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गरोठ से भानपुरा तक मरीज परेशान, अस्पताल में एकमात्र सोनोग्राफी मशीन वह भी 10 माह से बंद

जिला चिकित्सालय मंदसौर के बाद सबसे बड़ा गरोठ सिविल अस्पताल है लेकिन यहां सुविधा के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है।...

Dainik Bhaskar

Apr 12, 2018, 02:25 AM IST
गरोठ से भानपुरा तक मरीज परेशान, अस्पताल में एकमात्र सोनोग्राफी मशीन वह भी 10 माह से बंद
जिला चिकित्सालय मंदसौर के बाद सबसे बड़ा गरोठ सिविल अस्पताल है लेकिन यहां सुविधा के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। यही हालात शासकीय अस्पताल भानपुरा के हैं। दोनों के बीच गरोठ में एक सोनोग्राफी सेंटर है वह भी 10 महीने से पड़ा है। ऐसे में मरीजों को विशेषकर महिलाओं को प्राइवेट अस्पताल या जिला अस्पताल मंदसौर जाना पड़ता हैं। जब गरोठ अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन थी तब औसतन 15 मरीज रोज अाते थे। सिविल अस्पताल सूत्रों के अनुसार वर्तमान में 20 से 22 मरीज आ रहे हैं। मशीन बंद होने से उन्हें बाहर जाना पड़ता है। यदि सभी मरीजों की बात करें तो गरोठ में 300 से ज्यादा और भानपुरा में 200 से ज्यादा मरीज औसतन रोज आते हैं।

सिविल अस्पताल गरोठ में स्त्री रोग विशेषक डाॅ. रितु शर्मा के तबादले के बाद से सोनोग्राफी मशीन बंद है। डॉ. शर्मा के समय सिविल अस्पताल में रोज करीब 15 डिलीवरी होने के साथ महिलाओं के इलाज की बेहतर तो नहीं कह सकते लेकिन अच्छी सुविधा थी। तब सप्ताह में 2 से 3 दिन डॉ. शर्मा ही सोनोग्राफी भी करती थीं। ऐसे में गरीब मरीजों को प्राइवेट अस्पताल या मंदसौर कम ही जाना पड़ता था और औसतन रोज 15 सोनोग्राफी होती थी। इसमें गरोठ व भानपुरा सहित अासपास के शासकीय अस्पतालों से अाने वाले डिलीवरी सहित अन्य बीमारियों से संबंधित मरीजों को सोनोग्राफी की सुविधा थी। 10 महीने पहले एक महिला की मौत के बाद परिजन ने डॉ. शर्मा पर समय पर मरीज को नहीं देखने को लेकर हंगामा किया था। यहां तक कि घर पर जाकर तोड़फोड़ तक कर दी, उसके बाद डॉ. शर्मा ने तबादला अन्यत्र करवा लिया। तब से ही सिविल अस्पताल गरोठ में स्त्रीरोग विशेषज्ञ डाॅक्टर नहीं आया। ऐसे में सोनोग्राफी मशीन भी उनके जाने के बाद से बंद है। तब से ही डिलीवरी के केस भी कम हो गए, क्योंकि अस्पताल पूरी तरह पुरुष चिकित्सकों और नर्सों के भरोसे चलता रहा। बीच-बीच में महिला चिकित्सकों की नियुक्ति हुई, लेकिन स्त्रीरोग विशेषज्ञ एक भी नहीं आई। ऐसे में जरा-सा भी गंभीर मामला होने पर मंदसौर रैफर कर दिया जाता है, फिर मरीज के परिजन निजी चिकित्सक के पास ले जाते हैं। जहां स्त्रीरोग विशेषज्ञ के साथ सोनोग्राफी की सुविधा मिल जाती हैं। डॉ. शर्मा के जाने के बाद से यहां स्त्रीरोग विशेषज्ञ के साथ सोनोग्राफी मशीन शुरू करने की मांग उठ रही है लेकिन जिम्मेदारों ने आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया।

15 दिन में मिलने वाली सुविधा, तीन महीने बाद भी प्रक्रियाधीन

सिविल अस्पताल गरोठ में इसी साल जनवरी में सिविल अस्पताल परिसर में मेल (पुरुष) वार्ड व डाॅक्टर क्वार्टर्स का लोकार्पण हुआ था। तब लोगों ने सोनोग्राफी मशीन और डिजिटल एक्स-रे मशीन की सुविधा शुरू करने की मांग उठाई थी, तब बीएमओ डॉ. आरसी कुकड़े ने जनप्रतिनिधियों के सामने कहा था कि 15 दिन में वर्तमान एक्स-रे मशीन को डिजिटल एक्स-रे मशीन में अपडेट कर लिया जाएगा। साथ ही सोनोग्राफी मशीन को शुरु करने के लिए 1 महीने में विशेषज्ञ की नियुक्ति हो जाएगी। किंतु दोनों ही काम अब तक नहीं हुए हैं।

ना हड्डीरोग विशेषज्ञ ना ही स्त्रीरोग विशेषज्ञ

सिविल अस्पताल गरोठ व भानपुरा की बात करें तो दोनों ही जगह हड्डीरोग विशेषज्ञ और स्त्रीरोग विशेषज्ञ पदस्थ नहीं हैं। दोनों अस्पतालों में रोज औसतन 80 महिला मरीज आती हैं जिनमें 20 डिलीवरी से संबंधित होती हैं। नाॅर्मल डिलीवरी तो दोनों ही अस्पताल में स्टाफ नर्स करवा देती हैं लेकिन गंभीर प्रकरण होने या आशंका होने पर रैफर कर दिया जाता है क्योंकि स्त्रीरोग विशेषज्ञ के साथ सोनोग्राफी की भी सुविधा नहीं है।

इसी प्रकार दोनों ही अस्पतालों में दुर्घटना से संबंधित मामले औसतन रोज 8 से 10 आते हैं। घायल मरीजों में अधिकतर एेसे होते हैं जिनका एक्सरे होने के साथ हड्डी रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता होती हैं। एक्सरे मशीन दोनों जगह 5 से 6 साल पुरानी होने के कारण सही परिणाम नहीं आते। उस पर हड्डीरोग विशेषज्ञ तो छोड़िए कोई विशेषज्ञ डाॅक्टर तक नहीं हैं। सड़क दुर्घटना या अन्य हादसों से फैक्चर होने पर मरीजों को मंदसौर या कोटा रैफर करना पड़ता है। रोज औसतन 5 से 6 मरीज फैक्चर होने या आंशका के चलते रैफर होते हैं।

सिविल अस्पताल गरोठ स्थित सोनोग्राफी मशीन रूम जो अब महिला चिकित्सक रूम बन चुका है।

प्राइवेट सेंटर के भरोसे सोनोग्राफी

गरोठ व भानपुरा के एक-एक निजी अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा है। आवश्यक होने पर मरीज इन प्राइवेट अस्पताल में जाएं या फिर मंदसौर व राजस्थान के सरकारी अस्पताल जाएं। शामगढ़ के शासकीय अस्पताल में जरूर सोनोग्राफी की सुविधा है, लेकिन वहां भी औसतन प्रतिदिन 7 से 8 सोनोग्राफी ही हो पाती है, जबकि यहां प्रतिदिन 10 से 12 डिलीवरी होती है।

प्रक्रिया चल रही है


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