Hindi News »Madhya Pradesh »Garoth» साल में एक बार चैत्र के दशहरे पर बनती बेसन-सिंगाड़े की मीठी सेंव

साल में एक बार चैत्र के दशहरे पर बनती बेसन-सिंगाड़े की मीठी सेंव

नगर में परंपरा तो सदियों पुरानी है लेकिन एक नमकीन-मिष्ठान व्यवसायी परिवार 130 से साल नगर में बेसन व सिंगाड़े की आटे की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 26, 2018, 03:20 AM IST

नगर में परंपरा तो सदियों पुरानी है लेकिन एक नमकीन-मिष्ठान व्यवसायी परिवार 130 से साल नगर में बेसन व सिंगाड़े की आटे की मीठी सेंव बनाकर बेच रहा है। यह वर्ष में केवल एक दिन चैत्र नवरात्रि के दशहरे के दिन ही बिकती है और लोग खरीदकर ले जाते हैं। अब कुछ अन्य दुकानदार भी बनाते हैं, संचालक महेश उदिया की माने तो नगर में एक ही दिन में 10 क्विंटल से ज्यादा बेसन व सिंगाड़े के आटे की मिट्टी सेंव बिकती है, नगर सहित अन्य जिलों सहित राजस्थान, दिल्ली, मुंबई, पुणे, हरियाणा व पंजाब तक अपने रिश्तेदारों के यहां पहुंचाने के लिए लोग खरीदते हैं और आॅर्डर देकर ले जाते भी हैं।

नगर में आजादी के पहले अंग्रेजों और रियासत काल से नगर में चैत्र नवरात्रि पर्व और दशहरा मनाने की परंपरा रही है। समय के अनुसार परंपराओं में कुछ बदलाव हुआ है, बावजूद कई परंपरा आज भी विद्यमान है। नगर के नमकीन व मिष्ठान व्यवसाय महेश उदिया चौथी पीढ़ी के होकर अपने परिवार की 130 साल से भी ज्यादा पुरानी परंपरा को आज भी अपने परिवार के साथ निभा रहे हैं। व्यवसाय महेश उदिया ने बताया आजादी के पहले नगर में रियासत काल से ही जब गरोठ होलकर रियासत का जिला मुख्यालय हुआ करता था। तब बोलिया रोड पर वर्तमान हाट मैदान क्षेत्र में चैत्र नवरात्रि में नौ दिनी मेला लगता था अौर दशमी के दिन रावण जलता था। तब नगर सहित बाहर से दुकानदार आकर दुकानें लगाते थे। परंपरानुसार नवरात्रि में बेसन की व सिंगाड़े के आटे की फीकी सेंव बनाकर उस पर गुड की चासनी चढ़ाकर मीठी सेंव बेचा करते थे। चैत्र नवरात्रि में दुकान आड़ा बाजार की जगह बोलिया रोड स्थित वर्तमान हाट बाजार मैदान में नवरात्रि मेेले में लगती थी। उनके बाद परंपरा को उनके पुत्र और हमारे दादाजी नाथूलाल व जगन्नाथ उदिया ने संभाली, फिर उनके पुत्र रमेश व देवीलाल उदिया ने काम संभाला। पिछले 15 सालों से में महेश और मनीष उदिया दुकान संभाल रहे हैं। अब परंपरा में कुछ बदलाव अाया। करीब 10 साल से नवरात्रि का मेला बंद हो गया लेकिन दशहरे अब भानपुरा रोड स्थित जेल के पास दशहरा मैदान में मनाया जाता है। मीठी सेंव बनाने की परंपरा आज भी 130 साल पुरानी है।

ऐसे बनाते हैं मीठी सेंव

परंपरानुसार बेसन व सिंगाड़े के आटे की फीकी सेंव मनाई जाती हैं। फिर उस पर गुड़ की चासनी चढ़ाई जाती हैं। महेश उदिया बताते है चने की दान का बेसन पिसवाते है अौर उसमें मिर्ची को छोडकर सभी मसाले मिलाते हैं। सिंगाड़े की सेंव के लिए भी खड़े सिंगाड़े खरीदकर पिसवाते हैं। अंतर यह है कि सिंगाड़े के आटे में मसाले मिलाकर दूध में आटा गुंदते हैं। सेंव बनने के बाद तत्काल उसे गुड़ की गर्म चासनी में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर उपर से चासनी डालते हुए मिलाते हैं।

India Result 2018: Check BSEB 10th Result, BSEB 12th Result, RBSE 10th Result, RBSE 12th Result, UK Board 10th Result, UK Board 12th Result, JAC 10th Result, JAC 12th Result, CBSE 10th Result, CBSE 12th Result, Maharashtra Board SSC Result and Maharashtra Board HSC Result Online
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Garoth News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: साल में एक बार चैत्र के दशहरे पर बनती बेसन-सिंगाड़े की मीठी सेंव
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Garoth

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×