल के बाद दूसरे नंबर पर गेराठ सिविल अस्पताल परिसर में टूटा स्ट्रेचर।

रोज 300 मरीज आते हैं इलाज के लिए, रैफर अस्पताल बना

नगर सहित क्षेत्र के लिए गरोठ सिविल अस्पताल काफी महत्वपूर्ण हैं। इलाज के लिए प्रतिदिन यहां औसतन 300 मरीज आते हैं। गरोठ में बेहतर और आकस्मिक चिकित्सा सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को रैफर करना पड़ता है। एेसे में मरीज के परिजन मंदसौर जाए तो कम से कम 105 किमी जाना पड़ता है, जबकि झालावाड़ (राजस्थान) 80 किमी जाना पड़ता है। कम दूरी और बेहतर सुविधा के कारण अधिकांश मरीजाें काे परिजन झालावाड़ या कोटा ले जाते हैं। ऐसे में मरीजों को मप्र शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता और खर्च भी ज्यादा होता है।

सोनोग्राफी मशीन बंद, डिजिटल एक्स-रे मशीन का इंतजार- अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन है लेकिन विशेषज्ञ के अभाव में कमरे में बंद पड़ी है। डिजिटल एक्स-रे मशीन का लंबे समय से इंतजार है। 10 फरवरी को जब पुरुष वार्ड का लोकार्पण हुआ था, तब दोनों मुद्दे उठे थे। तब बीएमओ डाॅ. आरसी कुकड़े ने सात दिन में दोनों व्यवस्थाएं पूर्ण कर सुविधा शुरू करने की बात कही थी। अब तक कुछ नहीं हुआ। बुधवार को घायलों को एक्स-रे करवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

7 में से 1 विशेषज्ञ चिकित्सक- शासकीय सिविल अस्पताल गरोठ में विशेषज्ञ सहित 12 डाॅक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इनमें शल्यक्रिया चिकित्सक, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, शिशुरोग विशेषज्ञ, चिकित्सा विशेषज्ञ, निश्चेतना विशेषज्ञ, दंत विशेषज्ञ, आयुष विशेषज्ञ के 1-1 पद और चिकित्सा अधिकारी के 5 पद स्वीकृत हैं। इसमें से केवल एक चिकित्सा विशेषज्ञ व 4 चिकित्सा अधिकारी ही पदस्थ हैं। उसमें भी दो चिकित्सा अधिकारी प्राथमिक स्वास्थ केंद्र से सिविल अस्पताल में अटैच हैं।

सुविधाएं लगातार बढ़ाई जा रही हैं

सिविल अस्तपताल गरोठ में मरीजों के लिए सुविधाओं का विस्तार निरंतर किया जा रहा हैं। डाॅक्टरों की कमी के कारण यहां विशेषज्ञ डाॅक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। हमने पूर्ति करने के लिए पत्र लिख रखा हैं। स्ट्रेचर कुछ समय पहले ही खरीदे हैं, बुधवार को लोगों ने कहीं रख दिए थे। इसलिए दिखे नहीं। सोनोग्राफी मशीन और डिजिटल एक्स-रे मशीन की सुविधा भी जल्द उपलब्ध होगी। डॉ. आरसी कुकड़े, बीएमओ मेलखेड़ा-गरोठ

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