• Hindi News
  • Madhya Pradesh
  • Garoth
  • ‘जीवन में यश पाने के लिए अच्छे कर्म करना बहुत जरूरी’
--Advertisement--

‘जीवन में यश पाने के लिए अच्छे कर्म करना बहुत जरूरी’

Garoth News - ईश्वर अच्छे कार्य करने वाले को माध्यम बनाता है। उनकी इच्छा के बिना कुछ भी संभव नहीं है। जीवन में यश पाने के लिए...

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2018, 02:40 PM IST
‘जीवन में यश पाने के लिए अच्छे कर्म करना बहुत जरूरी’
ईश्वर अच्छे कार्य करने वाले को माध्यम बनाता है। उनकी इच्छा के बिना कुछ भी संभव नहीं है। जीवन में यश पाने के लिए अच्छे कर्म का करना बहुत जरूरी है। मनुष्य को सदैव अच्छे कर्म एवं आचरण रखना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने मित्रता को बहुआयाम दिया और मित्रता का महत्व भी समझाया है। यह बात भागवताचार्य अमन बैरागी ने कथा विश्राम पर श्रीकृष्ण सुदामा के प्रसंग सुनाते हुए कही।

गुरुवार को नगर के मेला मैदान में सात दिनी श्रीमद् भागवत कथा विश्राम हुआ। इसके पहले भागवताचार्य बैरागी ने श्रीकृष्ण-सुदामा सहित अन्य प्रसंग सुनाए। गुरुवार को कथा के शुरू में आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक एवं विधायक चंदरसिंह सिसौदिया, समिति अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, संरक्षक नगर परिषद अध्यक्ष अनोख पाटीदार, दिनेश पाटीदार, सुरेश पालीवाल, संजय गुप्ता, केके भट्ट, राधेश्याम सेठिया, रमेश सेनपुरिया, सुरेश शर्मा, राजेश सेठिया, गोपाल पाटीदार, बंटी वैष्णव सहित भक्तजन ने भागवताचार्य बैरागी को सम्मान-पत्र और शाॅल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। कथा विश्राम पर पंडाल में हवन किया जाकर पूर्णाहुति में भक्तों ने भाग लिया। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामाजी की झांकी सजाई। महाआरती अौर महाप्रसादी वितरण के साथ कथा विश्राम हुआ। समिति द्वारा कथा का मूल पाठ करने वाले पंडित भरत शर्मा, दिनेश बैरागी, संगीत मंडली का भी सम्मान-स्वागत किया। संचालन हेमंत पाटीदार, लक्ष्मीनारायण मांदलिया ने किया। आभार दिनेश पाटीदार ने माना।

मेला ग्राउंड पर सात दिनी श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम पर बोले भागवताचार्य बैरागी, पूर्णाहुति व महाआरती के बाद बांटी प्रसादी

बिना कर्त्तव्य पालन के एकाग्रता नहीं आती- स्वामी सोमगिरी महाराज

पिपलियामंडी | बिना कर्तव्य पालन के जीवन में एकाग्रता नहीं आ सकती। कर्तव्य से विमुख होने पर मन भटकने लगता है। एकाग्रता के लिए मन का शांत होना जरूरी है। एकात्म यात्रा घर-घर से शुरू होना चाहिए। इसे 22 जनवरी तक सीमित न रखें, इसे घर-घर एवं अपने स्वयं के अंदर निरंतर चलने दें। यह बात स्वामी सोमगिरी महाराज ने कही। वे गुरुवार को पिपलियामंडी में एकात्म यात्रा के बाद शासकीय बालक उमावि की धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने ज्ञान को लेकर यात्रा शुरू की थी। इसका उद्देश्य किसी मत को परिवर्तित करना नहीं बल्कि पूरे भारत को एक करना था। वैदिक धर्म को बचाए रखने के लिए शंकराचार्य ने अथक प्रयास किए। भारतीय संस्कृति का पूरा सार वेदों में लिखा हुआ है। इनको जीवन में उतारना चाहिए। आज स्कूली शिक्षा में वेदों के ज्ञान को नहीं बताया जाता। इससे वैदिक ज्ञान से आने वाली पीढ़ी वंचित होती जा रही है। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने प्रदेश की धरती पर 1200 वर्ष पूर्व चरण रखे। उन्होंने सबको एकजुट करने के लिए चार मठों की स्थापना की। इसी तारतम्य में यह यात्रा 21 जनवरी को ओंकारेश्वर में पूर्ण होगी। धर्मसभा में यात्रा के जिला संयोजक एवं जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष मदनलाल राठौर ने एकात्म का संकल्प दिलाया।

यहां से गुजरी यात्रा - एकात्म यात्रा गुरुवार सुबह मंदसौर से प्रस्थान कर बोतलगंज, रिछाबच्चा, पिपलियापंथ होते हुए पिपलियामंडी पहुंची। यात्रा का बहीचौपाटी, पिपलियापंथ सहित मार्ग में जगह-जगह भव्य स्वागत हुआ। नगर प्रवेश पर भव्य कलश यात्रा निकाली जो प्रमुख मार्गों से होती हुई शासकीय बालक उमावि पर संपन्न हुई। यहां संतों ने कन्या पूजन किया।

X
‘जीवन में यश पाने के लिए अच्छे कर्म करना बहुत जरूरी’
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..