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लोकार्पण के बाद से पुरुष वार्ड में लगे ताले, मरीजों को इमरजेंसी वार्ड के पीछे कर रहे भर्ती

तहसील मुख्यालय गरोठ स्थित शासकीय सिविल अस्पताल में पुरुष मरीजाें को भर्ती करने की सुविधा की दृष्टि से 40 लाख रुपए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 06, 2018, 02:55 AM IST

तहसील मुख्यालय गरोठ स्थित शासकीय सिविल अस्पताल में पुरुष मरीजाें को भर्ती करने की सुविधा की दृष्टि से 40 लाख रुपए से मेल वार्ड बनाया। पिछले महीने 10 फरवरी को विधिवत लोकार्पण हुआ और तभी से वार्ड पर ताले लगे हैं। जिम्मेदार कुछ काम बाकी होना बताकर शीघ्र खोलने की बात कह रहे हैं। ऐसे में यदि पुरुष मरीज को भर्ती किया हाेना है तो उसे इमरजेंसी वार्ड के पीछे बने बरामदे में पलंग लगाकर भर्ती करना पड़ता है। ऐसे में मरीज छुट्टी लेकर घर जाना पंसद करता है। उसके पास इसके अलावा दूसरा रास्ता भी नहीं होता है, प्राइवेट अस्पताल में जाए तो फीस देना उसके बस की बात नहीं।

गरोठ में सिविल अस्पताल तो है लेकिन उसमें पुरुष मरीजों को भर्ती करने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। सालों से पुरुष मरीजों को इमरजेंसी वार्ड के पीछे बने कवर्ड बरामदे में या प्राइवेट वार्ड में भर्ती किया जाता रहा है। रोगी कल्याण समिति व अस्पताल प्रबंधन द्वारा इमरजेंसी व ओपीडी वार्ड के पीछे रिक्त जगह पर करीब 40 लाख रुपए की लागत से 20 पलंग वाला पुरुष वार्ड का निर्माण किया। इसमें डाॅक्टर और नर्स रूम के साथ लेटबाॅथ की सुविधा है। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर मरीजों के लिए अतिरिक्त 10 पलंग लगाए जा सकते हैं। अर्थात 30 मरीजों के लिए सुविधाजनक वार्ड बना और लोकार्पण 10 फरवरी काे सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक चंदरसिंह सिसौदिया के करकमलों से हुआ। उसके अगले दिन से ही वार्ड पर ताले लगे हैं। इससे मरीजों को भर्ती करने में असुविधा हो रही हैं। डाक्टर व स्टाफ को रोजाना समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है लेकिन कुछ बोल नहीं पाते हैं। बोलिया निवासी अमरलाल मेघवाल, खड़ावदा निवासी रामचंद्र गुर्जर मंगलवार काे अस्पताल अपने परिजनों के लिए दवाई लेने आए थे। पूछने पर बताया चार दिन पहले बुखार और खांसी के कारण परिजन को लेकर आए थे। दिन में अस्पताल में रहे लेकिन शाम होते ही वापस घर जाना पड़ा। यहां भर्ती करने की जगह ही नहीं थी।

नवनिर्मित मेल) वार्ड जिस पर 10 फरवरी को लोकार्पण के बाद से ही ताले लगे हैं।

वार्ड में पलंग के साथ पर्याप्त स्टाफ भी नहीं

नवनिर्मित पुरुष वार्ड में लगाने के लिए नए पर्याप्त पलंग (बेड) तक नहीं हैं। साथ ही अन्य सुविधाओं का भी अभाव है। यहां तक की स्टाफ भी पर्याप्त नहीं है। इन सभी कारणों के चलते अस्पताल प्रबंधन भी वार्ड को बंद रखना ही चाहता है। यदि वार्ड खुल गया तो सुविधाओं के अभाव में मरीजों के परिजन अौर हंगामा करने वाले नेताअों और लाेगों की सुनना उन्हीं को है।

कोई परेशानी नहीं, इसी सप्ताह खोल देंगे

कुछ काम बाकी था, इसलिए वार्ड को खोला नहीं गया। इसी सप्ताह वार्ड को खोल देंगे। वैसे पुरुष मरीजों को भर्ती करने में कोई परेशानी नहीं है। अस्पताल में उनके लिए सुविधा है। यदि कोई मरीज को घर ले जाना चाहता है तो हम जबर्दस्ती रोक नहीं सकते हैं। फिर भी मरीज की हालात देखने के बाद ही छुट्टी देते हैं या रैफर करते हैं। डॉ. किशोरसिंह परिहार, प्रभारी प्रबंधक शासकीय सिविल अस्पताल गरोठ

रोज 100 पुरुष मरीज आते हैं

अस्पताल में रोज औसतन 300 मरीज आते हैं। इनमें करीब 100 पुरुष मरीज होते हैं जिसमें 5 से 15 फीसदी मरीज भर्ती होने लायक होते हैं। व्यवस्था नहीं हाेने से अधिकतर मरीजों को परिजन घर ले जाते हैं। जबकि दुर्घटना में घायल मरीज अलग हैं जिन्हें इमरजेंसी वार्ड के पीछे कवर्ड क्षेत्र में ही भर्ती होना पड़ता है या फिर परिजन छुट्टी लेकर ले जाते है या रैफर करवा लेते हैं।

अभी काम बाकी है

अस्पताल सूत्रों के अनुसार तो नवनिर्मित पुरुष वार्ड में खिड़कियों पर मच्छर जाली लगाने सहित फिनिशिंग, लेट-बाॅथ का कुछ काम बाकी है।

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