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छुरी रखता हूं न तलवार रखता हूं, मैं कलम की धार रखता...

न छुरी रखता हूं न तलवार रखता हूं, मैं अपने पास कलम की धार रखता...कविता शामगढ़ के कवि खाजू खां मंसूरी ‘तालिब’ ने सुनाई...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 09, 2018, 03:20 AM IST

न छुरी रखता हूं न तलवार रखता हूं, मैं अपने पास कलम की धार रखता...कविता शामगढ़ के कवि खाजू खां मंसूरी ‘तालिब’ ने सुनाई तो माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। खड़ावदा के समीप स्थित ग्राम गोपालपुरा में श्री देव मित्र मंडल तत्वावधान में आयोजित कवि सम्मेलन देररात तक चला। ।

सम्मेलन में कवि पुलकित नागर ने हास्यरस की कविताएं सुनाकर श्रोताओं को लोटपोट किया। भवानीमंडी से आए डॉ. कुमार दीपक ने “जब हम बूढ़े होंगे हाथ पैर जुड़े होंगे’ कविता सुनाई। शामगढ़ से आए बंशीधर बंशी पोरवाल ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविता “आतंकवाद अब छोड़ दे..’ रचना पढ़ी। कवि भरत मतवाला ने “बचपन की यादें” गीत से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। चेतन आर्य ने देशभक्ति कविता से सभी श्रोताओं का दिल जीता। रामचंद्र प्रजापति ने गड़बड़ समाचार सुनाए, गोपाल जाटव विद्रोही ने “घर-घर में गोपाल..’ कविता सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया। कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि भगवानसिंह चंद्रावत, धनगर गायरी समाज के पूर्व जिलाध्यक्ष रंगलाल धनगर, बजरंगलाल धाकड़, रामदयाल धनगर कोटडा बुजुर्ग, देव सेना अध्यक्ष जुझारलाल गायरी, प्रेम गायरी मंदसौर, उदयलाल परिहार मंदसौर, रामगोपाल मीणा (पूर्व सरपंच)देथली खुर्द, हुकुमचंद र|ावत देथली बुजुर्ग और शिवशंकर गरगामा बरखेड़ा गंगासा मंचासीन थे। देर रात तक चले कवि सम्मेलन का संचालन ओमप्रकाश नागर खड़ावदा ने किया। आभार रामकरण गायरी व भरत मतवाला ने व्यक्त किया।

ग्राम गोपालपुरा में आयोजित कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते।

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