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धर्म-संस्कृति के मार्ग से भटकने के कारण मनुष्य हाे रहा दु:खी

वर्तमान समय में मनुष्य धर्म और संस्कृति के मार्ग से भटक रहा है और आधुनिक भौतिकतावाद के चक्कर में पड़कर स्वयं दु:खी...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:55 AM IST
वर्तमान समय में मनुष्य धर्म और संस्कृति के मार्ग से भटक रहा है और आधुनिक भौतिकतावाद के चक्कर में पड़कर स्वयं दु:खी होने के साथ पतन की तरफ बढ़ रहा हैं। उसके इस आचरण के कारण घर अौर समाज के साथ राष्ट्र का भी पतन हो रहा है। जैसा वह कर रहा है, वही देखकर बच्चे कर रहे हैं। यदि मनुष्य को मोक्ष पाना है तो उसे आधुनिक भौतिकतावाद के रास्ते को छोड़कर धर्म व संस्कृति के मार्ग पर चलना पड़ेगा। यह बात साधुमार्गी जैनाचार्य आचार्यश्री रामलालजी महाराज ने कही।

साधुमार्गी श्वेतांबर श्रीसंघ स्थानकवासी द्वारा गांधी चौक गरोठ पर धर्मसभा हुई। जहां दीक्षा दानेश्वरी आचार्यश्री रामलालजी महाराज के प्रवचन हुए। आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य अधर्म के मार्ग पर न चल कर गलत आचरण की ओर अग्रसर हो रहा है। जो उसे पतन की ओर ले जा रहा है। भौतिकता की चकाचौंध में मनुष्य व विशेषकर युवा पीढ़ी धर्म के रास्ते से भटककर जिस मार्ग पर चल रही है, वह अधर्म का मार्ग होकर पतन का रास्ता है। मनुष्य जीवन मे धर्म के प्रति आस्था रखेगा, तभी उसे ज्ञान, संयम मिलेगा। मनुष्य जीवन में त्याग की प्रवृत्ति व धर्ममय जीवन जीए तभी आत्म शांति व तनाव से मुक्त रहेगा। मनुष्य जीवन में माया, मोह, लोभ, अहंकार, भौतिकता व दुर्व्यसनों को त्याग कर प्रवृत्तियां धर्ममय रखें। दुर्व्यसनों व अधर्म के मार्ग का त्याग करें, यह सभी आत्मा को अपवित्र करने वाली है, इनका त्याग कर ईश्वर का गुणगान कर संयम का मार्ग अपनाएंगे। तनाव से मुक्ति व आत्मशांति मिलेगी और जीवन सुखमय बनेगा।

आचार्यश्री की अगवानी की

साधुमार्गी जैनाचार्य आचार्यश्री रामलालजी महाराज, सुमितमुनि महाराज भवानीमंंडी से विहार करते हुए रविवार को दिन में गरोठ पहुंचे। श्री श्वेतांबर स्थानक मार्गी जैन श्री संघ द्वारा नगर से 10 किलोमीटर दूर ग्राम बर्डिया इस्तमुरार से जाकर अगवानी की गई आैर नगर में भ्रमण करते हुए श्री संघ श्री जैन उपाश्रय लेकर आए। जहां पर गरोठ सहित मंदसौर, नीमच, भवानी मंडी, उदयपुर, मुंबई सहित विभिन्न शहरों भक्त पहुंचे और आचार्यश्री के दर्शन व प्रवचन का लाभ लिया। श्री जैन उपाश्रय में विभिन्न कार्यक्रम हुए। इस मौके पर श्रीसंघ के शरदचंद चौधरी, विजय सुराणा, प्रकाशचंद्र छाजेड़़, उत्तम ललवानी, कमलेश सुराणा, नरेंद्र सुराणा, भंवरसिंह नाहटा, शरद नाहटा, सुरेश संघवी, अभय छाजेड, राजेश चौधरी सहित श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थीं।