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जनभागीदारी मद में 30 लाख जमा, कॉलेज 50 लाख रु. का सोलर संयंत्र कैसे लगाएं

उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में सोलर रूफ टाप संयंत्र लगाने के लिए आदेश जारी किए हैं। इसके लिए कॉलेजों की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 09, 2018, 02:55 AM IST

उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में सोलर रूफ टाप संयंत्र लगाने के लिए आदेश जारी किए हैं। इसके लिए कॉलेजों की जनभागीदारी समिति के कोष से राशि खर्च की जाना है। इस पर एक वित्त वर्ष में 50 लाख खर्च होंगे लेकिन राजीव गांधी पीजी कॉलेज को छोड़ दें तो जिले के किसी भी कॉलेज की जनभागीदारी मद में इतनी राशि नहीं है। इससे अन्य कॉलेजों में संयंत्र लगना नामुमकिन है। शासन के निर्देश का पालन कैसे करें, इसे लेकर कॉलेज प्राचार्य असमंजस में हैं।

उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक ने पत्र जारी कर सभी कॉलेज प्राचार्यों को ग्रिड कनेक्टेड व नेट मीटर आधारित सोलर रूफ टाप संयंत्र लगाने के निर्देश दिए हैं। इससे कॉलेजों के बिजली बिलों में कमी होगी लेकिन सवाल यह है कि बिना सरकारी मदद के कॉलेजों में यह संयंत्र लगाया जाना आसान नहीं है। विभाग ने सोलर सिस्टम लगाने के लिए कॉलेज प्राचार्यों को जनभागीदारी से सालाना 15 से 50 लाख रुपए खर्च करने की अनुमति दी लेकिन राजीव गांधी शासकीय कॉलेज को छोड़ किसी भी कॉलेज के पास जनभागीदारी में इतनी राशि नहीं है। वहीं अब विभाग के आदेश ने प्रबंधन की परेशानी बढ़ा दी है। लीड कॉलेज प्राचार्य डॉ. रवींद्र सोहनी ने बताया कि अन्य कॉलेजों में बिना सरकारी मदद के सोलर संयंत्र लगाने में आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कॉलेजों की जनभागीदारी मद में एक से 30 लाख रुपए तक ही हैं। यह राशि भी सालाना सुविधा, कर्मचारियों के वेतन जैसे कार्यों में खर्च होती है। ऐसे में 50 लाख रुपए की राशि जुटाना आसान काम नहीं है। इस काम के लिए दान में भी राशि नहीं ली जा सकती। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे कॉलेजों को होगी। मामले में उच्च अधिकारियों से दिशा-निर्देश प्राप्त करेंगे।

राजीव गांधी कॉलेज को छोड़ किसी के पास जनभागीदारी में नहीं पर्याप्त राशि।

यह है कॉलेजों की स्थिति

शामगढ़, सुवासरा व मल्हारगढ़ कॉलेज खुले हुए तो अभी तीन साल ही हुए हैं। इनके पास ना स्वयं का भवन है ना पर्याप्त फर्नीचर। यह कॉलेज कलेक्टोरेट दर पर रखे गए कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं। इनकी जनभागीदारी समिति भी इसी साल बनी है। ऐसे में इन कॉलेजों के पास जनभागीदारी राशि के नाम पर अभी कुछ नहीं है। यही हाल पिपलियामंडी, सीतामऊ व भानपुरा कॉलेज के भी हैं।

गरोठ कॉलेज के पास राशि लेकिन नहीं लगा सकते संयंत्र

गरोठ कॉलेज प्राचार्य एन.के. धनोतिया ने बताया कि जनभागीदारी में राशि तो है लेकिन फिर भी संयंत्र नहीं लगा सकते क्योंकि यहां 12 प्राध्यापक व कर्मचारी जनभागीदारी में लगे हैं। इनके वेतन, अन्य खर्च के लिए सालाना 15 लाख राशि की आवश्यकता होती है। इसके बाद अन्य सुविधाएं पहली प्राथमिकता है। इसलिए हम सोलर संयंत्र नहीं लगा सकते।

शासन द्वारा पूर्व में कॉलेज छत पर सोलर सिस्टम लगा दिया

प्राचार्य पूरालाल पाटीदार ने बताया कि हमारे पास जनभागीदारी में इतनी राशि नहीं है कि हम सालना 15 लाख भी सोलर संयंत्र पर खर्च कर सकें। अभी जो राशि एकत्र हुई थी उसमें चार लैब व कुछ कमरे बनवाए जा रहे हैं। शासन द्वारा पूर्व में हमारे कॉलेज की छत पर सोलर सिस्टम लगाया जा चुका है। इसके अतिरिक्त हम नहीं लगा सकते।

बिजली की खपत कम होगी, बिल की राशि में भी आएगी कमी

सोलर संयंत्र लगने से कॉलेजों में बिजली की खपत कम होगी। इससे बिजली बिलों में कमी होगी। ग्रिड कनेक्टेड नेट मीटर अाधारित संयंत्र लगेंगे। बिविकं के विक्रांत ठाकुर ने बताया संयंत्र के साथ इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट नेट मीटर लगेगा। इससे अतिरिक्त बिजली बिविकं को रिटर्न जाएगी। उपयोग होने पर वह बिजली उपभोक्ता वापस ले सकेगा या फिर उतनी यूनिट अगले माह के लिए जुड़ जाएगी।

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