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बोलिया में शोभायात्रा के साथ विश्राम, गरोठ में जन्मे श्रीकृष्ण, मनाया उत्सव

अंचल में 15 दिन से भक्तिमय माहौल बना है। बोलिया में 15 दिवसीय श्रीमद् भागवत और श्रीराम कथा विश्राम पर डेढ़ किमी लंबी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 09, 2018, 03:20 AM IST

अंचल में 15 दिन से भक्तिमय माहौल बना है। बोलिया में 15 दिवसीय श्रीमद् भागवत और श्रीराम कथा विश्राम पर डेढ़ किमी लंबी शोभायात्रा निकाली। जिसमें महंत श्री राधे राधे निर्मोही बाबा को विदाई दी गई। दूसरी तरफ गरोठ में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान जैसे ही श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो पांडाल गुंजायमान हो गया। हर तरफ हाथी, घोड़ा, पालकी, गरोठ में आनंद भयो जय कन्हैयालाल..से गुंजायमान हो गया। कृष्ण जन्म होते ही भक्त भजनों पर झुमे, ताे बोलिया में भी शोभायात्रा में भक्त भजनों पर नृत्य करते हुए चल रहे थे।

बोलिया में 15 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा व श्रीराम कथा का महायज्ञ और पूर्णाहुति के साथ रविवार काे विश्राम हुआ। सोमवार को कथा स्थल से महंतश्री राधे-राधे निर्मोही बाबा को विदाई देने के लिए ग्राम सहित मप्र व राजस्थान के 30 से ज्यादा गांव के ग्रामीण भक्तजन जुटे थे। पोथी और गुुरु पूजा के बाद बैंडबाजों और ढोल-ढमाकों के साथ विशाल शोभायात्रा निकली। इसमें श्री चौमुखी महादेव की प्रतिमा रथ पर विराजित थी तो महंतश्री राधे-राधे बाबा खुली जीप में बने आकर्षक रथ पर सवार थे। उनके आगे-आगे खुली जीप में श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य यजमान संदीपसिंह जादौन और श्रीरामकथा के मुख्य यजमान मांगीलाल पाटीदार पोथीजी को शिरोधार्य कर परिवार सहित सवार थे। यात्रा में आगे-आगे घोड़ाें पर सवार होकर मुख्य यजमान व ध्वजधारी चल रहे थे। मुख्य कलश के यजमान ओमप्रकाश पाटीदार, वसुदेव बने शंकरलाल पाटीदार, नंदबाबा बने शिवनारायण सोनी, तुलसी के माता-पिता बने श्यामसिंह भी परिवार सहित खुली जीप में सवार थे। यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए शिवालय धर्मशाला श्री चौमुखी महादेव मंदिर पहुंची। रास्तेभर 150 से ज्यादा स्थानों पर भक्तों ने यात्रा का स्वागत किया। शोभायात्रा शिवालय धर्मशाला पहुंचकर धर्मसभा और सत्कार सभा में परिवर्तित हुई। महंतश्री ने संबोधित किया। पश्चात कथा के दौरान सहभागिता निभाने वाले भक्तों का सम्मान किया। महाआरती के बाद महाआरती हुई।

बोलिया में कथा विश्राम के बाद निकाली यात्रा में जीप पर में विराजित महंतश्री राधे-राधे निर्मोही।

गरोठ में मेला ग्राउंड पर कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान भजनों पर खुशी मनाते और झूमते भक्त।

‘विनाश का कारण होता अहंकार, जहां प्रेम-भाईचारा है वहां भगवान निवास करते’

अहंकार सदैव मनुष्य के जीवन में विनाश का कारण बनता है और प्रेमभाव सदैव मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। जहां पर प्रेम-भाईचारा का निवास है वहा पर भगवान का वास होता है। यह बात गरोठ के मेला ग्राउंड में श्रीमद् भागवत कथा में सोमवार को भागवताचार्य अमन बैरागी ने कही। कथा के दौरान भागवताचार्य ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर उनकी लीलाओं का प्रसंग सुनाया। जन्म प्रसंग सुनकर भक्त भावविभोर होने के साथ खुशी से झूम उठे। कथा के दौरान नंद के घर आनंद भयो...भजन पर के दौरान कथा पंडाल के बीच नंदबाबा अपने सिर पर टोकरी में श्रीकृष्ण के बालरूप को लेकर आए तो उपस्थित भक्तों ने फूल की बरसात करते हुए जयकारे लगाए। भक्त भगवान का जन्म होते ही नाचने-झूमने लगे और मक्खन की होली खेलकर उत्सव मनाया। सोमवार को भागवत महापुराण का पूजन एवं आरती के साथ ही भागवताचार्य का सम्मान पाटीदार समाज के रामनारायण पाटीदार बरखेड़ालोया, गुड्डू पाटीदार, राहुल पाटीदार, दिनेश पाटीदार और सुतार विश्वकर्मा समाज गरोठ के अध्यक्ष पप्पू विश्वकर्मा, मदनलाल सुतार, शिवनारायण विश्वकर्मा जगदीश विश्वकर्मा के साथ आयोजन समिति अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, संरक्षक कुंवर नारायणसिंह सिसौदिया ढाकनी ने किया।

भागवत कथा

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